"इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता: हिंसा की बजाय संवाद की राह चुनने का स्वागत" "We Welcome the US-Iran Peace Talks in Islamabad and Prays for Its Success"
"इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता: हिंसा की बजाय संवाद की राह चुनने का स्वागत" इस्लामाबाद में आज अमेरिका और ईरान के बीच हो रही शांति वार्ता का हम सभी शांति कर्मी पूरे मन से स्वागत करते है। हम इस ऐतिहासिक प्रयास की सफलता की हार्दिक कामना करते हैं। जब दुनिया युद्ध की आग में जल रही थी, तब पाकिस्तान की भूमि पर ये बातचीत की उम्मीद की किरण जग रही है। यह वार्ता न सिर्फ दो देशों के बीच, बल्कि पूरे मध्य पूर्व और विश्व शांति के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकती है। हमारी पूज्य निर्मला देशपांडे जी हमेशा कहा करती थीं — “गोली नहीं- बोली चाहिए, युद्ध नहीं- बुद्ध चाहिए, जंग नहीं- अमन चाहिए”। आज इन शब्दों की प्रासंगिकता और भी गहरी लग रही है। गोली की जगह बोली, युद्ध की जगह बुद्धिमत्ता और जंग की जगह अमन — यही वह रास्ता है जो मानवता को बचाता है। हिंसा कभी कोई समस्या हल नहीं करती, वह तो सिर्फ और समस्याएं पैदा करती है। संवाद ही एकमात्र रास्ता है जो सम्मान के साथ मतभेदों को सुलझा सकता है। इस युद्ध में जो अनगिनत निरपराध लोग मारे गए, उनमें सबसे ज्यादा दर्द स्कूली बच्चों, मासूम महिला...