Posts

Memories of the Netherlands: A Journey of Celebration, Culture, and Humanity

Image
Memories of the Netherlands: A Journey of Celebration, Culture, and Humanity My memories of the Netherlands remain deeply cherished—pleasant, vibrant, and profoundly touching. Even today, they echo like a gentle melody in my heart. I was fortunate to experience the joyous occasion of King’s Day, the national festival of the Netherlands, and to witness its spirit from close quarters. The day was a spectacular celebration of color, unity, and collective happiness. Everywhere, there was a sea of orange —the color of national pride. People of all ages—young and old, men and women—were dressed in shades of orange, creating an atmosphere of shared enthusiasm and belonging. To be a part of this tradition, I too bought an orange sweater and wore it while strolling through the lively streets, immersing myself in the festive mood. During a metro ride, I met a group of cheerful young people who were singing and celebrating with great excitement. Noticing my orange attire, they aske...

पानीपत की नारी परंपरा : श्रम, सम्मान और सशक्तिकरण की अद्भुत गाथा

Image
पानीपत की नारी परंपरा : श्रम, सम्मान और सशक्तिकरण की अद्भुत गाथा भारतवर्ष में सामान्यतः यह देखा जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं पुरुषों से अधिक परिश्रम करती हैं—वे खेती, पशुपालन और घर-परिवार की जिम्मेदारियों को समान रूप से निभाती हैं। शहरी जीवन में भी अधिकांशतः उनका दायरा घरेलू कार्यों तक सीमित माना जाता रहा है। यद्यपि उच्च एवं शासक वर्गों में कुछ महिलाओं ने अपने लिए विशेष स्थान बनाया, परंतु हर शहर की अपनी एक विशिष्ट सामाजिक संरचना और परंपरा होती है। ऐसी ही एक अद्वितीय परंपरा का गौरवशाली उदाहरण है—पानीपत। पानीपत प्राचीन काल से ही “इल्म और रूहानियत के शहर” के रूप में विख्यात रहा है। यह वह धरती है जहाँ ज्ञान, आध्यात्म और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। कहा जाता है कि विश्व के अनेक विद्वान (आलिम) यहाँ जन्मे और पले-बढ़े। इस सांस्कृतिक परिवेश का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि यहाँ महिलाओं ने केवल गृहस्थ जीवन तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने पुरुषों के समकक्ष—और कई बार उनसे आगे बढ़कर—सभी जिम्मेदारियों को निभाया। पानीपत की सामाजिक संरचना में महि...

हेमवती नंदन बहुगुणा: विचार, व्यक्तित्व और राजनीतिक द्वंद्व का एक अध्याय

Image
हेमवती नंदन बहुगुणा: विचार, व्यक्तित्व और राजनीतिक द्वंद्व का एक अध्याय भारतीय राजनीति के इतिहास में हेमवती नंदन बहुगुणा का नाम एक ऐसे नेता के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने अपने समय में समाजवादी सोच, संगठन क्षमता और जनसंपर्क के बल पर एक विशिष्ट पहचान बनाई। विद्यार्थी जीवन से ही मैं उनके व्यक्तित्व और विचारधारा से अत्यंत प्रभावित रहा। उनके भीतर समाजवाद के प्रति गहरी प्रतिबद्धता और जनहित के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण दिखाई देता था। यह वह दौर था जब इंदिरा गांधी ने देश में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए— प्रिवी पर्स की समाप्ति, बैंकों का राष्ट्रीयकरण  जन और वितरण प्रणाली को मजबूत करने जैसे कदमों ने भारत की सामाजिक-आर्थिक दिशा को नई दिशा दी। 1971 के चुनाव में “गरीबी हटाओ” के नारे के साथ मिली उनकी ऐतिहासिक विजय ने देश में एक नई आशा का संचार किया। उस समय उनके साथ कई प्रखर समाजवादी विचारक और नेता जुड़े थे, जिनमें पी.एन. हक्सर, चंद्रजीत यादव, के.आर. गणेश, नंदिनी सत्पथी और स्वयं बहुगुणा जी प्रमुख थे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में बहुगुणा जी का कार्यकाल एक नई ऊर्जा और परिवर्तन की ल...

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मर्यादा और सम्मान का महत्व

Image
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मर्यादा और सम्मान का महत्व हाल के समय में डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत के संदर्भ में दिए गए कुछ कथनों ने स्वाभाविक रूप से भारतीय जनमानस को आहत किया है। किसी भी राष्ट्राध्यक्ष द्वारा दूसरे संप्रभु देश के बारे में इस प्रकार की टिप्पणी न केवल असम्मानजनक प्रतीत होती है, बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी अनुचित मानी जाती है। भारत, जिसे हम India के नाम से जानते हैं, केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और भावनाओं का केंद्र है। हमारे शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है—“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी”, अर्थात् माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं। यह भावना हर भारतीय के हृदय में गहराई से निहित है। भारत और अमेरिका के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से सहयोग और साझेदारी पर आधारित रहे हैं। दोनों देशों ने समय-समय पर वैश्विक शांति, आर्थिक विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में साथ काम किया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सदैव भारत-अमेरिका संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में सकारात्मक पहल की है। ऐसे में किसी भी प्रकार की तीखी या...

