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Showing posts from June, 2026

प्रेरणा के स्रोत: प्रिंसिपल लाभ सिंह जी

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प्रेरणा के स्रोत: प्रिंसिपल लाभ सिंह जी कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनकी उपस्थिति मात्र से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हमारे आदरणीय प्रिंसिपल लाभ सिंह जी ऐसे ही व्यक्तित्वों में से एक हैं। वे मेरे अध्यापक रहे हैं और मुझे उनके छात्र होने का गर्व है। अर्थशास्त्र के लोकप्रिय शिक्षक के रूप में उन्होंने हजारों विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। बाद में वे आर्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पानीपत के उप-प्रधानाचार्य और फिर प्रधानाचार्य बने। उनके कार्यकाल में विद्यालय ने निरंतर प्रगति की और हाई स्कूल से सीनियर सेकेंडरी विद्यालय के रूप में विकसित हुआ। लाभ सिंह जी केवल एक शिक्षक या प्रशासक ही नहीं थे, बल्कि अनुशासन, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व के जीवंत उदाहरण रहे हैं। वे एनसीसी और एनएसएस के प्रभारी भी रहे। उनकी कार्यशैली एक सैनिक के समान अनुशासित और दृढ़ थी। साथ ही वे आर्य समाज की गतिविधियों में गहरी रुचि रखते थे तथा अनेक बार आर्य प्रतिनिधि सभा और आर्य विद्या परिषद के महत्वपूर्ण पदों पर रहे। हाल ही में उनका हमारे घर आगमन हुआ। वे हमें अपना आशीर्वाद देने आए थे। उनकी उपस्...

पानीपत का इतिहास-2

पानीपत : इतिहास की धड़कनों को सुनने का एक प्रयास -1 पानीपत का नाम सुनते ही सामान्यतः लोगों के मन में तीन महान युद्धों की स्मृति उभर आती है। इतिहास की पुस्तकों में भी पानीपत का परिचय प्रायः इन्हीं युद्धों के माध्यम से कराया जाता है। किंतु मेरे लिए पानीपत का अर्थ केवल युद्धों का मैदान नहीं है। यह एक जीवंत सभ्यता, बहुआयामी संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और साझी विरासत की वह धरती है जिसने सहस्राब्दियों से भारत के इतिहास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पानीपत के इतिहास के प्रति मेरी रुचि का आरंभ मेरे छात्र जीवन में हुआ, परंतु इस रुचि को दिशा और गहराई प्रदान करने का श्रेय मेरे पूज्य पिता मास्टर सीताराम जी सैनी को जाता है। उन्होंने सन् 1928 से 1948 तक जैन हाई स्कूल, पानीपत में अध्यापक के रूप में कार्य किया। इतिहास उनके प्रिय विषयों में था। बचपन में जब मैं उनके साथ बैठता, तो वे केवल घटनाएँ नहीं सुनाते थे, बल्कि उन घटनाओं के पीछे छिपे समाज, संस्कृति और मानवीय अनुभवों की भी चर्चा करते थे। वे अक्सर कहा करते थे कि पानीपत का इतिहास केवल तीन युद्धों का इतिहास नहीं है। यह वह भूमि है जिसने मह...