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Commemoration of the 97th Birth Anniversary of Pujya Bhai Ji Dr. S.N. Subba Rao – 7th February 2026

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GANDHI GLOBAL FAMILY  CIRCULAR Subject: Commemoration of the 97th Birth Anniversary of Pujya Bhai Ji Dr. S.N. Subba Rao – 7th February 2026 Dear Members of the Gandhi Global Family,   All Units, Branches, Associates, and Dedicated Workers, With profound reverence and deep gratitude, we call upon every unit, branch, and member of the Gandhi Global Family across the country and beyond to wholeheartedly commemorate the 97th Birth Anniversary of our beloved Pujya Bhai Ji Dr. S.N. Subba Rao on Saturday, 7th February 2026. Bhai Ji, a lifelong disciple of Mahatma Gandhi’s ideals, was a towering Gandhian, freedom fighter, founder of the National Youth Project, fellow of the Gandhi Peace Foundation, and the guiding force behind the Mahatma Gandhi Sewa Ashram in Chambal Valley. Through his tireless efforts, he inspired lakhs of youth, transformed lives by rehabilitating hundreds of dacoits, promoted Shramdan, national integration, peace, non-violence, harmony, and selfl...

मानवसे महात्मा की सफर - डॉ. चत्रभुजभाई बी. राजपरा

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मानव से महात्मा का सफर आइए, जब गांधीजी को श्रद्धांजलि अर्पित करने का फिर से समय आ गया है, तो उसी के साथ स्वतंत्रता के उस काल को एक बार फिर स्मरण करें। भारत को स्वतंत्रता देने की अंग्रेज़ सरकार की ज़रा भी इच्छा नहीं थी। लेकिन अब वे इस देश को संभाल पाने में असमर्थ हो चुके थे। इसलिए “मैं मरूँ, पर तुम्हें विधवा कर दूँ” की नीति पर चलते हुए यदि अखंड भारत के टुकड़े किए गए, तो उसके लिए केवल और केवल अंग्रेज़ ही ज़िम्मेदार थे। अंग्रेज़ भली-भाँति समझते थे कि पाकिस्तान की माँग के मार्ग में यदि कोई सबसे बड़ा अवरोध है, तो वह केवल गांधीजी ही हैं। इसलिए स्वतंत्रता से पहले ही गांधीजी को मुसलमानों का और जिन्ना को हिंदू समाज का शत्रु घोषित कर दिया गया। यहाँ अंग्रेज़ों की कूटनीति सफल हो गई। जिन्ना के मन में यह दृढ़ कर दिया गया कि पाकिस्तान के बिना मुसलमान समाज का उद्धार संभव नहीं है। वहीं हिंदू समाज के मन में यह बात लगातार ठूँसी जाती रही कि मुसलमान उनका शत्रु है। भारत को आज़ादी मिली, स्वतंत्रता मिली; लेकिन इस स्वतंत्रता की बहुत बड़ी कीमत इस धरती को चुकानी पड़ी। हिंदू–मुस्लिम समाज क...

श्री खेम राज सुंदरियाल को पद्मश्री सम्मान: पानीपत के हाथकरघा उद्योग के सच्चे संरक्षक

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श्री खेम राज सुंदरियाल को पद्मश्री सम्मान: पानीपत के हाथकरघा उद्योग के सच्चे संरक्षक  हाल ही में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार 2026 की घोषणा के साथ पानीपत के निवासी श्री खेम राज सुंदरियाल का नाम शामिल किया गया है। यह सम्मान उन्हें हाथकरघा बुनाई के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान, विशेष रूप से जामदानी और टेपेस्ट्री तकनीकों को संरक्षित करने तथा हजारों बुनकरों को प्रशिक्षण देकर रोजगार सृजन के लिए प्रदान किया जा रहा है। आज गांधी ग्लोबल फैमिली (GGF) तथा अन्य सहयोगी संगठनों के सदस्यों ने उनके निवास पर पहुंचकर इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए हार्दिक बधाई दी और भविष्य की शुभकामनाएं व्यक्त कीं। श्री खेम राज जी से हमारा व्यक्तिगत संबंध लगभग 30 वर्षों का है तथा हमारी संस्था GGF से उनका निरंतर जुड़ाव रहा है। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों की पहचान है, बल्कि पानीपत के पिछले 700 वर्षों के हर उस बुनकर को समर्पित है जिनकी मेहनत ने इस शहर के हाथकरघा उद्योग को विश्व पटल पर स्थापित किया। श्री खेम राज सुंदरियाल का संक्षिप्त जीवन परिचय श्री खेम राज सुंदरियाल का जन्म ...

