Sudha-Maruthi



 


सुधा- मारुति 

         बेशक हम सपरिवार, अपने प्रिय दोस्त श्री पी मारुति की सुपुत्री सुश्री अंजना संग प्रवीण  कुमार के विवाह समारोह में नव दंपति को  आशीर्वाद देने के लिए चेन्नई (तमिलनाडु) आए हैं.  पर  एसे  अवसर न  केवल  मेल-मुलाकात के अवसर प्रदान करते हैं वही सीखने समझने का मौका भी देते हैं. 

    श्री मारुति से  मेरी पहली मुलाकात, दीदी निर्मला देशपांडे जी के दिल्ली आवास पर सम्भवत: वर्ष 1986 में हुई थी.  वे प्रारम्भ से ही बहुत आकर्षक व मिलनसार प्रकृत्ति का व्यक्ति रहे है.  हर समय दीदी का एक विनम्र सेवक तथा आज्ञापालक. वह नाम से ही नहीं अपितु व्यवहार में भी मारुति (रामभक्त हनुमान) ही है. उनकी मैत्री पर हमे गर्व है. 

      वर्ष  1996 में अखिल भारत रचनात्मक समाज के अवसर पर हम लोग तिरुपति आए थे.  यह एक विशाल तथा अविस्मरणीय सम्मेलन था.  तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल जी शर्मा उसके उद्घाटन करने के लिए आए थे.  दीदी ने सम्मेलन के बीच ही चेन्नई  महाबलीपुरम तथा नजदीक के अन्य स्थानों  पर हमारे घूमने की व्यवस्था की थी और इसकी जिम्मेदारी दी थी वरिष्ठ सर्वोदयी श्री एस0 पंडीयन जी  और मारुति जी को. चेन्नई में हरियाणा से आए कुल 73 प्रतिनिधियों को ठक्कर बापा विद्यालय, चेन्नई में ठहराया गया था.  वहॉं  एक बहुत ही मजेदार बात हुई . हमसे पूछा गया कि नाश्ते में इडली, डोसा, बड़ा आदि तो है इसके इलावा  क्या लेना पसंद  करेंगे.  हम पंजाब-हरियाणा के लोग उपरोक्त खाने को तो सिर्फ स्नैक्स ही मानते हैं और यदि इसमे परांठे, दही अथवा मक्खन आदि न हो तो  नाश्ता कैसा? हम ने इन्हीं सब चीजों की फरमाइश की.  प्रत्येक के लिए कम से  कम दो-दो परांठे के लिए कहा गया.  हमारे मेज़बान ने इसे भी पूरा किया और हमारे लिए बाँराटें (एक मैदा-चावल से बना तीन परत में बना बाँराटे- परांठे की तरह) मँगवाया गया.  इसे देखते ही हम तो धराशायी हो गए. यह हमारे पंजाबी परांठे से तीन गुना  भारी था.  तब हमे इस बाँराटें की ताकत का पता चला.

    वर्ष 1996 में आने का दोबारा मौका मिला.  मारूति भाई ने एक साइकिल यात्रा चेन्नई से पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी के शहादत स्थल श्री  प्रेमबदूर  तक रखी थी.  जिसके उद्घाटन समारोह में भाग लेने के लिए मैं  निर्मला दीदी के साथ दिल्ली से  ट्रेन में आया था.  तत्कालीन गवर्नर (तमिलनाडु) श्री भीष्म नारायण सिंह मुख्य अतिथि के रूप मे पधारे थे.  इस यात्रा में लगभग 40-50 नौजवान साथी जिसमें परवीन सुल्ताना व उनका 10 वर्षीय  छोटा भाई, पी रमेश, जॉन,गुरु बाबु,मुत्थू,रवि आदी शामिल थे.  मुझे कभी भी साईकल चलानी नहीं आयी.  दीदी के साथ मैं  भी उनकी कार में था.  रास्ते मे हर 10-20 किलोमीटर पर पड़ने वाले किसी न किसी पड़ाव पर नुक्कड़ मीटिंग होती थी.  ये सभी युवा मित्र चाहते थे कि मैं भी उनके साथ साइकिल पर चलूँ  पर मैं चाहते हुए भी मज़बूर था.  फिर इन्हीं दोस्तों ने एक रास्ता निकाला. वह था कि मैं इनकी साइकिल के  पीछे लगे कैरियर पर बैठूंगा और ये मुझे ले चलेंगे. अब मैं बारी बारी से इनकी सवारी पर बैठता और आनंद लेता.  इन्हें खुशी थी कि मैं भी इनके साथ हूँ. छोटे बालक जो उर्दू भी जानता था ने मुझे कुछ तमिल भाषा के कुछ शब्द सीखा दिए और मेरा काम चलने लगा.  व्यवस्था के मुताबिक रात्री विश्राम दीदी के साथ मेरा गेस्ट हाउस में किया गया.  रात के 12 बजने को थे पर नींद थी कि आने का नाम ही नहीं ले रहीं थीं.मैं उठा और चला गया नजदीक के ही उस स्थान पर जहां हमारे युवा साथी रुके थे.  पर यह क्या, वे तो सभी मेरा ही इंतजार कर रहे थे.  और शुरू हो गयी डांस और संगीत की महफिल.  सुबह 3 बजे तक तमिल गीतों पर हम सबने खूब नृत्य किया.  किसी को भी कोई थकावट नहीं थी.  सुबह 7 बजे हमारी यात्रा का यहां से प्रस्थान था पर मेरे  समेत सभी ऊर्जावान थे. 

