●कॉमरेड ए.बी. बर्धन: एक महान कम्युनिस्ट नेता की दसवीं पुण्यतिथि पर स्मरण
●आज 2 जनवरी 2026 है। ठीक दस वर्ष पहले, 2 जनवरी 2016 को भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन के एक स्तंभ, स्वतंत्रता सेनानी, ट्रेड यूनियन नेता और विचारक कॉमरेड अर्धेंदु भूषण बर्धन (ए.बी. बर्धन) हमें छोड़कर चले गए। 91 वर्ष की आयु में दिल्ली के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में उनका निधन हुआ। उनकी मृत्यु पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित अनेक नेताओं ने शोक व्यक्त किया था। बर्धन जी न केवल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के लंबे समय तक महासचिव रहे, बल्कि वे मजदूरों के अधिकारों, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के प्रतीक थे। उनकी दसवीं पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन करते हुए उनके जीवन, संघर्ष और मेरे व्यक्तिगत संबंधों को याद करना चाहता हूं।
●जीवन और संघर्ष की शुरुआत:
ए.बी. बर्धन का जन्म 24 सितंबर 1924 को बांग्लादेश के बारीसाल (तत्कालीन बंगाल प्रेसिडेंसी) में हुआ था। मात्र 15 वर्ष की आयु में नागपुर आकर उन्होंने कम्युनिज्म को अपनाया। नागपुर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और विधि की डिग्री प्राप्त की। 1940 में वे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) से जुड़े और उसी वर्ष प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने। वे नागपुर यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष चुने गए और 1945 में AISF के सचिव बने।
बर्धन जी ने टेक्सटाइल, बिजली, रेलवे और रक्षा क्षेत्र के मजदूरों के साथ काम किया। वे ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) के महासचिव रहे। 1957 में नागपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए, लेकिन बाद के चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। 1990 के दशक में दिल्ली आकर राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुए। 1996 में इंद्रजीत गुप्ता के गृह मंत्री बनने पर वे CPI के महासचिव बने और 2012 तक इस पद पर रहे – यह रिकॉर्ड अवधि थी।
वे गठबंधन राजनीति के कठिन दौर में वामपंथ की आवाज बने रहे। यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (UPA) के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने में सहयोग किया। बर्धन जी अद्भुत वक्ता थे – हिंदी और अंग्रेजी दोनों में अपनी बात को प्रभावी ढंग से रखते थे।
● निर्मला देशपांडे जी (दीदी) से पारिवारिक स्तर का संबंध:
मेरी गुरु मां निर्मला देशपांडे जी (दीदी) से बर्धन जी के घनिष्ठ पारिवारिक संबंध थे। दीदी अक्सर उनके बारे में बताती रहती थीं। निर्मला दीदी (17 अक्टूबर 1929 - 1 मई 2008) गांधीवादी विचारधारा की अनुयायी थीं, जिन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव, महिलाओं और आदिवासियों की सेवा तथा भारत-पाकिस्तान शांति के लिए जीवन समर्पित किया। वे राज्यसभा की मनोनीत सदस्य रहीं और पद्म विभूषण से सम्मानित हुईं।
●हालांकि मेरा बर्धन जी से पहला परिचय दीदी से बहुत पहले हो चुका था। 1975 में नागपुर में AISF के राष्ट्रीय सम्मेलन में वे कॉमरेड भूपेश गुप्ता के साथ मुख्य वक्ता के रूप में आए थे। मैं अध्यक्ष मंडल का सदस्य था और मंच पर बैठा था। दोनों ही वक्ता अद्भुत थे – भूपेश जी अंग्रेजी के धुरंधर और बर्धन जी हिंदी के।
●दीदी के सान्निध्य के बाद मैं कई बार उनके दिल्ली स्थित आवास पर बर्धन जी से मिला। एक बार अखिल भारतीय रचनात्मक समाज (जिसकी संस्थापक दीदी थीं) के राजघाट धरने में वे कॉमरेड डी. राजा के साथ आए थे।
●दीदी के निधन के बाद भी बर्धन जी का हमारी ओर आत्मीय स्नेह बना रहा। एक दिन मैं, वीणा बहन, साथी दीपक और सरदार दया सिंह जी अपॉइंटमेंट लेकर अजय भवन (CPI मुख्यालय, दिल्ली) उनसे मिलने गए। हमने दीदी का एक चित्र भेंट किया और पानीपत (हरियाणा) में 2009 में स्थापित निर्मला देशपांडे संस्थान की जानकारी दी। यह संस्थान दीदी की विरासत को सहेजता है – यहां उनकी किताबें, पुरस्कार, मेडल रखे गए हैं, एक संग्रहालय है, स्ट्रीट चिल्ड्रेन के लिए स्कूल चलता है और सांप्रदायिक सद्भाव तथा महिलाओं के सशक्तिकरण के कार्यक्रम होते हैं।
पहले बर्धन जी को आश्चर्य हुआ कि पानीपत से दीदी का क्या संबंध? लेकिन संस्थान की स्थिति जानकर उन्हें दीदी की स्मृति की किसी हद तक अवहेलना का दुख हुआ और बाद में खुशी कि उनकी विरासत को सहेजकर रखा गया है।
●बर्धन जी के निधन पर मैं उनकी शवयात्रा में शामिल हुआ था।
विरासत जो प्रेरित करती रहेगी:
कॉमरेड बर्धन एक सादा जीवन जीने वाले नेता थे। पत्नी पद्मा (1986 में निधन) के बाद वे अजय भवन के एक छोटे कमरे में रहे। वे देशभक्त, विचारक और मजदूरों के सच्चे हितैषी थे। आज जब देश साम्प्रदायिकता और असमानता से जूझ रहा है, उनकी धर्मनिरपेक्षता और न्याय की लड़ाई की याद और प्रासंगिक है।
●आज उनकी दसवीं पुण्यतिथि पर इस महान स्वतंत्रता सेनानी, कम्युनिस्ट नेता और विचारक को सादर नमन। लाल सलाम, कॉमरेड बर्धन! आपकी स्मृतियां और आदर्श हमें हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।
Ram Mohan Rai.
Mumbai, 02.01.2026
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