सृजन निकेतन

 


स्पेस फ़ॉर नरचरिंग क्रिएटीविटी (एस एन सी)श्यामावन-खुमेरा ,रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड में आने का सौभाग्य कोई सामान्य अवसर न होकर एक दैवी कृपा है । यह कृपा भी दीदी निर्मला देशपांडे जी के पुण्यप्रताप से ही अर्जित हुई । मुझ पर यह उन्ही की ही अनुकम्पा थी कि उन्होंने मुझे नित्यनूतन के सम्पादन से जोड़ा और वायदा लिया कि इसे किसी न किसी रूप में जारी रखा जाएगा । पहले पत्रिका के रूप में और फिर वार्ता के रूप में इसे लगातार चलाया जा रहा है । वार्ता के दौरान ही स्मृति राज के परिचय से अर्चना बहुगुणा का सम्पर्क मिला । वार्ता में  उन्होंने जिस तरीके से अपने काम का परिचय दिया उसने सहज ही आकर्षण पैदा किया । पर यह उम्मीद नही थी कि इस अवसाद के दिनों में उनका ऊर्जा भरा निमंत्रण हमें उनके संस्थान तक ले आएगा ।

     


मैं ,मेरी पत्नी कृष्णा कांता व पुत्र उत्कर्ष इस माह की 10 तारीख को एक लंबे सफर के बाद उनके गांव खुमेरा पहुंचे । यात्रा की थकावट बहुत थी परन्तु उनके  गर्मजोशी भरे स्वागत ने उसे तुरंत सामान्य बना दिया । हम बेशक उनके पैतृक निवास पर उनके माता-पिता के साथ रहे परन्तु हमारा खिंचाव तो उनके संस्थान के प्रति था । 

     


स्पेस फ़ॉर नारचरिंग क्रिएटिविटी (एस एन सी) जिसे स्थानीय लोग सृजन निकेतन के नाम से जानते है चारो तरफ सुंदर और स्वच्छ वातावरण से परिपूर्ण है । इसकी एक तरफ हिमालय की बर्फीली पहाड़िया दृष्टिगोचर होती है ,दूसरी तरफ बाबा केदारनाथ की घाटी , तीसरी तरफ कल-२ बहती मंदाकिनी और एक तरफ बाबा तुंगनाथ का चौखम्बा पर्वत । प्रकृति ने इस स्थान का अलंकरण स्वयं अपने हाथों से किया है । 

     एस एन सी  में हो रहे प्रयोग भी इसकी प्राकृतिक संपदा के वैभव के अनुरूप ही है । स्वयं शिक्षण, प्रशिक्षण , आत्मानुभूति , जागरण एवम सशक्तिकरण के अद्भुत प्रेरणादायक काम यहाँ हो रहे है । और आनंद की बात यह है कि इनका नेतृत्व कोई एक -दो लोगो द्वारा न होकर सामूहिक है और वह भी सामूहिक स्त्री शक्ति द्वारा । यहाँ का मूल मंत्र भी मैं नही हम है ,अपना सुख नही सार्वजनिक सुख है ।

     


यहाँ एक आवासीय विद्यालय भी है जहाँ पढ़ने वाले बच्चे भी खूब है । परन्तु कक्षाओं के लिए कमरे व पढ़ाने वाले अध्यापक नदारद है । विद्यार्थी खुले में प्रकृति की गोद मे पढ़ते है । कोई वृक्षो के तले तो कोई अपने मन से सृजन निकेतन के खेत-खलियान अथवा गौशाला में ।  किसी भी प्रकार का कोई भी दवाब नहीं । गुरु गोबिन्द सिंह जी महाराज के शब्द आपे गुरु -आपे चेला यह पूरी तरह चरितार्थ होते है ।  नदी , झरने , वायु , वृक्ष, पक्षियों तथा अन्य वन्य प्राणियों की आवाजों से जो संगीत ,लय ,ताल व स्वर बनता है वह ही यहॉ के विद्यार्थी अपने जीवन मे उतार कर उन्हें वाद्ययंत्रों पर अपनी वाणी से प्रस्फुटित करते है ।

     


गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर के विश्वभारती  और  संत विनोबा द्वारा ब्रह्न विद्या मंदिर का अद्भुत समन्वय प्रयोग यहाँ आपको देखने को मिलेगा । यहाँ न तो गुरुदेव है अथवा न ही बाबा परन्तु उनके विचार की शास्वत ज्योति अवश्य यहाँ देदीप्यमान है ।

     


दीदी निर्मला देशपांडे जी की 91वीं जन्मतिथि इस बार यहाँ मनाई गई । दीदी तो स्वयं सिद्धा थी । मृत्योपरांत किसी भी कर्मकांड की उन्हें आवश्यकता नही थी फिर भी यदि कोई आवश्यकता रही होगी तो यहाँ की ब्रह्चारिणी साधिकाओं ने उनके जन्मदिन पर उन्हें भावांजलि देकर पूरी कर दी है ।

      एस एन सी में आना किसी भी सार्थक तीर्थ पुण्य प्राप्त होने से कम नही है । शांति निकेतन और   ब्रह्म विद्या से अवतरित यह धारा यहाँ मंदाकिनी और अलकनन्दा का मिलन है ।

    हमारी कामना है कि सृजन निकेतन के ऐसे प्रयोग दुनियां भर में स्थान-२ पर हो ताकि विश्व बंधुत्व व शांति की कामना फलीभूत हो सके ।

राम मोहन राय

श्यामावन-खुमेरा ,

केदारनाथ क्षेत्र , उत्तराखण्ड।

24.10.2020

(Nityanootan Varta  broadcast Service)

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