   इस यात्रा के बाद तो इन सभी युवाओ से हमारी खूब दोस्ती हो  गयी.  फिर  चाहे दिल्ली में आयोजित सम्मेलन हो अथवा चेन्नई में हम खूब मिलते.

     हम जब भी चेन्नई आते तो यहां हमारा ठिकाना मारुति का घर ही रहता.  उनकी पत्नी सुधा हमारे लिए बहुत ही मेहनत से स्वादिष्ट तमिल व्यंजन बनाती और हम  चटकारे से उनका आनंद उठाते.  वह मुझे अन्ना (बड़ा भाई)कह कर बुलाती और मैं उन्हें  तंगयी(छोटी बहन)कह कर बुलाता.  हर रक्षाबंधन को वह  मुझे राखी भी भेजती.

    सुधा-मारुति का घर एक मेहमान नवाज घर है.

 कोई  ही  तो एसा दिन होता होगा जब 10-5 लोग नहीं आते हों.   

  गांधी ग्लोबल फॅमिली के एक सद्भावना मिशन में जब हम  15 लोग श्रीलंका गए थे तो हम सभी उनके अशोक नगर स्थित घर मे ही रुके थे.  लोगों के हिसाब से घर बेशक छोटा पड़ रहा था पर मेजबान का दिल इतना बड़ा था कि लेशमात्र भी किसी को कोई दिक्कत नहीं हुई.  उनके माता पिता, तीनों बच्चे अंजना ,वैष्णवी तथा पवन को भी सुधा-मारुति के मेहमानों से भी उतना ही प्यार और सत्कार मिला.

     निर्मला दीदी के निधन के तुरंत बाद उनके जन्मदिन 17 अक्टूबर से 22 फरवरी, 2008 में मारुति ने दीदी के सभी साथियों को जोड़ने के लिए कन्याकुमारी से कश्मीर तक की बस यात्रा की जिसमें तमिलनाडु के अधिकांश इलाक़े में हम भी शामिल रहे. यह भारत दर्शन यात्रा भी थी जो जुड़ी थी मारुति के दीदी के प्रति समर्पण व विचार से.

    दीदी की मृत्यु के पश्चात एक शून्यता उत्पन्न हो गयी थी. कद में पांच फुट से भी छोटी निर्मला दीदी देशभर के संख्या में अपने उन हजारों कार्यकर्ताओं के एक दूसरे के कंधे पर खड़े होने पर भी  सब से ऊंची थी.  इस  बात का आभास एस पी वर्मा, वीणा बहन  , डॉ  हुकुम चंद, मारुति और मुझे लगने लगा था.  हम सब  साथी उन्हीं दिनों अक्टूबर-2009 में इकट्ठे हुए और आपसी सहमति से गांधी ग्लोबल फॅमिली की स्थापना का निश्चय किया तथा तुरन्त ही इसका रजिस्ट्रेशन पानीपत में ही अपने-2 हस्ताक्षर से करवाया.

    आज मेरी बहन सुधा की बेटी यानी हमारी भांजी अंजना की शादी में हम सपरिवार आये हैं. वे सब नेग हम करना चाहते हैं जो लड़की की ननिहाल पक्ष के लोग करते हैं. 

    मारुति से 46 वर्षों के रिश्तों की बात कल की ही लगती है. सदैव नित्यनूतन.

    आज का आनंद यह भी रहा कि उन सभी दोस्तों से भी मुलाकात हो गयी जो साइकिल यात्रा में थे, जो दिल्ली  तिरुपति, चेन्नई सम्मेलनों में हमारे साथ थे और  उसके बाद पानीपत हमारे घर भी हमसे मिलने आये थे.  एक दोस्त तो  साइकिल यात्रा का  30 वर्ष पुराना फोटो भी लाया था.  बहुत ही भावुक क्षण रहे पर मिलते ही हम सब आयु में प्रौढ पुरानी यादों मे खो कर जवान हो गये. 

    अंजना-प्रवीण के सफल दाम्पत्य जीवन के लिए अनंत आशीर्वाद व शुभकामनाएं.  दीदी निर्मला जी के आशीर्वाद शब्दो में इनका जीवन सुखमय व सेवामय हो.

" स्वस्ति पन्थामनु चरेम सूर्याचन्द्रमसाविव।

पुनर्ददताघ्नता जानता सङ्गमेमहि"।।

(स्वस्तिवाचनम् - मण्डल ५/सूक्त ५१/मन्त्र१४)

अर्थ ~ हम लोग सूर्य और चन्द्रमा की तरह कल्याण मार्गों पर चलने वाले हों और ज्ञान देकर सुमार्ग को बतलाने वाले विद्वान लोगों की संगति करें।

जैसे सूर्य और चंद्रमा नियमपूर्वक दिन-रात अपने पथ पर चल कर सृष्टि को सुख देते हैं, हम भी उसी प्रकार विद्वानों के संङ्ग रहकर निरन्तर धर्म मार्ग पर चलें।

राम मोहन राय, 

चेन्नई/13.03.2022



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