भरा पूरा परिवार

 *भरा पूरा परिवार*            हमारे एक साथी का आज संदेश था कि आपको बहुत ही दुख भरे दिन देखने पड़ रहे हैं। सोशल मीडिया में आपकी रोजाना कोई न कोई पोस्ट होती है। जिसमें आप कोई शोक समाचार लिखते हैं ।एक अन्य मित्र का कहना था कि पता नहीं और कितने संस्मरण लिखने होंगे। इन मित्रों की मुझसे बहुत ही आत्मीय सहानुभूति रही। मैं अपने मित्रों का आभार व्यक्त करता हूं कि वे मेरी वेदना को समझते हैं।    

       रोजाना कोई न कोई शोक समाचार देने का सिलसिला इसलिए भी है कि मेरा परिवार बहुत बड़ा है।

      आज से लगभग 30 वर्ष पूर्व मेरी माता श्रीमती सीता रानी सैनी जी का निधन हुआ था। मेरे होशो हवास में परिवार में यह पहली मृत्यु थी। परंतु उस समय मुझे संतोष भी था कि माताजी लगभग 3 वर्ष तक बैड पर रही और अनेक शारीरिक कष्ट सहन किए। वह मृत्यु उनकी कष्टों से निर्वृति भी थी। इसके 7 वर्षों बाद मेरे पूज्य पिता  मास्टर सीताराम जी सैनी का निधन हुआ और उनके जाने में दो-तीन मिनट से भी ज्यादा का समय नहीं लगा। तब मन में प्रश्न उठा कि क्या मृत्यु भी इतनी जल्दी हो जाती है? माता जी को 3 साल लगे। इस हिसाब से पिताजी को भी साल डेढ़ साल लगना ही चाहिए था। पर ऐसा क्या? इसका अर्थ है कि मृत्यु आने का कोई समय नहीं है। इसी दौरान मेरे ससुर श्री गणेश लाल माली जी का भी देहांत हुआ ।पर यह सब एक अंतराल में हुआ। हम लोग भी जैसे उनको विदा करने की मन: स्थिति में ही थे।

       यह वह समय था जब हम परिवार की सीमा को बढ़ाने में लगे और इस सीमा क्षेत्र के परिवर्धन का सबसे बड़ा कार्य दीदी निर्मला देशपांडे जी के सानिध्य में मिला। उनके जीवनकाल में ही परिवार का ऐसा विस्तार हो गया था कि जिसकी कोई भौगोलिक सीमाएं नहीं थी । सन 2008 में दीदी भी हमें छोड़ कर चली गईं। मेरी माता जी की मृत्यु के बाद दीदी का विछोह मेरे लिए  असहनीय था । माता जी की मृत्यु के बाद दीदी ने मुझे रास्ता दिखाया कि उनके नाम से संस्थागत सेवा कार्य करें और इस तरह से वर्ष 1992 में माता सीता रानी सेवा संस्था की स्थापना हुई। दीदी तो खुद राह दिखा गईं थीं। उनके द्वारा निर्मित अनेक संस्थाओं के बावजूद उन्हीं की प्रेरणा से सन 2009 में निर्मला देशपांडे संस्थान का कार्य प्रारंभ हुआ।         गीता में कहा है  हि   “जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च |तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि |   


अर्थात जिसने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है और जो अपरिहार्य है ,उसमें शोक करना योग्य नहीं।

        सन 2020 का पूरा वर्ष पूरी तरह से गमगीन करने वाला था । 25 मई को मेरी सासू मां श्रीमती केसर देवी जी का निधन हुआ। उन्होंने अपना भरपूर जीवन जिया ।उसी वर्ष 1 सितंबर को मेरे अनन्य मित्र व सहयोगी डॉ शंकर लाल का निधन हुआ। 17 सितंबर को मेरे भाई, मित्र एवं गुरु स्वामी अग्निवेश जी हमें छोड़ कर चले गए । 20 सितंबर को मेरे सगे भाई श्री मदन मोहन चले गए। 

4 अक्टूबर को मित्र एवं सहयात्री नवाब शोएब अली खान चले गए। ये सभी तो मेरे निकटस्थ व्यक्ति ही थे।

      अब सन 2021 में पिछले 2 महीने से जाने वालों का एक सिलसिला ही चला आ रहा है। श्रीमती मधु सैनी, श्री दयानंद जी सैनी बेशक मेरे साली एवं साढू भाई थे। श्री त्रिभुवन जी परिवार में मेरी पत्नी के मौसेरे भाई थे। क्या परिवार सिर्फ इतना ही है?  श्री दीपचंद्र निर्मोही जी की पुत्रवधू श्रीमती सुशीला शर्मा क्या मेरे परिवार की नहीं है ?अथवा भगत सिंह के भतीजे सरदार किरनजीत सिंह  के परिवार का मैं सदस्य नहीं हूं? श्री महावीर नरवाल क्या नताशा के ही पिता थे क्या मैं नताशा का कुछ नही लगता?  प्रो0 लाल बहादुर वर्मा पूरे विश्व को अपना परिवार मानते थे तो क्या हम उसके सदस्य नही है ? श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी क्या राजीव नयन के ही पिता थे ?क्या वह मेरे पिता जी नहीं थे? श्री राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी की पत्नी का निधन क्या  ऐसा नहीं है कि मेरी भाभी ही गुजर गई हो। दूसरे शब्दों में अगर कहे कि पूरी दुनिया में इस महामारी से जो लोग जा रहे हैं ,क्या मैं उनकी पीड़ा मैं उस तरह शामिल नहीं हूं ,जैसे कि उनके व्यक्तिगत पारिवारिक सदस्य । यदि ऐसा नहीं है तो जो सानिध्य मेरे माता- पिता, गुरु मां निर्मला देशपांडे, भगत सिंह का परिवार एवं सुंदरलाल बहुगुणा के माध्यम से मिला है उसका मैं हकदार नहीं हूं।

       मेरा परिवार एक विस्तृत परिवार है। इसलिए किसी के भी जाने से मैं व्यथित एवं शोकाकुल हूं जितना कि निजी क्षति से ।

        मुझे सिखाया गया था कि,' "मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना" और मुझे समझाया गया था कि संपूर्ण पृथ्वी हमारी मां है और हम उसकी संतान। 

    पर यह बात याद रहनी चाहिए कि रात अंधेरी कट के रहेगी । मानव सभ्यता के इतिहास ने इससे भी बुरे दिन देखे है । इस दौर को भी पार करेंगे ।  हम जीतेंगे और जरूर जीतेंगे ।

राम मोहन राय,

पानीपत

24.05.2021

Comments

  1. बिलकुल जीतेंगे। भगवान जो हमारे साथ है उन्हे लंबी और स्वस्थ आयु दे और जो दिवंगत आत्माएं हमे छोड़ कर चली गई उन्हे शांति दे।राधे राधे।

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