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महात्मा गांधी, डॉ. डब्ल्यू. ई. बी. डुबॉयस और आज की दुनिया : नई तालीम के संदर्भ में कुछ विचार

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महात्मा गांधी, डॉ. डब्ल्यू. ई. बी. डुबॉयस और आज की दुनिया : नई तालीम के संदर्भ में कुछ विचार नई तालीम के हालिया सत्र में डॉ. डब्ल्यू. ई. बी. डुबॉयस के भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर लिखे गए विचारों को सुनने का अवसर मिला। यह केवल एक अकादमिक अनुभव नहीं था, बल्कि इतिहास, दर्शन और मानव मुक्ति के प्रश्नों पर गंभीर चिंतन का अवसर भी था। डॉ. डुबॉयस केवल अफ्रीकी-अमेरिकी समाज के महान चिंतक, समाजशास्त्री और मानवाधिकार योद्धा ही नहीं थे; वे भारत, विशेषकर महात्मा गांधी के जीवन, संघर्ष और नैतिक नेतृत्व के प्रति गहरी श्रद्धा रखते थे। उन्होंने औपनिवेशिक शासन को केवल आर्थिक शोषण की व्यवस्था नहीं माना, बल्कि उसे नस्लीय वर्चस्व की वैश्विक संरचना के रूप में भी समझा। इसी कारण उनके विचार आज भी मार्क्सवादी विमर्श के साथ-साथ उपनिवेशवाद, नस्लवाद और सामाजिक न्याय के अध्ययन में अत्यंत प्रासंगिक हैं। सामान्यतः साम्यवाद की चर्चा मार्क्सवाद, लेनिनवाद और वैज्ञानिक समाजवाद के संदर्भ में होती है, किंतु यदि विश्व की असमानताओं और शोषण की व्यापक संरचना को समझना हो, तो डुबॉयस के विश्लेषण को भी समान गं...

दासता की जंजीरों से मुक्ति का उत्सव और मानव समानता का संदेश— नीदरलैंड की यात्रा से एक प्रत्यक्ष अनुभव

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दासता की जंजीरों से मुक्ति का उत्सव और मानव समानता का संदेश — नीदरलैंड की यात्रा से एक प्रत्यक्ष अनुभव आज (1 जुलाई) मुझे नीदरलैंड के एम्स्टर्डम स्थित म्यूज़ियमप्लेन (Museumplein) में आयोजित केटी कोटी (Keti Koti) के विशाल अंतरराष्ट्रीय उत्सव में सम्मिलित होने का अवसर मिला। यह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि मानव गरिमा, स्वतंत्रता, समानता और न्याय के लिए किए गए ऐतिहासिक संघर्ष की जीवंत अभिव्यक्ति थी। 'केटी कोटी' का अर्थ है—"टूटी हुई जंजीरें"। यह दिवस उन लाखों अफ्रीकी मूल के स्त्री-पुरुषों और बच्चों की स्मृति को समर्पित है जिन्हें सदियों तक गुलाम बनाकर यूरोप की उपनिवेशों में अमानवीय जीवन जीने को विवश किया गया। हजारों लोग—अश्वेत, श्वेत, एशियाई, भारतीय, सूरीनामी, कैरेबियाई और अनेक अन्य देशों के नागरिक—रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में इस उत्सव में एकत्रित हुए। पूरा वातावरण संगीत, नृत्य, संस्कृति और स्वतंत्रता के उल्लास से भरा हुआ था। चारों ओर व...

केटी कोटी (Keti Koti): दासता की जंजीरों से मुक्ति का उत्सव और मानव समानता का संदेश

