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पानीपत का इतिहास-2

पानीपत : इतिहास की धड़कनों को सुनने का एक प्रयास पानीपत का नाम सुनते ही सामान्यतः लोगों के मन में तीन महान युद्धों की स्मृति उभर आती है। इतिहास की पुस्तकों में भी पानीपत का परिचय प्रायः इन्हीं युद्धों के माध्यम से कराया जाता है। किंतु मेरे लिए पानीपत का अर्थ केवल युद्धों का मैदान नहीं है। यह एक जीवंत सभ्यता, बहुआयामी संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और साझी विरासत की वह धरती है जिसने सहस्राब्दियों से भारत के इतिहास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पानीपत के इतिहास के प्रति मेरी रुचि का आरंभ मेरे छात्र जीवन में हुआ, परंतु इस रुचि को दिशा और गहराई प्रदान करने का श्रेय मेरे पूज्य पिता मास्टर सीताराम जी सैनी को जाता है। उन्होंने सन् 1928 से 1948 तक जैन हाई स्कूल, पानीपत में अध्यापक के रूप में कार्य किया। इतिहास उनके प्रिय विषयों में था। बचपन में जब मैं उनके साथ बैठता, तो वे केवल घटनाएँ नहीं सुनाते थे, बल्कि उन घटनाओं के पीछे छिपे समाज, संस्कृति और मानवीय अनुभवों की भी चर्चा करते थे। वे अक्सर कहा करते थे कि पानीपत का इतिहास केवल तीन युद्धों का इतिहास नहीं है। यह वह भूमि है जिसने महाभा...

उजबेकिस्तान से दोस्ती के नाम-राम मोहन राय

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  समर्पण       उन सभी उज़्बेक मित्रों, शिक्षकों और शुभचिंतकों को, जिन्होंने सन् 1980-81 में अपने स्नेह, आत्मीयता और सहयोग से मुझे यह अनुभव कराया कि मित्रता की कोई सीमा नहीं होती, न भाषा की, न भूगोल की। विशेष रूप से मेरी आदरणीय शिक्षिका रईसा करिमोवना को, जिनके स्नेहिल मार्गदर्शन, प्रेरणा और अपनत्व ने मेरे उज़्बेकिस्तान प्रवास को जीवन की अविस्मरणीय धरोहर बना दिया। उनकी स्मृति और सम्मान में यह पुस्तक "उज़्बेकिस्तान से दोस्ती के नाम" सादर समर्पित। प्राक्कथन समय का अपना एक अद्भुत स्वभाव होता है। वह बीत तो जाता है, परंतु अपने पीछे स्मृतियों के ऐसे पदचिह्न छोड़ जाता है जो वर्षों बाद भी मन की धरती पर वैसे ही ताज़ा बने रहते हैं। मेरे जीवन की ऐसी ही एक अमूल्य स्मृति है—सन् 1980-81 में सोवियत उज़्बेकिस्तान में बिताए गए वे आठ महीने, जिन्होंने मेरे दृष्टिकोण, अनुभवों और जीवन-बोध को नई दिशा दी। आज उस यात्रा को लगभग छियालीस वर्ष बीत चुके हैं। जीवन अपनी गति से आगे बढ़ता रहा। शिक्षा, व्यवसाय, परिवार और सामाजिक दायित्वों के बीच उज़्बेकिस्तान की स्मृतियाँ कहीं मन के एक शा...