श्री दीपचंद निर्मोही: मेरे जीवन के पथप्रदर्शक, अभिभावक और वैचारिक पिता- राम मोहन राय/
श्री दीपचंद निर्मोही: मेरे जीवन के पथप्रदर्शक, अभिभावक और वैचारिक पिता कुछ रिश्ते रक्त से नहीं, विचारों से बनते हैं; कुछ लोग जीवन में केवल साथ चलने के लिए नहीं, बल्कि जीवन की दिशा तय करने के लिए आते हैं। श्री दीपचंद निर्मोही मेरे जीवन में ऐसे ही व्यक्तित्व रहे हैं। आज जब अमेरिका प्रवास के दौरान उनके निधन का समाचार मिला, तो मन गहरे शोक और अविश्वास से भर गया। हजारों मील दूर बैठकर अपने उस अभिभावक को अंतिम विदाई देने में असमर्थ हूँ, जिसने जीवन के हर छोटे-बड़े मोड़ पर मेरा मार्गदर्शन किया। मेरे लिए वे केवल एक शिक्षक नहीं थे, बल्कि बड़े भाई, मित्र, संरक्षक और वैचारिक पिता थे। पहली मुलाकात से आजीवन आत्मीयता तक वर्ष 1973 में जब मैंने आर्य स्कूल में आठवीं कक्षा में प्रवेश लिया, तब पहली बार श्री दीपचंद निर्मोही जी से मिलने का अवसर मिला। खादी की सफेद धोती-कुर्ता पहने, सौम्य मुखमुद्रा और सरल, सहज बातचीत वाले उनके व्यक्तित्व ने पहली ही मुलाकात में मुझे प्रभावित किया। स्कूल की प्रार्थना सभा में वे जब अपने विचार प्रस्तुत करते, तो उनकी बातों में ज्ञान के साथ जीवन का अनुभव, सामा...