Next issue of the Nityanootan ll be on peace in South Asia , specially on indo -Pak relations. Pl send a article English or urdu as per ur convenience .
Regards.
ग्लोबल यूथ फेस्टिवल के तीसरे दिन: विविधता में एकता का अनोखा संगम, 400 युवाओं ने प्रस्तुत की भारत की सांस्कृतिक धरोहर भारत की सांस्कृतिक विविधता और युवा ऊर्जा का अनुपम मेल देखने को मिला ग्लोबल यूथ फेस्टिवल के तीसरे दिन। देश भर से आए लगभग 400 युवाओं ने अपने-अपने प्रदेशों, भाषाओं और क्षेत्रीय परंपराओं की छटा बिखेरी, तो वहीं सबने मिलकर 'भारत की संतान' नामक एक सामूहिक प्रस्तुति तैयार की, जो 18 भाषाओं में रंगीन हुई। यह प्रस्तुति न केवल भारत की बहुलता को दर्शाती है, बल्कि एकता का संदेश भी देती है—कि बेशक भारत में अनेक भाषाएं, रंग, जातियां और क्षेत्र हैं, लेकिन हम सब मिलकर एक सुंदर चित्र बनाते हैं। इस प्रस्तुति के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि भारत माता मात्र धरती, प्रकृति, जल, नदियां और पर्वतों तक सीमित नहीं है, अपितु यहां के वे तमाम लोग हैं जो जन्म लेकर पल-बढ़कर इस देश को समृद्ध बनाने में लगे रहते हैं। स्वर्गीय श्री सुब्बाराव जी द्वारा तैयार की गई यह प्रस्तुति आज मंच पर इतने अद्भुत ढंग से मंचित हुई कि सर्वत्र इसकी प्रशंसा हो रही है। दर्शकों ने इसे एक भ...
पानीपत की बहादुर बेटी सैयदा- जो ना थकी और ना झुकी : ●पानीपत, एक ऐतिहासिक भूमि, न केवल अपने युद्धक्षेत्र के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि उन महान व्यक्तित्वों के लिए भी जो इसकी मिट्टी से उपजे और समाज को नई दिशा दी। ऐसी ही एक शख्सियत हैं सैयदा हमीद, जिन्होंने इंसानियत और उत्पीड़ित महिलाओं के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया। उनकी कहानी साहस, समर्पण और देशभक्ति की मिसाल है। ●एक गौरवशाली विरासत: सैयदा का परिवार लगभग 800 वर्ष पहले पानीपत में आकर बसा था। उनके परदादा, ख्वाजा अल्ताफ हुसैन हाली, न केवल पानीपत के गौरव थे, बल्कि विश्व स्तर पर अपनी शायरी और समाज सुधार के कार्यों के लिए विख्यात थे। उनकी कालजयी रचनाएँ आज भी साहित्य प्रेमियों के दिलों में बसी हैं। सैयदा के मामा, ख्वाजा अहमद अब्बास, स्वतंत्रता संग्राम के नायक थे। उन्होंने न केवल आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया, बल्कि प्रगतिशील लेखक संघ और भारतीय जन नाट्य संघ (IPTA) की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया। गुलाम भारत में जन्मे इस परिवार ने आजादी के बाद भी पाकिस्तान जाने के बजाय भारत को चुना और यहाँ साहित्य, पत्रकारिता और फिल्म उ...
भगत सिंह और गांधी के विचारों को एक साथ अपनाने की जरूरत : प्रो. जगमोहन सिंह नेशनल यूथ प्रोजेक्ट, गांधी ग्लोबल फैमली और संत Nirankari मिशन के तत्वावधान में आयोजित छह दिवसीय ग्लोबल यूथ फेस्टिवल के उद्घाटन अवसर पर शहीद आजम सरदार भगत सिंह के भांजे एवं प्रसिद्ध चिंतक प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि शहीद भगत सिंह और महात्मा गांधी एक-दूसरे के पूरक थे। उन्होंने यह भ्रामक प्रचार कि महात्मा गांधी ने भगत सिंह की फांसी रुकवाने का कोई प्रयास नहीं किया, पूरी तरह गलत बताते हुए स्पष्ट किया कि यदि भगत सिंह स्वयं चाहते तो वे फांसी से बच सकते थे। लेकिन वे अपने जीवन को भारतीय युवाओं के लिए एक महानतम आदर्श बनाना चाहते थे, ताकि अधिक से अधिक युवा राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो सकें। प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी और भगत सिंह की कार्यशैली में भले ही अंतर था, लेकिन भगत सिंह भी अहिंसा के सिद्धांत को मानते थे। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि उन्होंने जेल में अपनी जायज मांगों के लिए 116 दिनों की भूख हड़ताल की थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में शह...
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