Switzerland to Kashmir (घुमक्कड़ की डायरी - 16)

आज शादी का दिन है और सुबह से ही हम इस घर में चहल पहल देख रहे हैं. बहुत ज्यादा खुशी इस बात की हुई कि इस अवसर पर पूरे देश के लोगों से मिलने का  अवसर भी मिला. कई मित्र तेलंगाना से हैं, कोई महाराष्ट्र से है और कोई गोवा से. निर्मला दीदी कहा करती थी की खुशियां बांटने से बढ़ती है और आज हम इसका एक प्रत्यक्ष नमूना देख रहे थे. शादी ब्याह का अर्थ है गीत, संगीत और नृत्य और इन तीनों का अद्भुत संगम आज हमें यहां मिला. कल 11:00 बजे सुबह से महिलाओं ने अपना संगीत का कार्यक्रम शुरू किया था और आज सुबह 4:00 बजे तक चला और अब फिर दिन के 12:00 बजे संगीत शुरू हो गया है और उम्मीद करते हैं कि जब तक विदाई  नहीं होगी तब तक यह चलता रहेगा. इतना जोश  तालमेल है और सुर संगम है की सब जगह आनंद और मंगल की अनुभूति और उसकी गूंज सुनाई देती है. मैंने एक से पूछा कि महिलाएं क्या गा रही हैं तो उनका जवाब था कि यह गा रहीं हैं की दुल्हन तैयार है अपने दूल्हे के साथ जाने के लिए, अब आप आ जाइए और इसे ले जाइए. क्या अजीब मस्ती है इस गीत संगीत में और कितनी सुंदर भाव व्यक्ति भी. कश्मीर के वाद्य यंत्र भी कुछ अलग ही है हमारे यहां ढोलकी की थाप दोनों तरफ होती है जबकि यहां के वाद्य यंत्र में एक तरफ ही  दी जाती है और दूसरी तरफ वह हिस्सा खोखला होता है. इसके साथ-साथ चिमटा और झनझना भी बजाया जाता है और साथ-साथ तालियों की गूंज भी चलती है जो वातावरण को और ज्यादा मनमोहक बना देती है. यह तो था महिलाओं के संगीत का हाल दूसरी तरफ पूरे भारत से जो लोग आए थे, वे भी अपने संगीत की अलग से महफिल लगाए हुए थे. वे अपने-अपने प्रदेशों के गीत गा रहे थे और मजे की बात यह थी कि इन गीतों पर कश्मीरी नौजवान  लोक नृत्य कर रहे थे. आज भी खाने की व्यवस्था मेहंदी की तरह ही थी. तरह-तरह के शाकाहारी और मांसाहारी व्यंजन बनाए जा रहे थे. शाम को दूल्हे ने आना है और बारात में भी उनके लिए भी तरह-तरह के व्यंजन तैयार किया जा रहे थे. शाम के तकरीबन 9:00 बजे बारात आई सबसे पहले दुल्हन की मां ने केसर और पिसे हुए मेवे युक्त  दूध दूल्हे को पेश किया. उसने दो घूंट पिया. वास्तव में यह एक रस्म है कि दूल्हे को स्वागत किस तरह से किया जाए और उसके बाद फिर सभी लोग जो वहां एक व्यवस्थित पंडाल था उसमें बैठे. वहां सब की खातिरदारी शुरू हुई. निकाह संपन्न हुआ और फिर सबने मिलकर भोजन किया. कश्मीर में एक पूरे थाल में भोजन परोसा जाता है और उसमें एक में ही चार हिस्सों में चार व्यक्ति भोजन करते हैं. यह एक बहुत ही अद्भुत प्यार का नमूना है. वास्तव में प्रीति भोज तो यही है.    अब विदाई का समय आया. वे तमाम महिलाएं जो कल से मंगल गीत गा रही थी अब कुछ उदास और भावपूर्ण गीत गा रही थी बेटी को विदा देने के लिए. मैंने पूरी दुनिया में घूम-घूम कर देखा है की शादी के बाद बेटियां अपने पति के घर ही जाती हैं, चाहे वह यूरोपियन समाज हो अथवा कहीं और का. यह एक ही तरह की परंपरा पूरे विश्व में है. सभी के मुख मंडल उदास थे और वह महसूस कर रहे थे कि परिवार का एक हिस्सा उन्हें छोड़कर जा रहा है. दुल्हन का छोटा भाई तो फूट कर रो रहा था, जबकि दुल्हन से उसकी खूब खटपट रहती थी. दुल्हन कहती कि मैं तो अपने कमरे को ताला लगा कर जाऊंगी और जब-जब आऊंगी इस कमरे को तभी खोलूँगी  जबकि भाई कहता अब तो तू जा रही है अब इस कमरे पर वह ताला तोड़कर कब्जा कर लेगा. पर आज वह फूट-फूट कर रो रहा था यह कहते हुए कि मैं तेरे कमरे पर कब्जा नहीं करूंगा तू मत जा. यह भाई- बहन का प्यार संवाद और छोटे छोटे झगडे हर परिवार में रहते हैं. मेरी खुद की बहन मुझसे कुल तीन साल बड़ी थी. उससे मेरा भी अक्सर खूब झगड़ा  रहता था.  हम खूब लड़ते-झगड़ते  पर जब वह विदा होकर  अपनी ससुराल जाने लगी तो मुझे याद है कि मैं फूट-फूट कर रोया था. मेरी हालत देखकर मेरे परिवार वालों ने निश्चय किया और कहा था की जा तू अपनी बहन के साथ चला जा और कुछ दिन के बाद जब यह वापस आएगी तो वापस आ जाना. मैंने ऐसा ही किया था. यह रिश्ते पूरी दुनिया में एक से ही प्यार के रिश्ते और और कच्चे धागे के रिश्ते हैं पर है बड़े मजबूत.
Ram Mohan Rai,
Badipora , Badgam.
Jammu and Kashmir.
06.10.2024

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