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Gandhi Jayanti Resonates Across the World - Gandhi Global Family

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गांधी जयंती पर विश्वभर में गूंजा गांधी का संदेश गांधी ग्लोबल फैमिली के आह्वान पर भारत सहित अनेक देशों में कार्यक्रम आयोजित  3 अक्टूबर 2026 महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर गांधी ग्लोबल फैमिली (GGF) के आह्वान पर भारत सहित विश्व के अनेक देशों में आयोजित कार्यक्रमों की प्राप्त हो रही सूचनाएँ इस बात का परिचय हैं कि गांधीजी के सत्य, अहिंसा, शांति, सद्भाव और मानवता के विचार आज भी विश्वभर में स्वीकार्यता और प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। गांधी ग्लोबल फैमिली को अमेरिका, नीदरलैंड, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित भारत के विभिन्न राज्यों के शहरों और कस्बों से गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त हुई है। इन कार्यक्रमों में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ उनके जीवन और विचारों पर चर्चा, प्रार्थना सभाएँ, शांति एवं सद्भाव के कार्यक्रम तथा सामाजिक जागरूकता से जुड़े आयोजन किए गए। भारत में गांधी ग्लोबल फैमिली की ओर से जम्मू, पानीपत, बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन...

गांधी के स्थलों को सम्पत्ति नहीं, विचारों का तीर्थ बनाइए

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गांधी के स्थलों को सम्पत्ति नहीं, विचारों का तीर्थ बनाइए — राम मोहन राय अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय, भारत महासचिव, गांधी ग्लोबल फैमिली / निर्मला देशपांडे संस्थान महात्मा गांधी के सत्याग्रह से जुड़े भारत और दक्षिण अफ्रीका के नौ ऐतिहासिक स्थलों को UNESCO की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची (Tentative List) में शामिल किया जाना निश्चित रूप से भारत और गांधी विचार से जुड़े सभी लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रसन्नता का विषय है। भारत की ओर से प्रस्तुत इस अंतरराष्ट्रीय श्रृंखलाबद्ध नामांकन में सात स्थल भारत में और दो दक्षिण अफ्रीका में हैं। भारत के स्थलों में महात्मा गांधी सत्याग्रह स्मारक, साबरमती आश्रम, मणि भवन, हरिजन सेवक संघ, सेवाग्राम आश्रम, आगा खान पैलेस और गांधी स्मृति शामिल हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका में पीटरमैरिट्जबर्ग रेलवे स्टेशन और फीनिक्स सेटलमेंट शामिल हैं। यह केवल कुछ भवनों, कमरों, आश्रमों या स्मारकों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने का प्रश्न नहीं है। UNESCO के दस्तावेज के अनुसार इन स्थलों की विशेषता इस बात में है कि ये सत्याग्रह के जन्म, प्रयोग, विकास और संस्थागत रू...

बच्चों की कहानियां

 🐱🐭 बिल्ली और चूहे की दोस्ती एक बार की बात है। एक सुंदर-से घर में मम्मी-पापा अपने दो बच्चों के साथ रहते थे। बेटा बारह साल का था और बेटी नौ साल की। दोनों भाई-बहन बहुत प्यारे थे और उन्हें जानवरों से भी बहुत प्यार था। उनके घर में एक सुंदर-सी बिल्ली भी रहती थी। उसका नाम था मिन्नी। मिन्नी को अपने ऊपर बहुत घमंड था। वह दिनभर घर में ऐसे घूमती, जैसे पूरे घर की मालकिन वही हो! लेकिन उसी घर में एक छोटा-सा चूहा भी रहता था। वह बहुत समझदार और फुर्तीला था। उसका छोटा-सा बिल था, जिसमें वह खतरा देखते ही घुस जाता था। एक दिन मिन्नी को पता चल गया कि घर में चूहा भी रहता है। मिन्नी ने अपनी मूँछों पर ताव देते हुए कहा— “अच्छा! तो मेरे घर में चूहा भी रहता है! अब देखना, मैं उसे कैसे पकड़ती हूँ!” बेचारा चूहा यह सुनकर घबरा गया। वह मन ही मन बोला— “हे भगवान! अब तो मेरी शामत आ गई। यह बिल्ली मुझे चैन से जीने नहीं देगी।” मिन्नी कई बार चूहे को पकड़ने दौड़ी, लेकिन चूहा भी बहुत चालाक था। जैसे ही मिन्नी झपटी— फुर्रर्र! चूहा बिल में! मिन्नी बोली— “अरे! फिर बच गया!” चूहा अंदर से हँसते हुए बोला— “मिन्नी जी, पहले मुझे पकड...

