तुषार गांधी से दोस्ती. एक मुलाकात(Mumbai/03.01.2026)
भारत की आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी का नाम एक अमर प्रेरणा स्रोत है। उनकी विचारधारा, अहिंसा, सत्याग्रह और राष्ट्रीय एकता के सिद्धांत आज भी हमें दिशा दिखाते हैं। हाल ही में, मैंने महात्मा गांधी के पौत्र तुषार गांधी से मुलाकात की, जो उनकी चौथी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं। यह मेरी उनसे दूसरी मुलाकात थी, लेकिन मैं उनकी निर्भीकता और बेबाक विचारों की वजह से कई वर्षों से उन्हें जानता हूं। तुषार गांधी से दोस्ती का मतलब है महात्मा गांधी के वंशज, उनके विचारों और कार्यों से दोस्ती। इस मुलाकात ने मुझे न केवल गांधी परिवार की गहराई से परिचित कराया, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सद्भाव की दिशा में नए संवाद की संभावनाएं भी खोलीं।
● तुषार गांधी: गांधी परिवार की चौथी पीढ़ी:
तुषार गांधी महात्मा गांधी के प्रपौत्र हैं। वे बापू की चौथी पीढ़ी से ताल्लुक रखते हैं। महात्मा गांधी के चार पुत्र थे: हरिलाल, मणिलाल, रामदास और देवदास। तुषार गांधी ,मणि लाल गांधी के पौत्र हैं। मणि लाल गांधी ने अरुण गांधी को जन्म दिया, और अरुण गांधी के पुत्र हैं तुषार गांधी। इस प्रकार, वे सीधे तौर पर गांधी परिवार की उस शाखा से जुड़े हैं जो बापू की विचारधारा को जीवंत रखने में सक्रिय रही है।
गांधी परिवार का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ा है। महात्मा गांधी ने न केवल भारत को आजादी दिलाई, बल्कि अपने परिवार को भी सामाजिक सेवा और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी। उनके पिता अरुण गांधी भी गांधीवादी विचारों के अनुयायी थे। तुषार गांधी खुद एक लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता और गांधीवादी विचारक हैं। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें 'Let us Kill Gandhi', तथा 'The Lost Diary of Kastur, My Ba' प्रमुख है, जो महात्मा गांधी की हत्या के पीछे की साजिशों पर प्रकाश डालती है। तुषार गांधी, गांधी जी के सिद्धांतों को आधुनिक संदर्भ में लागू करने के लिए प्रयासरत हैं, खासकर साम्प्रदायिक सद्भाव और अहिंसा के क्षेत्र में।
● निर्भीकता और बेबाक विचार: तुषार गांधी की पहचान
मैं तुषार गांधी को कई वर्षों से उनकी निर्भीकता और बेबाक विचारों के लिए जानता हूं। वे सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलते हैं, चाहे वह साम्प्रदायिकता हो, जातिवाद हो या राजनीतिक भ्रष्टाचार। वे सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर अपनी राय रखते हैं, जो अक्सर विवादास्पद लेकिन सच्चाई पर आधारित होती है। उनकी यह निर्भीकता गांधी जी की विरासत से आती है, जहां सत्य को कभी छिपाया नहीं जाता। वे पूरे देश में राष्ट्रीय एकता, सद्भाव और मैत्री के लिए व्यापक जन-संपर्क करना चाहते हैं। उनका मानना है कि आज के भारत में विभाजनकारी ताकतें मजबूत हो रही हैं, और ऐसे में गांधीवादी मूल्यों को फिर से जीवंत करने की जरूरत है। वे कहते हैं कि हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या क्षेत्र से हो, राष्ट्रीय एकता के लिए योगदान दे सकता है। इस दिशा में, वे विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों से संपर्क करते हैं, और ऐसे हर कार्य में हम सभी के सहयोगी और साथी बनने को तैयार हैं।
●हमारी सहमतियां: गांधी से दोस्ती और पूरक विचारधारा:
हमारी मुलाकात में दो प्रमुख सूत्रों पर सहमति हुई, जो हमारी साझा विचारधारा को दर्शाते हैं। पहला, महात्मा गांधी से दोस्ती। इसका मतलब है बापू के सिद्धांतों को न केवल पढ़ना, बल्कि जीवन में अपनाना। गांधी जी की अहिंसा, सत्य और स्वराज की अवधारणा आज भी प्रासंगिक है। हम दोनों मानते हैं कि गांधी से दोस्ती का अर्थ है उनके मूल्यों को आधुनिक चुनौतियों से जोड़ना, जैसे पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय।
