●भारत-ईरान: पुरानी दोस्ती, आज की चुनौतियाँ -nityanootan.blogspot.com/03.03.2026
●भारत-ईरान: पुरानी दोस्ती, आज की चुनौतियाँ भारत और ईरान का रिश्ता सिर्फ पड़ोसियों का नहीं—यह हजारों साल पुरानी जड़ों का है। आर्यन संस्कृति, फारसी-संस्कृत भाषा, अग्नि पूजा, नवरोज़-बसंत, शतरंज-चतुरंग—सबमें एक-दूसरे की छाप। इतिहास में अचेमेनिड साम्राज्य ने सिंध तक पहुंचा, मुग़लों ने फारसी को दरबार की भाषा बनाया, और आजादी के बाद भी ईरान ने हमें तेल, चाबहार पोर्ट और क्षेत्रीय संतुलन दिया। ●लेकिन आज जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले किए हैं, तो भारत की भूमिका क्या होनी चाहिए? नैतिकता कहती है—जिस पर जुल्म हो रहा है, उसके साथ खड़े हो। गुटनिरपेक्षता का मतलब चुप्पी नहीं—सही के साथ बोलना है। ईरान ने हमेशा भारत को दोस्त माना; अब हमारी बारी है। ●फिर भी हकीकत कड़वी है। मोदी सरकार ने हमलों की निंदा नहीं की—बस "चिंता" जताई, "संयम" कहा। क्यों? क्योंकि 90 लाख भारतीय मध्य- पूर्व में काम करते हैं—उनकी जान पहले। तेल कीमतें उछल रही हैं, चाबहार पोर्ट पर काम रुक सकता है। इसराइल से डिफेंस और टेक, अमेरिका से ट्रेड—सब दांव पर। ●तो क्या करें? चुप रहना "स्मार्ट" ...