Arya College, Panipat

आर्य कॉलेज पानीपत : मेरी स्मृतियों, मेरी विरासत और मेरे संकल्प की यात्रा जब-जब मैं अपनी किशोरावस्था से युवावस्था की ओर बढ़ने के उस दौर को याद करता हूँ, मेरी स्मृतियों में सबसे पहले जिन स्थानों की तस्वीर उभरती है, उनमें आर्य कॉलेज, पानीपत का स्थान अत्यंत विशेष है। इस कॉलेज के परिसर में कदम रखते ही आज भी मुझे ऐसा अनुभव होता है, जैसे समय की धारा पीछे लौट गई हो और मैं फिर उसी किशोर अवस्था में पहुंच गया हूँ, जब आंखों में सपने थे, मन में जिज्ञासा थी और जीवन के रास्ते धीरे-धीरे खुल रहे थे। मेरा जन्म वर्ष 1957 में हुआ, लेकिन आर्य समाज और उससे जुड़े संस्थानों से मेरे परिवार का संबंध मुझसे कई वर्ष पहले का है। मेरे पिता आर्य समाज, पानीपत से लगभग 1940 के आसपास जुड़े और बाद में उन्होंने अनेक वर्षों तक आर्य समाज के पुस्तकालयाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दीं। हमारा परिवार आर्य समाज की विचारधारा, शिक्षा, सामाजिक सुधार, राष्ट्रीय चेतना और मानवीय मूल्यों से गहरे रूप में जुड़ा रहा है। इसी पारिवारिक वातावरण के कारण मेरा आर्य कॉलेज से परिचय बहुत छोटी उम्र में ही हो गया था। लगभग 1962 से मैं अपने माता-पिता ...

भगत सिंह पर लेख

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भगत सिंह के परिवार की आर्य समाजी विरासत और उनके क्रांतिकारी विचारों की पृष्ठभूमि शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह को समझने के लिए केवल उनके क्रांतिकारी जीवन और बलिदान को देखना पर्याप्त नहीं है। उनके व्यक्तित्व की जड़ें उस परिवार और सामाजिक वातावरण में गहराई से जुड़ी थीं, जिसमें देशभक्ति, सामाजिक सुधार, शिक्षा, धार्मिक चेतना और अंग्रेजी शासन के प्रति असहमति साथ-साथ विकसित हो रही थी। भगत सिंह का पैतृक संबंध पंजाब के खटकड़ कलां से था। बाद में परिवार लायलपुर जिले की नहर कॉलोनी में जाकर बसा और Chak No. 105 Banga में रहने लगा। इसी बंगा में 28 सितंबर 1907 को भगत सिंह का जन्म हुआ। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अभिलेख में भी उनके जन्मस्थान के रूप में 105 Chak Banga, जड़ांवाला तहसील, लायलपुर जिला दर्ज है। परिवार में देशभक्ति की परंपरा भगत सिंह के दादा सरदार अर्जन सिंह परिवार के प्रभावशाली व्यक्तित्व थे। राष्ट्रीय अभिलेखागार की सामग्री उन्हें एक बड़े भू-स्वामी और प्रतिष्ठित सिख परिवार के सदस्य के रूप में वर्णित करती है। परिवार की पिछली पीढ़ियों का संबंध सिख परंपरा और पंजाब के राजनीतिक-...