जंग: समस्या खुद है, समाधान शांति है - राम मोहन राय/12.03.2026
जंग: समस्या खुद है, समाधान शांति है “जंग तो खुद ही एक मसला है, यह मसलों का हल क्या होगी?” ये शायर की पंक्तियाँ हर दौर में सच्ची साबित होती रही हैं। चाहे प्राचीन काल हो, मध्य युग हो या आज का आधुनिक विश्व, युद्ध कभी भी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं बन सका। बल्कि युद्ध स्वयं सबसे बड़ा मसला बनकर खड़ा होता है। आज जब दुनिया के विभिन्न कोनों में संघर्ष जारी हैं, तो उन लड़ाइयों से हजारों किलोमीटर दूर बैठे हम भी उसकी छाया महसूस कर रहे हैं। यह छाया अब धीरे-धीरे हर घर तक पहुँच रही है। दूर के मैदानों में गोले चल रहे हैं, तो क्या हमारा क्या लेना-देना? यह सोच आज गलत साबित हो रही है। लड़ाई के मैदानों से दूर रहने वाले देशों को शायद लगता हो कि वे सुरक्षित हैं, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। विशेषकर उन देशों में जो युद्ध क्षेत्रों के पड़ोसी या ऊर्जा आपूर्ति के महत्वपूर्ण केंद्र हैं, वहाँ का असर बिना सीधे शामिल हुए भी साफ़ दिखाई दे रहा है। भारत जैसे देश में, जहाँ लाखों-करोड़ों आम नागरिक रोज़मर्रा की जिंदगी जी रहे हैं, युद्ध की लहरें अब घर-घर तक पहुँचने लगी हैं।...