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Showing posts from August, 2026

बर्लिन का सीनियर सिटीजन होम : सक्रिय वृद्धावस्था का प्रेरणादायी मॉडल / 27.07.2027

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बर्लिन का सीनियर सिटीजन होम : सक्रिय वृद्धावस्था का प्रेरणादायी मॉडल बर्लिन प्रवास के दौरान मुझे जर्मनी की सामाजिक व्यवस्था को निकट से देखने का एक अत्यंत प्रेरणादायी अवसर प्राप्त हुआ। हमारे मेजबान श्री राजेन्द्र चोपड़ा ने बताया कि वे और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मीता चोपड़ा सप्ताह में चार-चार घंटे स्थानीय सीनियर सिटीजन होम (Senior Citizens' Centre) में स्वैच्छिक सेवा (Voluntary Service) करते हैं। यह जानकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई कि भारतीय मूल के लोग अपने कर्म और सेवा-भाव से जर्मन समाज में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। जिस दिन हम वहाँ गए, उस दिन श्रीमती मीता चोपड़ा की सेवा-पाली थी। वे प्रातः ही अपने दायित्व के निर्वहन के लिए केंद्र पहुँच गईं। कुछ समय बाद मैं, मेरी पत्नी तथा श्री राजेन्द्र चोपड़ा बस द्वारा वहाँ पहुँचे। भवन के बाहर लगा बोर्ड देखकर ज्ञात हुआ कि यह केंद्र बर्लिन के टेम्पेलहोफ़-शोनेबर्ग (Tempelhof–Schöneberg) जिला प्रशासन के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित है। जर्मन भाषा में इसे Seniorenfreizeitstätte अर्थात वरिष्ठ नागरिक मनोरंजन एवं गतिविधि केंद्र कहा जात...

ब्रांडेनबर्ग गेट : विभाजन से एकता तक की यात्रा /Berlin, Germany. 26.07.2026

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ब्रांडेनबर्ग गेट : विभाजन से एकता तक की यात्रा होलोकॉस्ट स्मारक से निकलकर हम कुछ ही दूरी पर स्थित ब्रांडेनबर्ग गेट (Brandenburg Gate) पहुँचे। यह केवल बर्लिन का ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण जर्मनी का सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। इसका निर्माण 1788 से 1791 के बीच प्रशिया के सम्राट फ्रेडरिक विलियम द्वितीय के आदेश पर वास्तुकार कार्ल गोटहार्ड लैंगहांस ने कराया था। इसके शीर्ष पर स्थापित चार घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले रथ (Quadriga) में शांति की देवी विराजमान हैं। आज यह द्वार जर्मनी की एकता, लोकतंत्र और स्वतंत्रता का प्रतीक माना जाता है। इस ऐतिहासिक स्थल पर खड़े होकर मेरी स्मृतियाँ अचानक 1987 में पहुँच गईं। लगभग चार दशक पहले जब मैं पहली बार बर्लिन आया था, तब जर्मनी दो भागों—पूर्वी जर्मनी (East Germany) और पश्चिमी जर्मनी (West Germany)—में विभाजित था। उस समय मैंने इस द्वार को पूर्वी बर्लिन की ओर से देखा था। सामने कंटीले तार, सैनिकों की चौकसी और बर्लिन की दीवार मानव इतिहास के सबसे दुखद अध्यायों में से एक का प्रतीक थी। उस समय इस द्वार से होकर ...

Memorial to the Murdered Jews of Europe /26.07.2026

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बर्लिन और एम्स्टर्डम : इतिहास की चेतावनी और मानवता का संदेश नीदरलैंड प्रवास के दौरान हमारे यात्रा कार्यक्रम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव था जर्मनी की राजधानी बर्लिन, जहाँ हमने "यूरोप के मारे गए यहूदियों का स्मारक" (Memorial to the Murdered Jews of Europe) का भ्रमण किया। यह स्मारक ब्रांडेनबर्ग गेट के निकट स्थित है और विश्व के सबसे मार्मिक स्मृति स्थलों में से एक माना जाता है। इसका उद्घाटन 10 मई 2005 को किया गया था। लगभग 19,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले इस स्मारक में 2,711 कंक्रीट के चबूतरे (Stelae) बनाए गए हैं। इनकी ऊँचाई अलग-अलग है और इनके बीच बनी संकरी पगडंडियों पर चलते हुए व्यक्ति स्वयं को कुछ क्षणों के लिए दिशाहीन और अकेला अनुभव करता है। यही इस स्मारक की वास्तुकला का उद्देश्य है—दर्शक उस भय, असुरक्षा और अनिश्चितता की एक झलक महसूस कर सके, जिससे लाखों निर्दोष लोग नाज़ी शासन के दौरान गुज़रे। इन चबूतरों के बीच चलते हुए मेरे मन में बार-बार एक ही प्रश्न उठ रहा था—क्या कोई मनुष्य केवल अपने रंग, जाति, धर्म या राष्ट्रीयता के कारण स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ मान सकता है...