गोवा की यात्रा: अगुआड़ा जेल का ऐतिहासिक दौरा – यातनाओं और स्वतंत्रता संग्राम की कहानी /08.01.2026

गोवा की यात्रा: अगुआड़ा जेल का ऐतिहासिक दौरा – यातनाओं और स्वतंत्रता संग्राम की कहानी

गोवा की भूमि, जो अपनी खूबसूरत समुद्र तटों, जीवंत संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जानी जाती है, ने हमें अपनी पहली यात्रा में एक ऐसी जगह पर ले जाकर हैरान कर दिया, जो स्वतंत्रता की लड़ाई की गवाह है। हमारा पहला पड़ाव था अगुआड़ा किले की जेल (Aguada Fort Jail), जो समुद्र के किनारे पर स्थित है। यह जगह पुर्तगाली शासकों द्वारा विशेष रूप से इसलिए बनाई गई थी ताकि देशभक्तों और स्वतंत्रता सेनानियों को अधिकतम यातनाएं दी जा सकें। समुद्र की लहरों की गर्जना और ठंडी हवाओं के बीच, कैदियों को अलग-थलग और पीड़ा में रखना आसान था। आज यह जेल एक डिजिटल संग्रहालय में तब्दील हो चुकी है, जो गोवा की मुक्ति की कहानी बयां करती है। यहां की मूर्तियां, कक्ष और प्रदर्शनियां हमें उस दौर की क्रूरता और वीरता की याद दिलाती हैं। आइए, इस जेल के बारे में विस्तार से जानें, जिसमें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, संरचना, विभिन्न कक्षों का वर्णन, महत्वपूर्ण नेताओं का परिचय और चित्रों के आधार पर विवरण शामिल हैं।

 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (इतिहासिक पृष्ठभूमि)
अगुआड़ा किला 17वीं शताब्दी में पुर्तगालियों द्वारा बनाया गया था। इसका निर्माण 1612 में हुआ, जो गोवा को डच और मराठा आक्रमणकारियों से बचाने के लिए रणनीतिक महत्व रखता था। यह किला मांडोवी नदी के मुहाने पर स्थित है, जहां से अरब सागर का नजारा दिखता है। पुर्तगाली शासक एंटोनियो डी सलाजार के शासनकाल में इसे जेल में बदल दिया गया। यहां गोवा की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले देशभक्तों को कैद किया जाता था। 1961 में ऑपरेशन विजय के माध्यम से गोवा की मुक्ति हुई, लेकिन उससे पहले यह जेल यातनाओं का केंद्र थी। 2015 तक यह गोवा की सबसे बड़ी जेल थी, और अब यह एक इंटरएक्टिव म्यूजियम है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 दिसंबर 2021 को किया। संग्रहालय गोवा की प्राचीन इतिहास से लेकर मुक्ति संग्राम तक की कहानी प्रदर्शित करता है, जिसमें पुर्तगाली युग, स्वतंत्रता आंदोलन और गोवा की संस्कृति शामिल है।

 जेल की मजबूत किलेबंदी और विस्तार
अगुआड़ा किले की संरचना पुर्तगाली सैन्य इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह दो हिस्सों में बंटा है: ऊपरी किला (Upper Fort) और निचला किला (Lower Fort), जहां जेल स्थित है। किले की दीवारें 5 मीटर ऊंची और 1.3 मीटर मोटी हैं, जो लेटेराइट पत्थर से बनी हैं। इसमें 79 तोपें थीं, एक विशाल जलाशय (जो 2.5 मिलियन गैलन पानी स्टोर कर सकता था), लाइटहाउस (एशिया का सबसे पुराना, 1864 में बना), गनपाउडर रूम और कैप्टन का घर शामिल हैं। जेल का विस्तार करीब 1 मील से अधिक है, जिसमें मजबूत दीवारें, बैरेक और भूमिगत कक्ष हैं। समुद्र के किनारे होने से यह प्राकृतिक रूप से सुरक्षित था, क्योंकि कैदी भाग नहीं सकते थे। आज संग्रहालय में क्यूआर कोड वाली प्लेट्स हैं, जो ऑडियो गाइड प्रदान करती हैं।

 जेल के विभिन्न कक्षों का विस्तृत वर्णन
जेल में कई कक्ष हैं, जो अब संग्रहालय के रूप में प्रदर्शित हैं। प्रत्येक कक्ष स्वतंत्रता संग्राम की एक अलग कहानी कहता है। यहां मुख्य कक्षों का वर्णन:

1. सॉलिटरी कन्फाइनमेंट (एकांत कारावास कक्ष): ये छोटे, अंधेरे और तंग कक्ष थे, जहां कैदियों को अकेले रखा जाता था। एक उदाहरण डॉ. टी.बी. कुन्हा का सेल है, जो गोवा राष्ट्रवाद के पिता माने जाते हैं। यहां उन्हें मिलिट्री ट्रिब्यूनल द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद कैद किया गया। सेल इतना छोटा था कि बुनियादी स्वच्छता सुविधाएं नहीं थीं। कुन्हा ने सेल की अस्वच्छता की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें दूसरे सेल में शिफ्ट किया गया। आज यह सेल गोवा की मुक्ति की कहानी बताता है, जिसमें डिजिटल डिस्प्ले हैं।

