बाबू मूल चंद जैन की विरासत का पुनर्पाठ
कल मैंने पानीपत में बाबू मूलचंद जैन जी की सुपुत्री डॉ. स्वतंत्र जैन के आवास पर एक सौहार्दपूर्ण भेंट की। यह मुलाकात मात्र एक साधारण शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि पिछले पचास वर्षों के जीवन की उन अनमोल यादों का एक जीवंत चलचित्र थी, जो बाबू जी की महान विरासत से जुड़ी हुई हैं। बाबू मूलचंद जैन, जिन्हें स्नेह से 'बाबू जी' कहा जाता था, हरियाणा के गांधी के नाम से विख्यात थे। वे स्वतंत्रता संग्राम के एक निष्ठावान सैनिक, वरिष्ठ अधिवक्ता, पूर्व सांसद, विधायक, मंत्री तथा योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे। परंतु इन सभी पदों और सम्मानों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण था उनका जीवन, जो महात्मा गांधी के आदर्शों—सत्य, अहिंसा, त्याग और सेवा—पर अटल रूप से अडिग रहा। मैंने डॉ स्वतन्त्र जैन को महात्मा गांधी की 1946 की नोआखाली यात्रा का एक चित्र भेंट किया, जो उस दौर की पीड़ा और गांधी जी की अहिंसा की अटूट शक्ति का प्रतीक है। बाबू जी ने भी अपने जीवन में इसी अहिंसा और सत्य की राह को अपनाया। वे राजनीति की ऊँचाइयों पर पहुँचे, परंतु कभी भी अपनी गांधीवादी विरासत से समझौता नहीं किया। खादी, अस्पृश्यता निवारण...