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केटी कोटी (Keti Koti): दासता की जंजीरों से मुक्ति का उत्सव और मानव समानता का संदेश — नीदरलैंड की यात्रा से एक प्रत्यक्ष अनुभव आज (1 जुलाई) मुझे नीदरलैंड के एम्स्टर्डम स्थित म्यूज़ियमप्लेन (Museumplein) में आयोजित केटी कोटी (Keti Koti) के विशाल अंतरराष्ट्रीय उत्सव में सम्मिलित होने का अवसर मिला। यह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि मानव गरिमा, स्वतंत्रता, समानता और न्याय के लिए किए गए ऐतिहासिक संघर्ष की जीवंत अभिव्यक्ति थी। ' केटी कोटी ' का अर्थ है— "टूटी हुई जंजीरें" । यह दिवस उन लाखों अफ्रीकी मूल के स्त्री-पुरुषों और बच्चों की स्मृति को समर्पित है जिन्हें सदियों तक गुलाम बनाकर यूरोप की उपनिवेशों में अमानवीय जीवन जीने को विवश किया गया। हजारों लोग—अश्वेत, श्वेत, एशियाई, भारतीय, सूरीनामी, कैरेबियाई और अनेक अन्य देशों के नागरिक—रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में इस उत्सव में एकत्रित हुए। पूरा वातावरण संगीत, नृत्य, संस्कृति और स्वतंत्रता के उल्लास से भरा हुआ था। चारों ओर विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर कलाकार अपनी प्रस्तुतियाँ दे रहे थे। ...

प्रेरणा के स्रोत: प्रिंसिपल लाभ सिंह जी

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प्रेरणा के स्रोत: प्रिंसिपल लाभ सिंह जी कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनकी उपस्थिति मात्र से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हमारे आदरणीय प्रिंसिपल लाभ सिंह जी ऐसे ही व्यक्तित्वों में से एक हैं। वे मेरे अध्यापक रहे हैं और मुझे उनके छात्र होने का गर्व है। अर्थशास्त्र के लोकप्रिय शिक्षक के रूप में उन्होंने हजारों विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। बाद में वे आर्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पानीपत के उप-प्रधानाचार्य और फिर प्रधानाचार्य बने। उनके कार्यकाल में विद्यालय ने निरंतर प्रगति की और हाई स्कूल से सीनियर सेकेंडरी विद्यालय के रूप में विकसित हुआ। लाभ सिंह जी केवल एक शिक्षक या प्रशासक ही नहीं थे, बल्कि अनुशासन, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व के जीवंत उदाहरण रहे हैं। वे एनसीसी और एनएसएस के प्रभारी भी रहे। उनकी कार्यशैली एक सैनिक के समान अनुशासित और दृढ़ थी। साथ ही वे आर्य समाज की गतिविधियों में गहरी रुचि रखते थे तथा अनेक बार आर्य प्रतिनिधि सभा और आर्य विद्या परिषद के महत्वपूर्ण पदों पर रहे। हाल ही में उनका हमारे घर आगमन हुआ। वे हमें अपना आशीर्वाद देने आए थे। उनकी उपस्...

पानीपत का इतिहास-2

पानीपत : इतिहास की धड़कनों को सुनने का एक प्रयास -1 पानीपत का नाम सुनते ही सामान्यतः लोगों के मन में तीन महान युद्धों की स्मृति उभर आती है। इतिहास की पुस्तकों में भी पानीपत का परिचय प्रायः इन्हीं युद्धों के माध्यम से कराया जाता है। किंतु मेरे लिए पानीपत का अर्थ केवल युद्धों का मैदान नहीं है। यह एक जीवंत सभ्यता, बहुआयामी संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और साझी विरासत की वह धरती है जिसने सहस्राब्दियों से भारत के इतिहास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पानीपत के इतिहास के प्रति मेरी रुचि का आरंभ मेरे छात्र जीवन में हुआ, परंतु इस रुचि को दिशा और गहराई प्रदान करने का श्रेय मेरे पूज्य पिता मास्टर सीताराम जी सैनी को जाता है। उन्होंने सन् 1928 से 1948 तक जैन हाई स्कूल, पानीपत में अध्यापक के रूप में कार्य किया। इतिहास उनके प्रिय विषयों में था। बचपन में जब मैं उनके साथ बैठता, तो वे केवल घटनाएँ नहीं सुनाते थे, बल्कि उन घटनाओं के पीछे छिपे समाज, संस्कृति और मानवीय अनुभवों की भी चर्चा करते थे। वे अक्सर कहा करते थे कि पानीपत का इतिहास केवल तीन युद्धों का इतिहास नहीं है। यह वह भूमि है जिसने मह...