चर्चिल लेन से उठता गांधी का संदेश: क्या हम भी बन सकते हैं "वन मैन आर्मी"?— राम मोहन राय /05.08.2026
चर्चिल लेन से उठता गांधी का संदेश: क्या हम भी बन सकते हैं "वन मैन आर्मी"? — राम मोहन राय एम्स्टर्डम (नीदरलैंड) की चर्चिल लेन पर स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए मन अनेक भावों से भर उठा। मेरे साथ चर्च ऑफ़ साइंटोलॉजी के श्री गर्ब्रांड डेनियम, सुश्री पैट्रिशिया हैमन, युवा गांधी कार्यकर्ता रॉबर्ट तथा मेरी धर्मपत्नी श्रीमती कृष्णा कांता राय भी उपस्थित थीं। यह केवल श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इतिहास, वर्तमान और भविष्य के बीच एक गहन संवाद का अवसर था। सबसे अधिक आश्चर्य मुझे इस बात का हुआ कि गांधीजी की प्रतिमा जिस स्थान पर स्थापित है, उसका नाम चर्चिल लेन है। इतिहास के विद्यार्थी जानते हैं कि ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल महात्मा गांधी के सबसे बड़े आलोचकों में थे। उन्होंने गांधीजी को कभी सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा और उन्हें अपमानजनक शब्दों में "अधनंगा फ़कीर" कहा। गोलमेज सम्मेलन के समय भी गांधीजी की सादगीपूर्ण भारतीय वेशभूषा उन्हें स्वीकार्य नहीं थी। लेकिन इतिहास की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि वह सत्ता नहीं,...