माइंडसेट बदले-समाज बदले

Image
आजकल विवाह योग्य लड़कियां शादी से कतरा रही हैं। परिवारों में हिंसा का माहौल उन्हें दाम्पत्य जीवन में कदम रखने से डरा रहा है। रोजाना समाचार पत्रों में नित्य प्रति किसी न किसी की हत्या, मारपीट और घरेलू हिंसा की घटनाएं छाई रहती हैं। विवाहोपरांत मुकदमेबाजी से अदालतें भरी पड़ी हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे समाचारों से मन व्यथित होता है कि हमने किस प्रकार का समाज बना दिया है। एक बार कोर्ट में एक महिला जज से बतौर वकील रूबरू होने का अवसर मिला। जज महोदया ने कहा कि पहले लड़कियों में सहने की ताकत होती थी, जो अब नहीं रही। मेरा उत्तर था कि उनमें जुल्म सहने की सहनशीलता होती थी, पर अब क्योंकि वे जुल्म सहना नहीं चाहतीं, इसलिए उन पर इल्जाम लगाया जाता है। इस जवाब से जज महोदया निरुत्तर रह गईं। असल सवाल माइंडसेट बदलने का है। हिंसा और डर का माहौल: भारतीय समाज में घरेलू हिंसा एक गंभीर समस्या बनी हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराधों की कुल संख्या 4,45,256 थी, जिसमें पति या ससुराल वालों द्वारा क्रूरता (धारा 498A) के म...

श्रीमती मीरा कुमार के साथ विशेष साक्षात्कार

Image
श्रीमती मीरा कुमार के साथ विशेष साक्षात्कार स्थान: श्रीमती मीरा कुमार का निवास, दिल्ली   दिनांक: 18.04.2026  (श्री डी.पी. राय के सौजन्य से)   साक्षात्कारकर्ता: एडवोकेट राम मोहन (सामाजिक कार्यकर्ता) एवं श्रीमती कृष्णा कांता साक्षात्कारकर्ता: आदरणीया श्रीमती मीरा कुमार जी, सबसे पहले आपको और आपके परिवार को हमारा हार्दिक नमन। आज हम आपके पिता, स्वतंत्रता सेनानी, महान समाज सुधारक और पूर्व उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम जी के जीवन और योगदान पर आपसे बात करना चाहते हैं।  मीरा कुमार: स्वागत है आप दोनों का। मैं बहुत प्रसन्न हूँ कि आप बाबूजी के जीवन से जुड़े स्मृतियों और उनके योगदान को जानने आए हैं। साक्षात्कारकर्ता: आप अक्सर अपने पिता से स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान के बारे में पूछा करती थीं। उन्होंने जातिगत उत्पीड़न का शिकार होते हुए भी राष्ट्र के लिए क्यों संघर्ष किया? क्या उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि पहले छुआछूत समाप्त हो, फिर आजादी? मीरा कुमार:हाँ, मैं बचपन में अक्सर पिताजी से पूछती थी — “पिताजी, जब आपको खुद स्कूल में दृष्टि से अलग देखा जाता था, छ...

"इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता: हिंसा की बजाय संवाद की राह चुनने का स्वागत" "We Welcome the US-Iran Peace Talks in Islamabad and Prays for Its Success"

Image
"इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता: हिंसा की बजाय संवाद की राह चुनने का स्वागत" इस्लामाबाद में आज अमेरिका और ईरान के बीच हो रही शांति वार्ता का हम सभी शांति कर्मी पूरे मन से स्वागत करते है। हम इस ऐतिहासिक प्रयास की सफलता की हार्दिक कामना करते हैं। जब दुनिया युद्ध की आग में जल रही थी, तब पाकिस्तान की भूमि पर ये बातचीत की उम्मीद की किरण जग रही है। यह वार्ता न सिर्फ दो देशों के बीच, बल्कि पूरे मध्य पूर्व और विश्व शांति के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकती है। हमारी पूज्य निर्मला देशपांडे जी हमेशा कहा करती थीं — “गोली नहीं- बोली चाहिए, युद्ध नहीं- बुद्ध चाहिए, जंग नहीं- अमन चाहिए”। आज इन शब्दों की प्रासंगिकता और भी गहरी लग रही है। गोली की जगह बोली, युद्ध की जगह बुद्धिमत्ता और जंग की जगह अमन — यही वह रास्ता है जो मानवता को बचाता है। हिंसा कभी कोई समस्या हल नहीं करती, वह तो सिर्फ और समस्याएं पैदा करती है। संवाद ही एकमात्र रास्ता है जो सम्मान के साथ मतभेदों को सुलझा सकता है। इस युद्ध में जो अनगिनत निरपराध लोग मारे गए, उनमें सबसे ज्यादा दर्द स्कूली बच्चों, मासूम महिला...