Annamalai ji

नित्यनूतन* 
श्री अन्नामलाई जी से मेरा परिचय वर्ष 1993 से ही है जब  अखिल भारत रचनात्मक समाज के अधिवेशन में शामिल होने के लिए हम तिरुपति आए थे. उसी दौरान घूमने के लिए चेन्नई भी आए और रुकना हुआ यहां के प्रमुख वाणिज्य स्थल टी नगर में स्थित ठक्कर बापा आश्रम में जहां सचिव  पद पर वे कार्यरत थे.  वे एक बहुत ही सादगी व सरल भावों से भरे व्यक्तित्व है.  कम बोल  कर काम ज्यादा करने वाले.  उनकी कार्यशैली से ही प्रभावित होकर उनसे मिल कर परिचय प्राप्त करने की इच्छा हुई.  तभी से पहली मुलाकात से वे मेरे पसन्दीदा लोगों में से एक है.  यदि  दूसरे शब्दों मे कहूँ तो  मित्र है.
    इसके बाद तो जब-2 यहां आना हुआ उनसे मिलना न केवल  स्वाभाविक था वही  आत्मीय भी रहा.  और एक दिन परम आदरणीय डॉ इस एन सुब्बाराव भाई जी ने अत्यन्त प्रसन्न होकर सूचना दी कि श्री अन्नामलाई जी राष्ट्रीय महात्मा गांधी संग्रहालय के निदेशक पद पर दिल्ली आ  गए हैं.  यह सचमुच बहुत ही प्रसन्नता का समाचार था.  अब दिल्ली में भी अक्सर मुलाकात होने लगी.
    दिल्ली में आने के बाद अन्नामलाई जी ने संग्रहालय को भी एक नया रूप देने का अद्भुत प्रयास किया, जिस वज़ह  से न केवल इस संस्थान की ख्याति में वृद्धि हुई वही लोगों की आमदरफ्त भी बढ़ी.  न  केवल राष्ट्रीय स्तर पर अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर से भी गणमान्य लोग इसमे आने लगे.  कोई तो एसा दिन नहीं रहता होगा जब बापू पर कोई न कोई आयोजन न होता हो.
      गांधी-150 (महात्मा गांधी तथा  कस्तूरबा के  150 वे जन्म जयन्ती वर्ष) में पूरे विश्व में विभिन्न कार्यक्रमों तथा  प्रवृतियों के माध्यम से उन्हें याद किया गया.  म्युजियम का  भी  इसमे व्यापक सार्थक हस्तक्षेप रहा . विशेष पहल में गांधी जी के जीवन से संबंधित 100 चित्रों को  प्रिंट करवाने का काम हुआ जिसके माध्यम से देश-विदेश के सेंकड़ों शैक्षिक संस्थानों में गांधी जीवन  विचार पहुचने का अद्भुत कार्य हुआ.  और गांधी जी का जीवन ही तो उनका संदेश है.
पानीपत में स्थित निर्मला देशपांडे संस्थान में इन चित्रों से  सुसज्जित प्रदर्शनी का उद्घाटन करने वे स्वयं पधारे.
    भारत और दक्षिण एशियाई देशों विशेषकर पाकिस्तान की जनता के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों के श्री  अन्नामलाई प्रबल समर्थक हैं. हर वर्ष अगस्त में  होने  वाली Aagaz-e-Dosti  यात्रा को हरदम उनका प्रोत्साहन रहता है.  इसका प्रमाण य़ह भी है कि यात्रा के उद्घाटन अथवा  समापन  समारोह में वे हरदम उपस्थित रहते हैं.  उनके रहते हम लोग भी निश्चिंत रहते हैं कि मुहिम की कमान सशक्त हाथो में है.
    अपनी  भांजी अंजना (सुपुत्री सुधा-मारुति)के  विवाह में भाग लेने के पश्चात हम पर्यटन व तीर्थाटन के लिए  पांडिचेरी तथा रामेश्वरम चले गए और वहां से लौटने के पश्चात यहां ठक्कर बाप्पा आश्रम ,चेन्नई में एक दिन को रुके हुए हैं.  यहां श्री अन्नामलाई जी को न  पाकर कुछ उदासी सी महसूस हुई पर यह जान कर हौसलाअफजाई हुई कि उनकी पत्नि डॉ  प्रेमा  व सुपुत्री  यहि पर है  और फिर शाम तक वे भी पहुंच गए.  हमारे उठने से पहले ही वे हमारे विश्रांति गृह में गए और नाश्ते का  न्योता दे कर गए.  हम भी समय से वहॉं सपरिवार पहुंचे और घर मे विशेष रूप से बनाया गया नाश्ता किया.
 
 उनकी पत्नि डॉ प्रेमा एक विदुषी तथा सुलझी हुई महिला हैं तथा  यहां चल रहे विद्यालय की प्राचार्या है. कल  ही    उनके पास  जाकर हमने उनसे बातचीत के शुरू के क्षणों में ही आभास कर लिया कि साम्प्रदायिक सद्भावना,  राष्ट्रीय एकता, मैत्री तथा शांति के  गांधी विचार से वे ओतप्रोत हैं. हर विषय पर वे   अधिकार पूर्वक अपनी बात रखती है. इसी मुलाकात का सदुपयोग हमने उनके विद्यालय के बच्चों को  Aaghaz E Dosti का प्रतिवर्ष प्रकाशित होने वाले कैलेंडर को भेंट करके किया.  विद्यार्थियों ने भी हमे खूब कविताएं, गीत और बातेँ सुनायी.
     श्री  अन्नामलाई -प्रेमा जी की जोड़ी एक अनुकरणीय तथा प्रेरणादायी है.  सौभाग्यवश आज उनकी बेटी का जन्मदिन भी है.  
    इस  सेवाभावी दंपति को हम अपनी सकल शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए बेटी को उनका सुखमय जीवन की मंगल कामनाएँ  व्यक्त करते हैं.
पश्येम शरदः शतम् ।।१।।
जीवेम शरदः शतम् ।।२।।
बुध्येम शरदः शतम् ।।३।।
रोहेम शरदः शतम् ।।४।।
पूषेम शरदः शतम् ।।५।।
भवेम शरदः शतम् ।।६।।
भूयेम शरदः शतम् ।।७।।
भूयसीः शरदः शतात् ।।८।।
(अथर्ववेद, काण्ड १९, सूक्त ६७)
राम मोहन  राय, 
20.03.2022.
चेन्नई. 
[नित्यनूतन वार्ता]

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