युवाओं का जागरण: नए भारत की अहिंसक चेतना— राम मोहन राय
युवाओं का जागरण: नए भारत की अहिंसक चेतना — राम मोहन राय भारत का भविष्य उसके युवा हैं। जब युवा जागते हैं तो केवल सरकारें ही नहीं, बल्कि समाज भी आत्ममंथन करने के लिए विवश हो जाता है। हाल के दिनों में देश में जिस प्रकार युवाओं, विद्यार्थियों, सोशल मीडिया एक्टिविस्टों और छोटे-छोटे डिजिटल मंचों ने लोकतांत्रिक ढंग से अपनी आवाज़ बुलंद की है, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का युवा वर्ग केवल दर्शक बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी चाहता है। हर बड़े जनआंदोलन के पीछे वर्षों से संचित पीड़ा, असंतोष और परिवर्तन की आकांक्षा होती है। जब समाज में अनेक अनसुलझे प्रश्न जमा हो जाते हैं, तो एक छोटी-सी चिंगारी भी व्यापक जनचेतना का रूप ले सकती है। ऐसे समय में सबसे बड़ी आवश्यकता यह होती है कि आंदोलन का मार्ग संयम, संवाद और अहिंसा का हो। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन हमें यही शिक्षा देता है। महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से दुनिया को बताया कि नैतिक शक्ति किसी भी हिंसक शक्ति से अधिक प्रभावशाली हो सकती है। दूसरी ओर, शहीद-ए-आज़म भगत सिंह ने अन्याय ...