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आत्मकथन

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आत्मकथन * "भी हूं -ही कभी नही" *       मेरा जन्म  राष्ट्रीय धारा से सने एक आर्य समाजी -गांधी सेवक- राजनैतिक रूप से कांग्रेसी  परिवार में हुआ अतः यह सब गुण मुझमें जन्मजात रहे ।     विद्यार्थी जीवन में भगतसिंह और उसकी विचारधारा से प्रभावित होकर  कम्युनिस्टों के निकट आया ।       युवा काल के पूर्वार्द्ध में  गांधी-विनोबा विचार प्रवाह में वापिस लौट कर सर्वोदय विचार से जुड़ा ।    मैं दैनिक अग्निहोत्री हूं पर किसी भी मंदिर ,दरगाह , चर्च अथवा तीर्थस्थल पर उसी आस्था से जाता हूँ जैसा कि उनका अकीदतमंद धर्मावलम्बी । साम्प्रदायिक व ऐसी किसी भी संकीर्णता से कभी नही जुड़ा और न ही जुडूंगा ।     घर -परिवार का खर्च मैने वकालत से चलाया और सामाजिक कामों में रुचि के लिए अनेक एन जी ओ से जुड़ा रहा ।     जो मैं शुरू में था वैसा ही सदा नही रहा और जो अब हूं वैसा ही बना रहूंगा इसकी कोई गारंटी नही है । राम मोहन राय 10.01.2022 पानीपत