शांति की वो कामना, जो युद्ध की आग में जल रही है -nityanootan.blogspot.com/05.03.2026
आज दुनिया दो तरफ़ खड़ी है—एक तरफ़ अमेरिका-इज़राइल की मिसाइलें, दूसरी तरफ़ ईरान की जवाबी गूँज। स्कूलों पर हमले, जलपोतों का विनाश, बच्चे मलबे में, माँएँ रोती हुईं। और बीच में वो पुराना बहाना—"Everything is fair in love and war"।
पर सच ये है—युद्ध में कुछ भी "fair" नहीं होता। स्कूल पर हमला युद्ध अपराध है। बच्चे मरते हैं, तो इंसानियत मर जाती है। ईरान कमज़ोर हुआ है, पर सरेंडर नहीं करेगा। अमेरिका की बातें प्रोपगैंडा हैं—कुछ दिन में खत्म हो जाएगा, ये सिर्फ़ घरेलू समर्थन के लिए।
फिर भी, एक आवाज़ है जो चुप नहीं—भारत की। वो कहती है: अहिंसा, प्रेम, सहयोग। हम चाहते हैं कि सूरज सबको रोशनी दे, चाँदनी सबको सुकून, हवा सबको ठंडक, पानी सबको मिठास—बिना किसी की लाश पर।
ये कामना आसान नहीं। सत्ता, तेल, हथियार—ये सब अभी भी मज़बूत हैं। लेकिन इतिहास गवाह है—युद्ध रुके हैं। यूरोप में, अफ्रीका में। तो क्यों नहीं पूरी दुनिया में?
अगर हम सब मिलकर कहें—"हम युद्ध नहीं चाहते"—तो कोई सरकार इसे अनदेखा नहीं कर पाएगी। हमारी कामना धीरे-धीरे फलेगी। बच्चे स्कूल जाएँगे, मज़दूर काम पर, महिलाएँ बिना डर के।
सोने से पहले एक प्रार्थना:
"हे ईश्वर, दुनिया को वो शांति दे, जहाँ कोई मिसाइल नहीं, सिर्फ़ दिलों की धड़कनें हों।"
शांति की ये कामना—हम सबकी है।
Ram Mohan Rai.
Nityanootan.blogspot.com.
05.03.2026
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