2. यातना कक्ष (टॉर्चर सेल): ये कक्ष पुर्तगाली शासकों की क्रूरता के प्रतीक हैं। यहां कैदियों को उल्टा लटकाकर पीटा जाता था, पानी में डुबोया जाता था या अन्य यातनाएं दी जाती थीं। एक मूर्ति में निहत्थे वीर को अपने घावों और मृत साथियों को हाथ में लिए दिखाया गया है, जो यातनाओं की भयावहता दर्शाती है। पुर्तगाली इनक्विजिशन के दौरान यहां चाबुक, लोहे की जंजीरें और अन्य यंत्र इस्तेमाल होते थे। संग्रहालय में ऐसी मूर्तियां हैं, जो कैदियों की पीड़ा को जीवंत करती हैं।

3. देशभक्तों की सूची और प्रदर्शनी कक्ष: यहां स्वतंत्रता सेनानियों की सूची प्रदर्शित है, जिसमें उनके चित्र, जीवनी और योगदान हैं। एक बड़े पैनल में कई फ्रीडम फाइटर्स के फोटो चेन से लटके हैं, जो कैद की प्रतीक हैं। इसमें महत्वपूर्ण नेताओं का वर्णन है, जैसे डॉ. राम मनोहर लोहिया, जिन्होंने 1946 में सत्याग्रह शुरू किया।

4. अन्य कक्ष: संग्रहालय में प्री-हिस्टोरिक, पीपल एंड कल्चर, म्यूजिक ऑफ गोवा जैसे सेक्शन हैं। प्री-हिस्टोरिक कक्ष में हीरो स्टोन जैसे प्राचीन अवशेष हैं। पीपल एंड कल्चर में गोवा की जनजातियों और संस्कृति की तस्वीरें हैं।

 महत्वपूर्ण नेताओं का नाम, वर्णन और संक्षिप्त परिचय
अगुआड़ा जेल में कई प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी कैद रहे। यहां कुछ मुख्य नाम और उनका संक्षिप्त परिचय:

- डॉ. राम मनोहर लोहिया: समाजवादी नेता, जिन्होंने 1946 में गोवा में सत्याग्रह शुरू किया। उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाला गया। वे भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख चेहरे थे और गोवा मुक्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

- डॉ. टी.बी. कुन्हा गोवा राष्ट्रवाद के जनक। उन्हें मिलिट्री ट्रिब्यूनल द्वारा दोषी ठहराया गया और छोटे सेल में कैद किया गया। उन्होंने अस्वच्छता की शिकायत की और गोवा की मुक्ति के लिए जीवन समर्पित किया।

- राजशाह उर्फ नारायण बी. महकाले: गोवा किसान संघर्ष समिति के सदस्य। 1959 में गिरफ्तार, पुलिस द्वारा यातनाएं दी गईं। अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

- सुरेश कानेकर: कम्युनिस्ट नेता, जिन्हें पूछताछ और यातनाओं के बाद अगुआड़ा में कैद किया गया।

ये सेनानी गोवा की मुक्ति के लिए पुर्तगालियों से लड़े और जेल में अमानवीय यातनाएं सहीं।

 मूर्तियां और प्रदर्शनियां: चित्रों सहित विवरण
जेल में कई मूर्तियां हैं, जो निहत्थे वीरों की बहादुरी दिखाती हैं। एक मूर्ति में एक कैदी को उल्टा लटकाकर यातना दी जा रही है, जबकि एक सैनिक देख रहा है – यह पुर्तगाली क्रूरता का प्रतीक है। अन्य मूर्तियां में वीर अपने घावों और मृत साथियों को हाथ में लिए दिखाए गए हैं।

उपरोक्त चित्रों का विवरण:
-  "म्यूजिक ऑफ गोवा" पैनल, जहां गोवा की संगीत परंपरा (हिंदू-क्रिश्चियन, ट्रांस म्यूजिक) दिखाई गई है।
- : "पीपल एंड कल्चर" सेक्शन, गोवा के लोगों की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें, जैसे जंगल में आदिवासी।
: "प्री हिस्टोरिक" पैनल, हीरो स्टोन लोलिम का वर्णन और गोवा का मैप।
- : "फ्रीडम फाइटर्स" बोर्ड, कई सेनानियों के चित्र और महकाले का विस्तृत विवरण।
-  "पेजेस ऑफ हिस्ट्री", डॉ. लोहिया का चित्र और सत्याग्रह की कहानी।
- : डॉ. कुन्हा का सेल विवरण, अस्वच्छता की शिकायत।
- : "गोवा: द स्ट्रगल", जेल सेल अब डिजिटल म्यूजियम।
- : यातना मूर्ति, उल्टा लटका कैदी।

यह जगह न केवल इतिहास की याद दिलाती है, बल्कि हमें स्वतंत्रता की कीमत समझाती है। अगर आप गोवा जाएं, तो इस जेल को जरूर देखें – यह एक भावुक और शिक्षाप्रद अनुभव है।
Ram Mohan Rai .
Goa/08.01.2026
#GoaNews

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