निरंकारी विवाह पद्धति- हमारा प्रत्यक्ष अनुभव
अपने पारिवारिक निरंकारी मित्र की पुत्री के विवाह समारोह में मुझे निरंकारी पद्धति से संपन्न होने वाले इस पवित्र संस्कार को निकट से समझने और अनुभव करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह समारोह इतना सरल, सहज और आध्यात्मिक रूप से प्रेरणादायक था कि मन को गहन शांति और आनंद की अनुभूति हुई। समस्त अनुष्ठान मात्र १५ से २० मिनट में पूर्ण हो गए, जिसमें कोई अनावश्यक औपचारिकताएं या दिखावा नहीं था, बल्कि हर क्षण निरंकार की भक्ति और परस्पर सम्मान की भावना से ओतप्रोत था। वर और वधू ने सर्वप्रथम एक-दूसरे को जयमाला अर्पित की। इस दौरान उन्होंने "धन निरंकार" का उच्चारण करते हुए एक-दूसरे को साष्टांग प्रणाम किया और चरण स्पर्श कर अभिवादन किया। यह दृश्य इतना पवित्र और भावपूर्ण था, मानो दोनों आत्माएं निरंकार के समक्ष अपनी निष्ठा और समर्पण व्यक्त कर रही हों। तत्पश्चात, स्थानीय संयोजक दंपति ने उन्हें संयुक्त रूप से पुष्पमाला पहनाई, जो उनके जीवनसाथी बनने की प्रतीक थी – एक ऐसा बंधन जो न केवल शारीरिक, अपितु आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है। फिर, अवतार वाणी के चार चुने हुए पदों का पाठ हुआ, जो गृहस्थ जीवन को...