दूसरी पारी (Sanghmitra Rai)
*दूसरी पारी* मेरी पत्नी पिछले अढ़ाई महीने से तथा मैं पिछले आठ दिन से अहमदाबाद में था । मौका था मेरी बेटी के बेटा होने की खुशी का । आज हम उससे विदा लेकर अपने घर पानीपत वापिस जा रहे है । चलते हुए मैंने अपने नवासे को गोदी में लिया फिर बेटी के सिर पर हाथ रखते हुए आशीर्वाद देते हुए कहा कि हमारे प्रवास के दौरान कोई गलती हुई हो तो माफ करना । मेरी बेटी ने भी जवाब में कहा कि *आपसे नही उनसे कोई गलती हुई तो माफ करना* । इस दौरान मैने पाया कि नवासे का डॉयपर उतरा हुआ है जिसकी वजह से मेरे हाथ पर कुछ गीला सा महसूस हुआ । मैने कहा कि मां -बाप तो बच्चे की हर चीज और बात क्षमा करते है ,कही बच्चे कुछ अलग न महसूस करें ,उन्हें इसकी चिंता रहती है । उसके घर से एयरपोर्ट तक आने तक उसकी सारी जीवन यात्रा एक चलचित्र की तरह चलने लगी । यह मेरी दूसरी बेटी है । मुझे याद है कि उसके जन्म पर हमारे तमाम उदार सामाजिक ताने बाने के बावजूद कोई भी हमे बधाई देने में गुरेज करता था । मैंने अपनी इस पीड़ा को दिल्ली जाकर अपनी गुरु व मातृवत दीदी निर्मला देशपाण्डे जी को बताया था । वे भी इसस...