मुंबई की एक स्मरणीय यात्रा -03.01.2026

मुंबई की एक स्मरणीय यात्रा

आज हम चारों—मैं, अश्विनी, कोमल, प्रियंका, तुषार, शुभम और sayali —मुंबई घूमने के लिए निकले। यह यात्रा केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इतिहास, संस्कृति और सामाजिक आंदोलनों से जुड़ी एक गहरी अनुभूति बन गई।

हमारी यात्रा की शुरुआत शिवाजी पार्क के पास स्थित एक पारंपरिक महाराष्ट्रीयन होटल से हुई। यहाँ स्थानीय व्यंजनों से भरपूर लंच किया गया। वरण-भात, भाजी, चपाती और मसालेदार चटणियों का स्वाद सचमुच महाराष्ट्र की मिट्टी से जुड़ाव महसूस करा रहा था।

लंच के बाद हमारा अगला पड़ाव था डॉ. भीमराव अंबेडकर का निवास स्थान—राजगृह। यह घर आज भी बाबा साहब के जीवन और विचारों की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है। राजगृह के प्रत्येक कमरे को अत्यंत सहेजकर रखा गया है।

  • भूतल पर स्थित बैठक कक्ष में बाबा साहब अपने सहयोगियों, छात्रों और आंदोलन से जुड़े लोगों से मुलाकात किया करते थे। यह कमरा सामाजिक विमर्श और विचार-विमर्श का केंद्र रहा।
  • अध्ययन कक्ष में उनकी मेज, कुर्सी और पुस्तकों की अलमारियाँ आज भी मौजूद हैं, जो उनके अध्ययनशील और अनुशासित जीवन की कहानी कहती हैं।
  • भोजन कक्ष सादगी का प्रतीक है, जहाँ पारिवारिक जीवन की झलक मिलती है।
  • शयन कक्ष में उनकी व्यक्तिगत वस्तुएँ सुरक्षित रखी गई हैं, जो उनके निजी जीवन को समझने का अवसर देती हैं।

राजगृह की दूसरी मंज़िल पर आज भी उनके पोते का निवास है, जो इस ऐतिहासिक विरासत को जीवित रखे हुए हैं।

यही वह इलाका है जहाँ से बाबा साहब ने अपना पहला चुनाव लड़ा था, हालाँकि वह चुनाव सफल नहीं रहा। यह क्षेत्र उस समय शेतकरी कामगार यूनियन के प्रभुत्व वाला माना जाता था। इसी इलाके में कॉमरेड एस. ए. डांगे का गहरा प्रभाव था और उन्होंने यहीं से चुनाव जीतकर मजदूर आंदोलन को मजबूती दी।

इसी दौरान Sayali ने बताया कि उनके दादा शेतकरी कामगार यूनियन में सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे और गोवा मुक्ति संघर्ष में भी अग्रणी भूमिका निभाई थी। यह सुनकर उस पूरे क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व और भी गहराई से महसूस हुआ।

आज भी इस इलाके में पुराने दोमंज़िला मकान बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं, जिनमें अब भी रिहाइशी बस्ती बसी हुई है। ये मकान बीते समय की सामाजिक और राजनीतिक चेतना के साक्षी हैं।

इसके बाद हम पहुँचे शिवाजी पार्क। यह विशाल मैदान मुंबई की पहचान है। यहाँ सैकड़ों युवा क्रिकेट का अभ्यास करते हुए दिखाई दिए—किसी का सपना अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनने का है तो कोई केवल खेल के आनंद में मग्न था। इसी पार्क में शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की समाधि स्थित है, जो महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

शिवाजी पार्क से आगे बढ़ते हुए हम समुद्र तट की ओर गए, जहाँ डॉ. भीमराव अंबेडकर की समाधि—चैत्यभूमि स्थित है। वहाँ श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए लोगों की लंबी कतार लगी हुई थी। हर चेहरे पर सम्मान, कृतज्ञता और गर्व का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था।

यह पूरी यात्रा इतिहास, संघर्ष, विचारधारा और वर्तमान जीवन से जुड़ाव की एक अनोखी अनुभूति रही। मुंबई की यह सैर हमारे लिए केवल घूमना नहीं, बल्कि समझना, महसूस करना और सीखना थी—वास्तव में बेहद स्मरणीय।

Ram Mohan Rai. 

03.01.2026

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