कुरैशियान मोहल्ला (पानीपत के मोहल्ले-3)

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कुरैशियान मोहल्ला (पानीपत के मोहल्ले-3) पानीपत शहर की ऐतिहासिक गलियों में कुरैशियान मोहल्ला एक ऐसा इलाका है जो सदियों से हिंदू-मुस्लिम सौहार्द का प्रतीक रहा है। यह मोहल्ला कायस्थान मोहल्ले से जुड़ा हुआ है और सुभाष बाजार, बड़ा बाजार तथा सराफा बाजार से होकर गुजरता है। यहां लगभग 200-250 मकान हैं, और शहर की खासियत यह रही कि हिंदू और मुस्लिम मोहल्ले साथ-साथ रहे, बिना किसी झगड़े या विवाद के। हालांकि, 1857 की क्रांति और 1947 के भारत विभाजन के दौरान कुछ उथल-पुथल हुई, जब पानीपत के मुसलमान पाकिस्तान जाना नहीं चाहते थे, क्योंकि वे इसे अपनी मातृभूमि मानते थे। 1934 में प्रकाशित पुस्तक 'दास्तान-ए-नौ' में इसका जिक्र है, लेकिन महात्मा गांधी की हत्या के बाद अधिकांश मुसलमान पानीपत छोड़ गए। अब इस मोहल्ले में कोई मुसलमान नहीं बचा है, और ज्यादातर पंजाबी तथा कुछ सुनार बसे हुए हैं। आपका इस मोहल्ले से गहरा जुड़ाव रहा है, जहां मेरे दोस्त शम्मी, पंकज और रजनीश रहते थे, और आर्य प्राइमरी स्कूल में साथ पढ़ाई की यादें हैं। गली के अंत में अब एक मंदिर है, और यह पापड़-बड़ियों या चूड़ियों वाली दुकान ...

पानीपत के मुहल्ले-2पानीपत का प्राचीन मोहल्ला: घेर अराइयाँ की ऐतिहासिक यात्रा

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पानीपत के मुहल्ले-2 पानीपत का प्राचीन मोहल्ला: घेर अराइयाँ की ऐतिहासिक यात्रा पानीपत, हरियाणा का एक ऐतिहासिक शहर, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध समुदायों के लिए जाना जाता है। यहां के मोहल्लों में से एक प्रमुख और प्राचीन मोहल्ला है 'घेर अराइयाँ', जो अराइ समुदाय की गौरवपूर्ण कहानी को समेटे हुए है। यह मोहल्ला न केवल स्थानीय इतिहास का हिस्सा है, बल्कि भारत-पाकिस्तान विभाजन की दर्दनाक स्मृतियों और सामाजिक परिवर्तनों का जीवंत गवाह भी है। इस लेख में हम घेर आरियन की उत्पत्ति, समुदाय की विशेषताओं, विभाजन के प्रभाव और वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा करेंगे। अराइ समुदाय की उत्पत्ति और विशेषताएं: अराइ समुदाय मुख्य रूप से पंजाब क्षेत्र के मूल निवासी हैं, जो कृषि और मेहनती जीवनशैली के लिए प्रसिद्ध हैं। ऐतिहासिक रूप से, इस समुदाय की जड़ें स्थानीय कृषक वर्ग में हैं, हालांकि कुछ कथाएं इनकी उत्पत्ति अरब मूल से जोड़ती हैं। लेकिन ऐतिहासिक और वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार, यह दावा अधिकतर सांस्कृतिक गौरव से जुड़ा हुआ है, जबकि वास्तविकता स्थानीय पंजाबी जड़ों की ओर इशारा करती है।...

