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राष्ट्रीय युवा प्रोजेक्ट के सचिव श्री रण सिंह परमार जी का दुखद निधन: एक श्रद्धेय भाई, साथी और युवा साथी की अमिट यादें

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राष्ट्रीय युवा प्रोजेक्ट के सचिव श्री रण सिंह परमार जी का दुखद निधन: एक श्रद्धेय भाई, साथी और युवा साथी की अमिट यादें अभी-अभी एक अत्यंत दुखद खबर मिली है। राष्ट्रीय युवा प्रोजेक्ट (National Youth Project) के सचिव तथा पूज्य भाई जी डॉ. सुब्बाराव जी के अनन्य सहयोगी, युवा कार्यकर्ता और मेरे प्रिय मित्र श्री रण सिंह परमार जी का निधन हो गया है। यह सूचना सुनते ही मेरा दिल टूट गया। एक वर्ष से निरंतर संपर्क में रहने वाले, भाई जैसा स्नेह देने वाले और हर कार्य में सहयोग करने वाले इस श्रद्धेय व्यक्तित्व के जाने से एक बड़ा शून्य सा लग रहा है। श्री रण सिंह परमार जी राष्ट्रीय युवा प्रोजेक्ट के सक्रिय सचिव के रूप में युवाओं के विकास, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में निरंतर लगे रहे। भाई जी सुब्बाराव जी के सबसे विश्वसनीय सहयोगी के रूप में उन्होंने अनेक कार्यक्रमों, शिविरों और युवा उत्सवों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका कार्य हमेशा निःस्वार्थ, समर्पित और ऊर्जावान रहा। वे युवाओं को प्रेरित करने वाले, मार्गदर्शन देने वाले और हर कठिनाई में साथ खड़े रहने वाले सच्चे यो...

जंग: समस्या खुद है, समाधान शांति है - राम मोहन राय/12.03.2026

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जंग: समस्या खुद है, समाधान शांति है  “जंग तो खुद ही एक मसला है,   यह मसलों का हल क्या होगी?”   ये शायर की पंक्तियाँ हर दौर में सच्ची साबित होती रही हैं। चाहे प्राचीन काल हो, मध्य युग हो या आज का आधुनिक विश्व, युद्ध कभी भी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं बन सका। बल्कि युद्ध स्वयं सबसे बड़ा मसला बनकर खड़ा होता है। आज जब दुनिया के विभिन्न कोनों में संघर्ष जारी हैं, तो उन लड़ाइयों से हजारों किलोमीटर दूर बैठे हम भी उसकी छाया महसूस कर रहे हैं। यह छाया अब धीरे-धीरे हर घर तक पहुँच रही है। दूर के मैदानों में गोले चल रहे हैं, तो क्या हमारा क्या लेना-देना? यह सोच आज गलत साबित हो रही है। लड़ाई के मैदानों से दूर रहने वाले देशों को शायद लगता हो कि वे सुरक्षित हैं, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। विशेषकर उन देशों में जो युद्ध क्षेत्रों के पड़ोसी या ऊर्जा आपूर्ति के महत्वपूर्ण केंद्र हैं, वहाँ का असर बिना सीधे शामिल हुए भी साफ़ दिखाई दे रहा है। भारत जैसे देश में, जहाँ लाखों-करोड़ों आम नागरिक रोज़मर्रा की जिंदगी जी रहे हैं, युद्ध की लहरें अब घर-घर तक पहुँचने लगी हैं।...

मेरे माता-पिता/ 12.03.2026

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मेरे माता-पिता दोनों ही शिक्षा और समाज सेवा से जुड़े हुए थे। मेरे पिता उर्दू, अरबी और फ़ारसी के विद्वान शिक्षक थे। उन्होंने लाहौर और अलीगढ़ से अदीबे आलिम तथा फ़ाज़िल की डिग्रियाँ प्राप्त की थीं। मेरी माताजी भी अत्यंत विदुषी थीं। वे हिंदी, संस्कृत और गुरुमुखी की गहरी जानकार थीं। उन्होंने हिंदी में प्रभाकर, संस्कृत का गहन अध्ययन तथा गुरुमुखी में ज्ञानी की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इस प्रकार मेरे माता-पिता दोनों मिलकर छह भाषाओं के ज्ञाता थे। उन्होंने अपनी इन शैक्षणिक योग्यताओं और संस्कारों से हमें भी शिक्षित और संस्कारित करने का भरपूर प्रयास किया। हम अपने आप को अत्यंत धन्य और सौभाग्यशाली मानते हैं कि हमें ऐसे विद्वान, संस्कारी और प्रेरणादायी माता-पिता मिले। Ram Mohan Rai.  12.03.2026 #panipatnews #myfamily

