Shantiniketan School
शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल के बोलपुर शहर में स्थित, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की दूरदर्शिता और शिक्षा के प्रति उनके प्रगतिशील विचारों का प्रतीक है। यह स्थान न केवल एक शैक्षणिक संस्थान है, बल्कि एक ऐसा आश्रम है जहां प्रकृति, कला, संस्कृति और शिक्षा का अनूठा मेल देखने को मिलता है। मेरी हाल की यात्रा में मुझे इस संस्थान के विभिन्न पहलुओं को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला।
विद्यालय का दौरा:
शांतिनिकेतन में स्थापित विद्यालय, जिसकी नींव टैगोर ने 1901 में रखी थी, आज भी अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप चल रहा है। यहां पहली कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। विद्यालय में प्रवेश करते ही मुझे सबसे पहले बसंती रंग के कपड़े पहने छात्र-छात्राएं दिखाई दिए। यह रंग शांतिनिकेतन की पहचान है और यहां के छात्र इसे गर्व के साथ पहनते हैं।
शिक्षा का अनूठा तरीका:
शांतिनिकेतन की शिक्षा प्रणाली पारंपरिक शिक्षा से बिल्कुल अलग है। यहां छात्रों को रटने के बजाय समझने और अनुभव करने पर जोर दिया जाता है। मैंने देखा कि छात्र पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ रहे थे। कुछ संगीत सीख रहे थे, तो कुछ चित्रकारी में व्यस्त थे। कुछ छात्र नाटक का अभ्यास कर रहे थे, जबकि अन्य विज्ञान के प्रयोगों में लीन थे। यहां की शिक्षा में कला, संगीत, नृत्य और साहित्य को समान महत्व दिया जाता है। हमने यहां देखा कि कुछ विद्यार्थी "अंधेर नगरी चौपट राजा" नाटक की रिहर्सल कर रहे थे.
छात्रावास और दिनचर्या:
शांतिनिकेतन में लड़कों और लड़कियों के छात्रावास अलग-अलग हैं, लेकिन उनकी दिनचर्या एक ही है। प्रातःकाल सभी छात्र सामूहिक रूप से सर्व धर्म प्रार्थना में शामिल होते हैं। यह प्रार्थना सभी धर्मों को सम्मान देती है और एकता का संदेश देती है। प्रार्थना के बाद कक्षाएं शुरू होती हैं, जो दोपहर तक चलती हैं। दोपहर के बाद छात्र अपनी रुचि के अनुसार विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते हैं।
रवींद्रनाथ टैगोर ने अपने बचपन में ही महसूस किया था कि बच्चों को बंधन में रखकर उनकी प्रतिभा को निखारा नहीं जा सकता। उन्होंने शांतिनिकेतन में ब्रह्मचर्य आश्रम की स्थापना की, जहां छात्रों को स्वतंत्र और प्राकृतिक वातावरण में शिक्षा दी जाती है। यहां की शिक्षा प्रणाली न केवल बच्चों के बौद्धिक विकास पर ध्यान देती है, बल्कि उनके मानसिक और आध्यात्मिक विकास को भी प्रोत्साहित करती है।
शांतिनिकेतन ने कई प्रसिद्ध हस्तियों को शिक्षा दी है। भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने यहां शिक्षा प्राप्त की। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे, और कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी यहां की शिक्षा प्रणाली से लाभ उठाया है।
नई तालीम और आधुनिक प्रयोग:
शांतिनिकेतन की शिक्षा प्रणाली न केवल गुरुदेव टैगोर के विचारों को दर्शाती है, बल्कि महात्मा गांधी की नई तालीम की अवधारणा को भी जीवंत रखती है। नई तालीम के प्रयोग पूरी दुनिया में हो रहे हैं, और पानीपत में निर्मला देशपांडे संस्थान के तहत हमारे स्कूल में भी इस प्रयोग को लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। हमारे आदर्श महात्मा गांधी, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और निर्मला देशपांडे हैं, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित किए।
शांतिनिकेतन की यात्रा ने मुझे शिक्षा के एक नए आयाम से परिचित कराया। यहां की शिक्षा प्रणाली न केवल बच्चों को ज्ञान प्रदान करती है, बल्कि उन्हें एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा भी देती है। यह स्थान आज भी टैगोर के सपनों को जीवंत रखे हुए है और हमें यह संदेश देता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन को समझना और उसे बेहतर बनाना है।
Ram Mohan Rai,
Shantiniketan, West Bengal.
18.03.2025
Very nice. This is a good place. I have been here twice and also the House of Sri Ravindra Nath Tagore. Thank you so much for sharing this post. Regards
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