कमजोर वर्गों की सुरक्षा: एक गंभीर प्रश्न. Nityanootan.blogspot.com/23.02.2026
कमजोर वर्गों की सुरक्षा: एक गंभीर प्रश्न 1982-83 के आसपास, मैंने प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी अरुणा आसफ अली से दिल्ली में उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान मैंने उनसे अनुरोध किया कि वह पानीपत आएं, जहां हम एक बड़ी सभा का आयोजन करना चाहते थे। अरुणा जी मुस्कुराईं और बातचीत आगे बढ़ी। लेकिन 1984 में पानीपत में फरवरी के महीने में भयंकर सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हुआ। इसके परिणामस्वरूप, अनेक सिख भाइयों पर हमले हुए, गुरुद्वारों को जलाया गया, उनकी संपत्तियों को लूट लिया गया और कई लोग घायल हुए। जब अरुणा जी को इन घटनाओं का पता चला, तो वह पानीपत आईं। मेरा कार्य था उन्हें रिसीव करना और उन तमाम घटनास्थलों पर ले जाना। दुर्भाग्यवश, उनके एक्सीडेंट के कारण उनकी एक टांग में फ्रैक्चर था। बड़ी मुश्किल से वह गाड़ी से उतरीं। मैंने उनका हाथ अपने हाथ में लिया और उन्हें ले जाने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने मुझसे एक सवाल किया, "तुम तो कहते थे कि तुम्हारे पास बहुत आदमी हैं, पर वह आदमी कहां थे जब इन अल्पसंख्यक सिखों पर हमले हो रहे थे?" यह प्रश्न मेरे लिए चुनौती बन गया, और उसके ब...