बाबू मूल चंद जैन की विरासत का पुनर्पाठ

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मेरे माता-पिता दोनों ही शिक्षा और समाज सेवा से जुड़े हुए थे। मेरे पिता उर्दू, अरबी और फ़ारसी के विद्वान शिक्षक थे। उन्होंने लाहौर और अलीगढ़ से अदीबे आलिम तथा फ़ाज़िल की डिग्रियाँ प्राप्त की थीं। मेरी माताजी भी अत्यंत विदुषी थीं। वे हिंदी, संस्कृत और गुरुमुखी की गहरी जानकार थीं। उन्होंने हिंदी में प्रभाकर, संस्कृत का गहन अध्ययन तथा गुरुमुखी में ज्ञानी की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इस प्रकार मेरे माता-पिता दोनों मिलकर छह भाषाओं के ज्ञाता थे। उन्होंने अपनी इन शैक्षणिक योग्यताओं और संस्कारों से हमें भी शिक्षित और संस्कारित करने का भरपूर प्रयास किया। हम अपने आप को अत्यंत धन्य और सौभाग्यशाली मानते हैं कि हमें ऐसे विद्वान, संस्कारी और प्रेरणादायी माता-पिता मिले। Ram Mohan Rai.  12.03.2026 #panipatnews #myfamily

Letter of Sympathy to Iranian Embassy on Hon'ble Ayatollah Imam Sayyid Ali Khamenei's Demise, by the Gandhi Global Family.

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Your Excellency Mohammad Fathali,   Ambassador Extraordinary and Plenipotentiary of the Islamic Republic of Iran to India, On behalf of the Gandhi Global Family, an international forum dedicated to promoting peace, non-violence, humanism, and the timeless principles of Mahatma Gandhi, I extend our heartfelt and profound condolences to you, the Government and people of the Islamic Republic of Iran, and all those who revered the late  Ayatollah Imam Sayyid Ali Khamenei We join the Iranian nation in mourning the loss of a visionary leader whose life and legacy profoundly shaped the course of history.    Ayatollah Khamenei stood as a symbol of courage, resilience, and unwavering commitment to justice, self-determination, and the dignity of his people. His leadership during a transformative era inspired millions worldwide in their pursuit of sovereignty and moral integrity. Though our paths draw from the eternal teachings of non-violence and truth as embo...

शांति की वो कामना, जो युद्ध की आग में जल रही है -nityanootan.blogspot.com/05.03.2026

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शांति की वो कामना, जो युद्ध की आग में जल रही है  आज दुनिया दो तरफ़ खड़ी है—एक तरफ़ अमेरिका-इज़राइल की मिसाइलें, दूसरी तरफ़ ईरान की जवाबी गूँज। स्कूलों पर हमले, जलपोतों का विनाश, बच्चे मलबे में, माँएँ रोती हुईं। और बीच में वो पुराना बहाना—"Everything is fair in love and war"।   पर सच ये है—युद्ध में कुछ भी "fair" नहीं होता। स्कूल पर हमला युद्ध अपराध है। बच्चे मरते हैं, तो इंसानियत मर जाती है। ईरान कमज़ोर हुआ है, पर सरेंडर नहीं करेगा। अमेरिका की बातें प्रोपगैंडा हैं—कुछ दिन में खत्म हो जाएगा, ये सिर्फ़ घरेलू समर्थन के लिए।   फिर भी, एक आवाज़ है जो चुप नहीं—भारत की। वो कहती है: अहिंसा, प्रेम, सहयोग। हम चाहते हैं कि सूरज सबको रोशनी दे, चाँदनी सबको सुकून, हवा सबको ठंडक, पानी सबको मिठास—बिना किसी की लाश पर।   ये कामना आसान नहीं। सत्ता, तेल, हथियार—ये सब अभी भी मज़बूत हैं। लेकिन इतिहास गवाह है—युद्ध रुके हैं। यूरोप में, अफ्रीका में। तो क्यों नहीं पूरी दुनिया में?   अगर हम सब मिलकर कहें—"हम युद्ध नहीं चाहते"—तो कोई सरकार इसे अनदेखा नहीं क...

●भारत-ईरान: पुरानी दोस्ती, आज की चुनौतियाँ -nityanootan.blogspot.com/03.03.2026

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●भारत-ईरान: पुरानी दोस्ती, आज की चुनौतियाँ भारत और ईरान का रिश्ता सिर्फ पड़ोसियों का नहीं—यह हजारों साल पुरानी जड़ों का है। आर्यन संस्कृति, फारसी-संस्कृत भाषा, अग्नि पूजा, नवरोज़-बसंत, शतरंज-चतुरंग—सबमें एक-दूसरे की छाप। इतिहास में अचेमेनिड साम्राज्य ने सिंध तक पहुंचा, मुग़लों ने फारसी को दरबार की भाषा बनाया, और आजादी के बाद भी ईरान ने हमें तेल, चाबहार पोर्ट और क्षेत्रीय संतुलन दिया।     ●लेकिन आज जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले किए हैं, तो भारत की भूमिका क्या होनी चाहिए? नैतिकता कहती है—जिस पर जुल्म हो रहा है, उसके साथ खड़े हो। गुटनिरपेक्षता का मतलब चुप्पी नहीं—सही के साथ बोलना है। ईरान ने हमेशा भारत को दोस्त माना; अब हमारी बारी है।  ●फिर भी हकीकत कड़वी है। मोदी सरकार ने हमलों की निंदा नहीं की—बस "चिंता" जताई, "संयम" कहा। क्यों? क्योंकि 90 लाख भारतीय मध्य- पूर्व में काम करते हैं—उनकी जान पहले। तेल कीमतें उछल रही हैं, चाबहार पोर्ट पर काम रुक सकता है। इसराइल से डिफेंस और टेक, अमेरिका से ट्रेड—सब दांव पर।   ●तो क्या करें? चुप रहना "स्मार्ट" ...