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नीदरलैंड की आत्मा की खोज : डेवेंटर में एक दिन— राम मोहन राय

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नीदरलैंड की आत्मा की खोज : डेवेंटर में एक दिन — राम मोहन राय किसी भी देश को केवल उसकी राजधानी या उसके महानगरों को देखकर नहीं समझा जा सकता। महानगर उस देश का चेहरा अवश्य होते हैं, किंतु उसकी आत्मा छोटे नगरों, कस्बों और गाँवों में बसती है। नीदरलैंड के संदर्भ में भी यही सत्य है। एम्स्टर्डम, रॉटरडैम और हेग जैसे नगर अपनी आधुनिकता, भव्यता और विश्वव्यापी पहचान के कारण लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, परंतु यदि इस देश की सांस्कृतिक चेतना, ऐतिहासिक गरिमा और मानवीय संवेदनशीलता को निकट से महसूस करना हो तो उसके छोटे-छोटे नगरों की यात्रा अनिवार्य है। नीदरलैंड की यह हमारी चौथी यात्रा है। मैं और मेरी धर्मपत्नी कृष्णा इस बार पहले से ही यह संकल्प लेकर आए थे कि इस यात्रा का उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं होगा। हम उन स्थानों को खोजेंगे जहाँ इतिहास बोलता है, संस्कृति साँस लेती है, साहित्य मुस्कुराता है और प्रकृति मनुष्य के साथ सामंजस्य स्थापित करती दिखाई देती है। इसी खोज ने हमें लगभग 120 किलोमीटर दूर बसे ऐतिहासिक नगर डेवेंटर पहुँचा दिया। अलमेरे से ज़्वोले और वहाँ से डेवेंटर तक की रेल यात्रा अपने आप...

महात्मा गांधी, डॉ. डब्ल्यू. ई. बी. डुबॉयस और आज की दुनिया : नई तालीम के संदर्भ में कुछ विचार

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महात्मा गांधी, डॉ. डब्ल्यू. ई. बी. डुबॉयस और आज की दुनिया : नई तालीम के संदर्भ में कुछ विचार नई तालीम के हालिया सत्र में डॉ. डब्ल्यू. ई. बी. डुबॉयस के भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर लिखे गए विचारों को सुनने का अवसर मिला। यह केवल एक अकादमिक अनुभव नहीं था, बल्कि इतिहास, दर्शन और मानव मुक्ति के प्रश्नों पर गंभीर चिंतन का अवसर भी था। डॉ. डुबॉयस केवल अफ्रीकी-अमेरिकी समाज के महान चिंतक, समाजशास्त्री और मानवाधिकार योद्धा ही नहीं थे; वे भारत, विशेषकर महात्मा गांधी के जीवन, संघर्ष और नैतिक नेतृत्व के प्रति गहरी श्रद्धा रखते थे। उन्होंने औपनिवेशिक शासन को केवल आर्थिक शोषण की व्यवस्था नहीं माना, बल्कि उसे नस्लीय वर्चस्व की वैश्विक संरचना के रूप में भी समझा। इसी कारण उनके विचार आज भी मार्क्सवादी विमर्श के साथ-साथ उपनिवेशवाद, नस्लवाद और सामाजिक न्याय के अध्ययन में अत्यंत प्रासंगिक हैं। सामान्यतः साम्यवाद की चर्चा मार्क्सवाद, लेनिनवाद और वैज्ञानिक समाजवाद के संदर्भ में होती है, किंतु यदि विश्व की असमानताओं और शोषण की व्यापक संरचना को समझना हो, तो डुबॉयस के विश्लेषण को भी समान गं...

दासता की जंजीरों से मुक्ति का उत्सव और मानव समानता का संदेश— नीदरलैंड की यात्रा से एक प्रत्यक्ष अनुभव

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दासता की जंजीरों से मुक्ति का उत्सव और मानव समानता का संदेश — नीदरलैंड की यात्रा से एक प्रत्यक्ष अनुभव आज (1 जुलाई) मुझे नीदरलैंड के एम्स्टर्डम स्थित म्यूज़ियमप्लेन (Museumplein) में आयोजित केटी कोटी (Keti Koti) के विशाल अंतरराष्ट्रीय उत्सव में सम्मिलित होने का अवसर मिला। यह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि मानव गरिमा, स्वतंत्रता, समानता और न्याय के लिए किए गए ऐतिहासिक संघर्ष की जीवंत अभिव्यक्ति थी। 'केटी कोटी' का अर्थ है—"टूटी हुई जंजीरें"। यह दिवस उन लाखों अफ्रीकी मूल के स्त्री-पुरुषों और बच्चों की स्मृति को समर्पित है जिन्हें सदियों तक गुलाम बनाकर यूरोप की उपनिवेशों में अमानवीय जीवन जीने को विवश किया गया। हजारों लोग—अश्वेत, श्वेत, एशियाई, भारतीय, सूरीनामी, कैरेबियाई और अनेक अन्य देशों के नागरिक—रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में इस उत्सव में एकत्रित हुए। पूरा वातावरण संगीत, नृत्य, संस्कृति और स्वतंत्रता के उल्लास से भरा हुआ था...

केटी कोटी (Keti Koti): दासता की जंजीरों से मुक्ति का उत्सव और मानव समानता का संदेश

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केटी कोटी (Keti Koti): दासता की जंजीरों से मुक्ति का उत्सव और मानव समानता का संदेश — नीदरलैंड की यात्रा से एक प्रत्यक्ष अनुभव आज (1 जुलाई) मुझे नीदरलैंड के एम्स्टर्डम स्थित म्यूज़ियमप्लेन (Museumplein) में आयोजित केटी कोटी (Keti Koti) के विशाल अंतरराष्ट्रीय उत्सव में सम्मिलित होने का अवसर मिला। यह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि मानव गरिमा, स्वतंत्रता, समानता और न्याय के लिए किए गए ऐतिहासिक संघर्ष की जीवंत अभिव्यक्ति थी। ' केटी कोटी ' का अर्थ है— "टूटी हुई जंजीरें" । यह दिवस उन लाखों अफ्रीकी मूल के स्त्री-पुरुषों और बच्चों की स्मृति को समर्पित है जिन्हें सदियों तक गुलाम बनाकर यूरोप की उपनिवेशों में अमानवीय जीवन जीने को विवश किया गया। हजारों लोग—अश्वेत, श्वेत, एशियाई, भारतीय, सूरीनामी, कैरेबियाई और अनेक अन्य देशों के नागरिक—रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में इस उत्सव में एकत्रित हुए। पूरा वातावरण संगीत, नृत्य, संस्कृति और स्वतंत्रता के उल्लास से भरा हुआ था। चारों ओर विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर कलाकार अपनी प्रस्तुतियाँ दे रहे थे। ...