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Patricia Haveman – A Compassionate Ambassador of Gandhian Values

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पैट्रीशिया हेवेमैन : गांधी विचारों की वैश्विक साधिका और मानवता की सच्ची सेविका दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में प्रकाश भरने के लिए जन्म लेते हैं। पैट्रीशिया हेवेमैन उन्हीं विरले व्यक्तित्वों में से एक हैं। वे उन लोगों की प्रतिनिधि हैं जिनके लिए मानवता की कोई सीमा, कोई भाषा और कोई राष्ट्र नहीं होता। उनका सम्पूर्ण जीवन करुणा, सेवा, मैत्री और मानवीय गरिमा को समर्पित है। मुण्डो यौनिडो फाउंडेशन की संस्थापक के रूप में पैट्रीशिया ने 62 देशों की यात्राएँ कीं। इन यात्राओं ने उन्हें यह सिखाया कि संसार की सबसे बड़ी आवश्यकता प्रेम, करुणा और परस्पर सहयोग है। यही अनुभूति उनके जीवन का संकल्प बन गई। उन्होंने यूरोप, दक्षिण अफ्रीका, भारत, तिब्बत, पाकिस्तान तथा अनेक देशों में वंचित बच्चों, महिलाओं और असहाय समुदायों के बीच कार्य करते हुए हजारों लोगों के जीवन में आशा का दीप जलाया। लगभग 40 देशों में उनके प्रयासों ने युवाओं और सामाजिक संगठनों को मानवता की सेवा के लिए प्रेरित किया है। नीदरलैंड में महात्मा गांधी और को समर्पित एक कार्यक्रम में उनसे हमार...

To Gerbrig Deinum – A Friend Beyond Borders

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To Gerbrig Deinum – A Friend Beyond Borders There are moments in life that become memories, and there are people who become part of our journey forever. When I travelled to the Netherlands, I expected to discover a beautiful country. What I did not expect was to discover a beautiful friendship. Meeting you has become one of the most treasured memories of my visit. Our first meeting on 8 July 2026 at the Sant Nirankari Mission gathering in Amsterdam seemed like a simple coincidence. Yet, looking back today, I feel it was destined. Your gentle smile, humble nature and gracious words immediately created a feeling of warmth and trust. When you later welcomed us to the Church of Scientology, you did much more than introduce us to an organization. You introduced us to your values—respect, compassion, openness and service to humanity. Before meeting you, I knew very little about Scientology. Through you, I came to understand that every sincere effort to uplift humanity deserv...

बर्लिन की दीवार: विभाजन से एकता तक—मेरी 39 वर्षों की यात्रा का पूर्ण चक्र /27.07.2026

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बर्लिन की दीवार: विभाजन से एकता तक—मेरी 39 वर्षों की यात्रा का पूर्ण चक्र — राम मोहन राय राइखस्टाग (जर्मन संसद भवन) का शांत और गरिमामय वातावरण अपने हृदय में संजोकर हम पुनः मेट्रो से आगे बढ़े। हमारा अगला पड़ाव था— पूर्वी बर्लिन (East Berlin) का वह ऐतिहासिक क्षेत्र, जहाँ कभी जर्मन लोकतांत्रिक गणराज्य (GDR) की राजधानी धड़कती थी। जैसे ही हम स्टेशन पर उतरे, ऐसा लगा मानो समय अचानक पीछे लौट गया हो। स्मृतियों के द्वार खुल गए और वर्ष 1987 की मेरी पहली बर्लिन यात्रा चलचित्र की भाँति आँखों के सामने घूमने लगी। स्टेशन से कुछ दूर चलते ही हम उस स्थान पर पहुँचे जहाँ कभी बर्लिन की दीवार खड़ी थी—वह दीवार जिसने केवल एक शहर को नहीं, बल्कि लाखों दिलों को बाँट दिया था। यह ईंट-पत्थरों की साधारण दीवार नहीं थी; यह अविश्वास, भय, वैमनस्य और वैचारिक संघर्ष का प्रतीक थी। इसने एक ही संस्कृति, एक ही भाषा और एक ही परिवार के लोगों को दो हिस्सों में बाँट दिया था। कितने ही परिवार ऐसे थे जिनके माता-पिता एक ओर रह गए और बच्चे दूसरी ओर। भाई इधर था तो बहन उधर। कोई रिश्तेदार मिलने गय...

राइखस्टाग की सीढ़ियों पर खड़े होकर इतिहास से संवाद /26.07.2026

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राइखस्टाग की सीढ़ियों पर खड़े होकर इतिहास से संवाद — राम मोहन राय बर्लिन के ऐतिहासिक अलेक्ज़ांडरप्लात्स से हमने मेट्रो पकड़ी और कुछ ही समय बाद जर्मनी के लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण प्रतीकों में से एक— राइखस्टाग (Reichstag) अर्थात जर्मन संसद भवन—के सामने खड़े थे। इतिहास से मेरा विशेष लगाव रहा है, इसलिए इस भवन को देखने की उत्सुकता मन में पहले से ही थी। जैसे ही संसद भवन की पहली झलक सामने आई, उसकी भव्यता ने मन को अभिभूत कर दिया। विशाल पत्थरों से निर्मित यह ऐतिहासिक इमारत अपनी गरिमा, सौंदर्य और गंभीरता के कारण दूर से ही आकर्षित करती है। चौड़ी-चौड़ी सीढ़ियाँ, ऊँचे स्तंभ, विशाल प्रवेश द्वार और उसके ऊपर लहराते जर्मनी के राष्ट्रीय ध्वज इस भवन की लोकतांत्रिक गरिमा का परिचय देते हैं। ऐसा लगा मानो यह भवन केवल ईंट और पत्थरों से नहीं, बल्कि जर्मनी के संघर्ष, पीड़ा, पुनर्निर्माण और लोकतांत्रिक चेतना की कहानी से निर्मित हुआ हो। इन सीढ़ियों को देखकर मन अनायास ही इतिहास के पन्नों में चला गया। कल्पना करने लगा कि इसी धरती पर कभी नाज़ीवाद का उदय हुआ होगा। इन्हीं रा...