●दूसरा सूत्र है कि गांधी और भगत सिंह एक दूसरे के पूरक हैं। अक्सर इतिहास में गांधी जी को अहिंसक और भगत सिंह को हिंसक क्रांतिकारी के रूप में देखा जाता है, लेकिन दोनों की विचारधाराएं एक सिक्के के दो पहलू हैं और इस मायने में वे दोनों ही क्रांतिकारी है. गांधी जी ने अहिंसा के माध्यम से आजादी की लड़ाई लड़ी, जबकि भगत सिंह ने बलिदान और क्रांति के जरिए। तुषार गांधी का मानना है कि दोनों ने एक ही लक्ष्य – स्वतंत्र भारत – के लिए कार्य किया, और उनकी पूरकता को समझना आज के युवाओं के लिए जरूरी है। यह सहमति हमें एकजुट करती है कि इतिहास को विभाजित न करके, उसे एकता के सूत्र में पिरोया जाए।
Global Youth Festival: युवाओं में गांधी विचारों की भूख :
मुलाकात के दौरान, मैंने तुषार गांधी को पानीपत में सम्पन्न हुए Global Youth Festival के बारे में जानकारी दी। यह एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन है जो युवाओं को विभिन्न संस्कृतियों, विचारधाराओं और वैश्विक मुद्दों से जोड़ता है। वे इस जानकारी से बेहद संतुष्ट हुए। मैंने इससे उपजे दो प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया। पहला, बापू के जीवन और विचारों में युवाओं की भूख है। आज के युवा सोशल मीडिया और वैश्वीकरण के दौर में हैं, लेकिन वे गांधी जी की सादगी, नैतिकता और नेतृत्व से प्रेरित होना चाहते हैं। Global Youth Festival जैसे मंच इस भूख को शांत करने में मदद कर सकते हैं, जहां गांधीवादी कार्यशालाएं, संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान हो सकते हैं।
दूसरा बिंदु, यदि लोगों को यकीन हो जाए कि आप ईमानदार और निष्ठावान हैं, तो सामान्य जनता संसाधनों की कमी नहीं होने देती। तुषार गांधी ने उदाहरण दिए कि गांधी जी के आंदोलनों में भी जनता ने स्वेच्छा से योगदान दिया, क्योंकि वे उनकी ईमानदारी पर विश्वास करती थी। Global Youth Festival के संदर्भ में, उन्होंने कहा कि यदि आयोजक निष्ठावान रहें, तो युवा, समुदाय और दानदाता संसाधन जुटाने में सहयोग करेंगे। यह आयोजन न केवल गांधी विचारों को फैलाएगा, बल्कि वैश्विक मैत्री को मजबूत करेगा।
●भविष्य की दिशा: कला, संस्कृति और संवाद के माध्यम से कार्य:
हमने निश्चय किया कि भविष्य में विचारधारा के स्तर पर कला, संस्कृति और संवाद के जरिए काम करेंगे। तुषार गांधी का मानना है कि किताबें, फिल्में, थिएटर और संगीत जैसे माध्यम गांधी विचारों को युवाओं तक पहुंचाने में प्रभावी हैं। हम संयुक्त रूप से कार्यशालाएं, वेबिनार और सांस्कृतिक उत्सव आयोजित करने पर सहमत हुए। यह कार्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगा और गांधी-भगत सिंह की पूरकता को जन-जन तक पहुंचाएगा। हम सभी को आमंत्रित करते हैं कि इस यात्रा में शामिल हों, क्योंकि राष्ट्रीय सद्भाव एक सामूहिक प्रयास है।
●एक साझा प्रतिबद्धता
तुषार गांधी से यह मुलाकात न केवल व्यक्तिगत स्तर पर प्रेरणादायक थी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक नई शुरुआत की तरह लगी। महात्मा गांधी की विरासत को जीवंत रखना हम सभी का दायित्व है। उनकी चौथी पीढ़ी के इस प्रतिनिधि से दोस्ती ने मुझे आश्वस्त किया कि बापू के विचार कभी पुराने नहीं होंगे। हम सभी को राष्ट्रीय एकता, सद्भाव और मैत्री के लिए आगे आना चाहिए। यदि हम ईमानदार और निष्ठावान रहें, तो कोई कमी नहीं रहेगी। आइए, गांधी से दोस्ती करें और एक मजबूत भारत का निर्माण करें।
Ram Mohan Rai,
Mumbai,
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