पानीपत के मोहल्ले-1 (Kayasthan street)

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पानीपत के मोहल्ले-1. ( कुचा कायस्थान) पानीपत का पुराना शहर अपने आप में एक जीवंत इतिहास है, जहाँ गलियाँ और मोहल्ले सदियों की कहानियाँ समेटे हुए हैं। पानीपत शहर चार राजस्व सर्कलों में विभाजित है—तरफ़ अंसार, तरफ़ राजपूतान, तरफ़ अफ़ग़ानान और तरफ़ मख़दूम जदगान। आज हम तरफ़ अंसार के कुचा कायस्थान में घूमने निकले हैं। यह कुचा मोहल्ले के मकान नंबर 37, वार्ड संख्या 2 में स्थित है, जहाँ मेरा जन्म हुआ था। यह छोटा-सा इलाका उत्तर में मोहल्ला घेर अराइयाँ से घिरा हुआ है, पूर्व में घाटी बार (परम हंस कुटिया के सामने), दक्षिण में बुलबुल बाज़ार और चारखी से सटा हुआ है, तथा पश्चिम में चरखी से देवी मन्दिर सलार गंज रोड पर हिंदू सत्संग मंदिर (इमामबाड़ा) के सामने वाली गली तक फैला हुआ है। पुराने ज़माने से इस कुचे में मुख्य रूप से कायस्थों, ब्राह्मणों और बनियों के मकान रहे हैं, लेकिन अब यहाँ की आबादी मिश्रित हो गई है—विभिन्न समुदायों के लोग यहाँ रहते हैं। यह कुचा दो हिस्सों में बँटा हुआ है: निचला हिस्सा जिसे 'तलहाई' कहा जाता है और ऊपरी हिस्सा 'उपराही'। तलहाई में ही विश्व प्रसिद्ध वैज्ञ...

गोवा की समुद्री यात्रा: डॉल्फिन्स के साथ एक रोमांचक भेंट और पर्यावरण की चिंता /08.01.2026

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गोवा की समुद्री यात्रा: डॉल्फिन्स के साथ एक रोमांचक भेंट और पर्यावरण की चिंता गोवा, भारत का वह स्वर्गीय प्रदेश जहां नीला समुद्र, सुनहरी रेत और हरी-भरी पहाड़ियां मिलकर एक जादुई दुनिया रचती हैं। आजकल हम अपने परिवार के साथ गोवा की यात्रा पर हैं, और उसमें से एक अनुभव ऐसा था जो मेरे मन में हमेशा के लिए बस गया। हम कैंडोलिम बीच पर थे, जहां अरब सागर की लहरें हमें बुला रही थीं। हमने फैसला किया कि समुद्र में गहराई तक जाकर डॉल्फिन्स को देखेंगे। यह यात्रा वृतांत उसी रोमांचक सफर का बयान है, जो खुशी और चिंता दोनों से भरा था। दोपहर का समय था, सूरज की किरणें समुद्र पर चमक रही थीं। हमने एक फेरी किराए पर ली और समुद्र की ओर रवाना हो गए। फेरी का नाम 'कैंडलम' था, जो कैंडोलिम के नाम से प्रेरित लगता 77a7bbbथा। जैसे-जैसे हम तट से दूर जाते, हवा में नमकीन खुशबू और लहरों की सनसनाहट बढ़ती जाती। चारों ओर नीला पानी, और दूर-दूर तक कोई सीमा नहीं। हम उत्साह से भरे थे, कैमरे तैयार, आंखें डॉल्फिन्स की तलाश में। गोवा में डॉल्फिन वॉचिंग एक लोकप्रिय पर्यटन गतिविधि है, और उस दिन समुद्र में ...