घूमकड़ की डायरी-23---- अमेरिका में सब्ज़ी मंडी


*अमेरिका में सब्ज़ी मंडी* 
                   अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य में पतझड़ का मौसम चल रहा है और साथ साथ सर्दी की आहट है।  इस राज्य के प्रमुख शहर सीएटल में जहां आजकल हम रह रहे है । दिन का टेंपरेचर जहां 15-16 सेल्सियस रहता है वहीं रात को यह गिर कर 2-3-4 तक पहुंच जाता है । आजकल तो मौसम के हालात यह है कि सूरज देवता के दर्शन भी कई कई दिन तक दुर्लभ हो जाते है । ठंड के साथ साथ बर्फीली हवाएं चलती हैं और बारिश भी लगातार हो रही है ,ऐसे में घर पर ही बिस्तर में दुबके रहना ही श्रयेष्कर है । पर आज सूरज निकला है । बेशक छुट्टी का दिन तो नही है पर इससे हमें क्या लेना देना और हमने इसका फायदा उठाया और तैयार होकर चल दिए इस नगर के मुख्य बाज़ार अर्थात डाउन टाउन की तरफ।  इसके लिए हमने घर के नजदीक से ही एक बस  नजदीक के ही नॉर्थगेट मेट्रो स्टेशन  के लिए  ली और पांच सात मिनट में वहां पहुंच गए और फिर 🚇 मेट्रो जिसे यहां ट्रेन कहते है ,में बैठ कर वेस्टलेक स्टेशन की तरफ बढ़े । हमारी बेटी ने हमारा एक Acro कार्ड बनवाया हुआ है जिसमें सीनियर सिटीजन होने की वजह से टिकट भी एक तिहाई लगता है । हमारा यह पास बस , 🚊 ट्राम , ट्रेन और मोनो रेल सभी जगह चलता है । लगभग 20 मिनट में ही रोजवेल्ट, यूनिवर्सिटी सिटी , वॉशिंगटन यू होते हुए हैं वेस्टलेक स्टेशन पर पहुंचे और फिर पैदल ही सरपट चलते हुए अमेरिका की सबसे पुरानी मार्केट में से एक पाइक पब्लिक मार्केट पहुंचे ।
     पाइक प्लेस पब्लिक मार्केट, पाइक स्ट्रीट जो वर्जीनिया स्ट्रीट से लगती हुई है की स्थापना 17 अगस्त ,1907 को हुई थी और तब से लगातार यह चल रही हैं। वास्तव में यह यहां की एक सब्ज़ी मंडी है जहां दूर दूर से किसान आकर अपने उत्पाद बेचते हैं । उनके साथ साथ स्थानीय दस्तकार और व्यापारी भी अपना अपना सामान बेचते हैं । इस तरह से अगर देखें तो यहां सब्जियां ,फल- फूल , शहद, 🍢 🦞 सीफूड, आर्ट एंड क्राफ्ट का सामान और अन्य विविध समान अन्य मार्केट से सस्ता बिकता है।  प्रतिवर्ष लगभग एक करोड़ लोग इस मंडी में खरीद फरोख्त के लिए आते है । यह दुनियां भर की 33 वीं सबसे बड़ी मंडियों में से एक है ।
     पाइक पब्लिक मार्केट के सामने ही एक होममेड पनीर  की बहुत बड़ी दुकान है जहां दूध और उससे बनने वाला समान ग्राहक के सामने ही बन कर तैयार कर बेचा जाता है। एक तरफ बड़े बड़े कढ़ाए नुमा बर्तनों में दूध को उबाला जा रहा है और फिर उसके साथ ही उसे फाड़ कर पनीर और दूसरा खाने पीने का सामान बना कर सामने ही काउंटर पर उसे बेचा जा रहा था। पनीर के बड़े बड़े पीस जिसका एक एक का वजन एक क्विंटल होगा उसे टुकड़े कर पैकिंग के बाद थोक ग्राहकों को भेजा जाता है।  उसके साथ ही आगे चल कर स्टारबक्स कम्पनी की कॉफी शॉप है जो सन 1912 में शुरू की गई थी । दुकान के बाहर लंबी कतार बता रही थी कि माल तो नायाब है ।
   मार्केट में सब्जियों, फ्रूट्स ,फूलों के गुलदस्तों ,शहद , सीफूड्स , पेस्ट्री, फ्रेश जूस के बड़े बड़े काउंटर लगे थे वहीं दूसरे समान की भी मेज़ सजी थी । अच्छा यह था कि हर चीज का रेट वहीं लगा था अथवा रेट लिस्ट पर था । मोल भाव बिलकुल नहीं था । उन्हे चख अथवा चाट कर जांचने की पूरी आज़ादी थी ।
      हम भारतीय लोग डॉलर मुद्रा को अपने रूपये की तुलना में बहुत बड़ी मानते है । मैं इस पेचीदा रहस्य को समझ नही पाया हूं । पर इतना जरूर समझा हूं कि हमारे देश की तुलना में यहां किसी भी वस्तु की कीमत बहुत ज्यादा है । इनके एक डॉलर की कीमत हमारे देश की मुद्रा में लगभग 82 रूपये है । अब आए अब भारत और अमेरिका के समान के मूल्य में अंतर समझे । 
  समान     डॉलर        रुपए
आलू-1 kg    1.5.        40
टमाटर           1.3         60
सेब।              2.5        140
Mac &          9.5        80    
Cheese
 फूल गुलदस्ता  15      250
 कॉफी                8        50   
    एक मज़े की ओर बात बताता हूं कि यहां की मंडी (मार्केट) में दुकानदार जोर से आवाज़ देकर अपने ग्राहक को आकर्षित करते है । जैसे हमारे यहां कि आलू ले लो - 40 के किलो , टमाटर ले लो ,बैंगन ले लो, भिंडी ले लो आदि आदि ।  एक ही मालिक की दो दुकानें आमने सामने है । एक जगह से दाम तय होने पर वहां का सेल्समैन दूसरी दुकान पर काम करने वाले अपने साथी को कुछ गाता हुआ यह समान कैच 🫴 के लिए फैंकेगा जिसे दूसरा भी पकड़ कर कुछ कोतुक करेगा । हमारे पानीपत शहर में भी सब्जी बेचने वाले गीत गाते हुए ग्राहक को बुलाते थे । जैसे "लैला की अंगुलियां है ,मजनू की पसलियां है । क्या खूब ककड़ियां हैं, वाह जी क्या खूब ककड़ियां है ।"
     इस मंडी में जाकर अपने बचपन की बात खूब याद आई जब हम हर रविवार को सब्ज़ी मंडी में एक जूट  का एक छोटा कट्टा ले कर जाते और हफ्ते भर की सब्जियां भर  कर लाते । अमेरिका में इस मंडी में जाकर कमोबेश कुछ ऐसा ही महसूस हुआ ।
Ram Mohan Rai,
Pike place Market,
Seattle, Washington-USA.

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