लाल-बाल-पाल

*स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा* का सिंहनाद करने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को विनम्र श्रद्धांजलि । यह आदमकद मूर्ति सुप्रीम कोर्ट ,नई दिल्ली के प्रारंभिक कोने पर लगी है और इससे लगती सड़क का नाम *तिलक मार्ग* दिया है ।
 भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में लाल- बाल - पाल की गूंज रही है ।
लाल - लाला लाजपतराय(पंजाब केसरी)
बाल- लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक( महाराष्ट्र)
पाल- बिपिन चंद्र पाल ( बंगाल)
 सौभाग्यवश ये तीनो ही उच्चकोटि के पत्रकार व साहित्यकार थे ।
    लाला जी ने अनेक पुस्तको की रचना की व पंजाब केसरी समाचार पत्र की शरुआत की । उन्होंने अपनी वकालत के साथ-२ ,लाहौर में नेशनल कॉलेज की स्थापना की जहाँ स0 भगतसिंह सरीखे नौजवान पढ़े । रोलेट एक्ट का विरोध करते हुए वे लाठीचार्ज का शिकार हुए और उन्होंने कहा कि उनके शरीर पर पड़ी एक-२ लाठी अंग्रेज़ी सरकार के ताबूत पर कील का काम देगी । अंततः वे शहीद हुए और उनकी मौत का बदला भगत सिंह व उनके साथियों ने हत्यारे सांडर्स को मार कर लिया ।
     लोकमान्य तिलक को महात्मा गांधी अपना गुरु मानते थे । तिलक की प्रेरणा से ही बापू दक्षिण अफ्रीका से भारत आये व बनारस में उनकी उपस्थिति में ही अपना ऐतिहासिक भाषण दिया । तिलक ने ही महाराष्ट्र में " गणपति उत्सव" की शुरूआत की । जो एक राष्ट्रनाद था न की कोई धार्मिक अनुष्ठान । लोकमान्य ने पुणे से ही अपने मराठी अखबार *केसरी* की शुरुआत की और उसी में प्रकाशित लेख को अंग्रेज़ी सरकार ने देशद्रोह को उकसाने वाला प्रकाशन माना व गिरफ्तार कर जेल में डाल कर प्रताड़ित किया । उसी मुकदमे के दौरान ही उन्होंने स्वराज सम्बन्धी अपना ऐतिहासिक वक्तव्य दिया ।
बिपिन चंद्र पाल एक महान क्रांतिकारियों थे जो सुधारवादी आंदोलन बृह्मो समाज से जुड़े थे । सन 1905 में  अंग्रेजी शासन द्वारा साम्प्रदायिकता के आधार पर बंगाल विभाजन (बंग भंग) का इन्होंने पुरजोर विरोध किया था। गांधी जी से मतभेदों को उन्होंने इसे अपने तर्को से उजागर किया । अपने समाचार पत्र *पथ प्रदर्शक*  व *वन्दे मातरम* के माध्यम से उन्होंने अपने स्वदेशी आंदोलन के विचारों को अभिव्यक्ति दी ।
एक महान पुण्य स्मरण ।
शुभ प्रातः ।
राम मोहन राय
दिल्ली/ 03.12.2019

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