अलेक्ज़ांडरप्लात्स (Alexanderplatz): समय, इतिहास और आधुनिक बर्लिन का जीवंत संगम /27.07.2027

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अलेक्ज़ांडरप्लात्स (Alexanderplatz): समय, इतिहास और आधुनिक बर्लिन का जीवंत संगम जर्मनी की यात्रा का अगला पड़ाव हमें बर्लिन के विश्वप्रसिद्ध अलेक्ज़ांडरप्लात्स (Alexanderplatz) ले आया। यह केवल एक चौक नहीं, बल्कि बर्लिन का धड़कता हुआ हृदय है। इतिहास, आधुनिकता, संस्कृति, विज्ञान और पर्यटन—इन सभी का अद्भुत संगम इस स्थान पर देखने को मिलता है। जैसे ही हम इस विशाल खुले चौक में पहुँचे, चारों ओर फैली चहल-पहल, आधुनिक इमारतें, ट्राम की मधुर आवाज़, भूमिगत मेट्रो स्टेशन की निरंतर गतिविधियाँ और दुनिया के कोने-कोने से आए पर्यटकों का उत्साह देखकर मन आनंद से भर उठा। चौक के मध्य में स्थित यूरानिया विश्व घड़ी (Urania Weltzeituhr) सबसे पहले मेरा ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। सन् 1969 में स्थापित यह विश्व घड़ी आज भी बर्लिन की सबसे लोकप्रिय पहचान मानी जाती है। इस पर विश्व के अनेक देशों और प्रमुख नगरों का स्थानीय समय एक साथ प्रदर्शित होता है। भारत की राजधानी नई दिल्ली का नाम भी इस घड़ी पर अंकित देखकर मन गर्व से भर गया। इसके ऊपरी भाग में पृथ्वी और ग्रहों की गति को दर्शाता धातु का कलात्मक ढाँचा...

Gandhi Global Family and Church of Scientology Pay Floral Tribute to Mahatma Gandhi in Amsterdam, Call for Global Peace and Human Rights

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एम्स्टर्डैम में गूंजा गांधी का संदेश: चर्चिललान पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि, भारत–नीदरलैंड ने मिलकर दिया विश्व शांति का आह्वान जब विश्व के अनेक भाग युद्ध, हिंसा, आतंकवाद, नस्लीय तनाव और बढ़ती असहिष्णुता से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डैम से महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा का संदेश पूरी दुनिया के लिए आशा की नई किरण बनकर उभरा। गांधी ग्लोबल फैमिली एवं चर्च ऑफ़ साइंटोलॉजी, नीदरलैंड के संयुक्त तत्वावधान में एम्स्टर्डैम के ऐतिहासिक चर्चिललान (Churchilllaan) स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। समारोह में गांधी ग्लोबल फैमिली के महासचिव श्री राम मोहन राय, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कृष्णकांता राय, चर्च ऑफ़ साइंटोलॉजी की प्रतिनिधि Gerbrig Denium, वरिष्ठ गांधीवादी एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता Patricia Haveman, युवा गांधीवादी एवं United for Human Rights के एम्बेसडर Robert Kruijt सहित अनेक भारतीय एवं डच नागरिक उपस्थित रहे। अपने संबोधन में श्री राम मोहन राय ने कहा कि महात्मा गांधी केवल भारत के राष्...

चर्चिल लेन से उठता गांधी का संदेश: क्या हम भी बन सकते हैं "वन मैन आर्मी"?— राम मोहन राय /05.08.2026

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चर्चिल लेन से उठता गांधी का संदेश: क्या हम भी बन सकते हैं "वन मैन आर्मी"? — राम मोहन राय एम्स्टर्डम (नीदरलैंड) की चर्चिल लेन पर स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए मन अनेक भावों से भर उठा। मेरे साथ चर्च ऑफ़ साइंटोलॉजी के श्री गर्ब्रांड डेनियम, सुश्री पैट्रिशिया हैमन, युवा गांधी कार्यकर्ता रॉबर्ट तथा मेरी धर्मपत्नी श्रीमती कृष्णा कांता राय भी उपस्थित थीं। यह केवल श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इतिहास, वर्तमान और भविष्य के बीच एक गहन संवाद का अवसर था। सबसे अधिक आश्चर्य मुझे इस बात का हुआ कि गांधीजी की प्रतिमा जिस स्थान पर स्थापित है, उसका नाम चर्चिल लेन है। इतिहास के विद्यार्थी जानते हैं कि ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल महात्मा गांधी के सबसे बड़े आलोचकों में थे। उन्होंने गांधीजी को कभी सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा और उन्हें अपमानजनक शब्दों में "अधनंगा फ़कीर" कहा। गोलमेज सम्मेलन के समय भी गांधीजी की सादगीपूर्ण भारतीय वेशभूषा उन्हें स्वीकार्य नहीं थी। लेकिन इतिहास की सबसे बड़ी विशेषता ...