गोवा में Peaceful Society (शांतिपूर्ण सोसाइटी): गांधीवादी विचारों का एक जीवंत केंद्र
गोवा में Peaceful Society (शांतिपूर्ण सोसाइटी): गांधीवादी विचारों का एक जीवंत केंद्र
गोवा, भारत का एक छोटा सा राज्य, अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध इतिहास और विविध सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यह राज्य पश्चिमी तट पर स्थित है और पुर्तगाली उपनिवेशवाद की छाप आज भी यहां की वास्तुकला, भोजन और जीवनशैली में दिखाई देती है। गोवा का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा है, जहां आर्यन प्रवास (लगभग 2400 ईसा पूर्व) और सुमेरियन प्रभाव के निशान मिलते हैं, जबकि मूल आदिवासी समुदाय पहाड़ों में बस गए थे। 451 वर्षों तक पुर्तगाली शासन के बाद 1961 में गोवा भारत का हिस्सा बना। आज गोवा पर्यटन का प्रमुख केंद्र है, जहां सफेद रेतीले समुद्र तट, जीवंत नाइटलाइफ, धार्मिक स्थल जैसे बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस और श्री मंगेश मंदिर, साथ ही वन्यजीव अभयारण्य और इको-टूरिज्म आकर्षण का केंद्र हैं। यहां की संस्कृति भारतीय और यूरोपीय तत्वों का मिश्रण है, जिसमें फेनि , गोवन संगीत, कार्निवल उत्सव और समुद्री भोजन की विशेषता है। गोवा की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का बड़ा योगदान है, जो देश-विदेश से लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है, लेकिन यह राज्य पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर भी जोर देता है।
उत्तरी गोवा में स्थित शांतिपूर्ण सोसाइटी (Peaceful Society) एक ऐसा स्थान है जो गोवा की पर्यटन छवि से परे, गांधीवादी मूल्यों और अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित है। यह एक गांधीवादी स्वैच्छिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1983 में हुई थी, हालांकि औपचारिक पंजीकरण मार्च 1983 में पूरा हुआ। गोवा के प्रमुख समाजसेवी स्वर्गीय श्री माधव बिर द्वारा स्थापित इस संगठन का उद्देश्य सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और गांधीवादी विचारों को बढ़ावा देना है। 1984 से सक्रिय यह केंद्र गांधीजी के सर्वोदय, अहिंसा और रचनात्मक कार्यों से प्रेरित है। यहां की गतिविधियां विविध हैं, जैसे गोवा की जैव-विविधता पर राज्य स्तरीय कार्यशालाएं, स्वराज की स्थापना और उसकी गतिविधियां (1996 से 2011 तक), साथ ही गांधीवादी विचारों का उत्सव जैसे कार्यक्रम। यह केंद्र सरकारी अनुदान पर निर्भर नहीं है और स्वयं के संसाधनों से चलता है। लगभग 5 एकड़ भूमि पर फैला यह स्थान फलों के पेड़ों (काजू, काली मिर्च, तेज पत्ता, जायफल, आम, चीकू, सफेद जामुन आदि), फूलों, प्राकृतिक संपदा और मित्र जानवरों से भरा है, जो अहिंसा का माहौल बनाता है। यह गांधीवादी साधकों, कार्यकर्ताओं और विचारकों के लिए रुकने, साधना, पढ़ने-लिखने का आदर्श स्थान है। यहां आने वाले स्वयं अपना भोजन बनाते हैं, खाते हैं और श्रद्धानुसार आर्थिक सहयोग देते हैं। रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट से परिवहन सुविधा उपलब्ध है, लेकिन इसे स्वयं व्यवस्थित करना पड़ता है।
आज हम उत्तरी गोवा में शांतिपूर्ण सोसाइटी में श्री कला नंद मणि जी के सान्निध्य में हैं। इत्तिफाक से कल उनका जन्मदिन है। हमारी मुलाकात एक वर्ष पूर्व कश्मीर में हुई थी, हालांकि परिचय पुराना है। वे गांधी, सर्वोदय और रचनात्मक कार्यों के प्रति जीवन दानी हैं और अब गोवा में अपने परिवार सहित रहते हैं। विनोबा जी से प्रभावित होकर उन्होंने जीवन दान किया, जेपी आंदोलन में सक्रिय भाग लिया और दीदी निर्मला देशपांडे जी के अत्यंत प्रिय साथियों में रहे। वे एक लेखक और रचनाकार भी हैं। शांतिपूर्ण सोसाइटी गांधी विचारों का अद्भुत प्राकृतिक केंद्र है, जहां अहिंसा का वातावरण सबको निर्भीक बनाकर जोड़े रखता है। मौसम में यहां के वृक्ष फलों से लदे रहते हैं। गोवा पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन हमारा देश विविधताओं से भरा है। उत्तर में आजकल भयानक सर्दी है और कई इलाकों में प्रदूषण की स्थिति, जिससे सुविधासंपन्न लोग मुंबई, गोवा या दक्षिण की ओर प्रस्थान कर जाते हैं। शांतिपूर्ण सोसाइटी कोई होटल नहीं है, बल्कि गांधीवादी साधकों के लिए एक उपयुक्त स्थान है। हम यहां लगभग तीन घंटे रुके, लेकिन मन में विचार आया कि महंगे होटल की जगह यहीं रुकना चाहिए था – आम के आम, गुठलियों के दाम। आनंदपूर्वक हरि भजन। आजकल यहां जनादेश के संपादक श्री अंबरीश कुमार एक महीने रुककर अपनी यूट्यूब चैनल की प्रसारण यहीं से कर रहे हैं। सोसाइटी के अधीक्षक श्री कनीक लाल जी का भी आभार कि उन्होंने पूरे स्थान, कार्यों और व्यवस्था की जानकारी दी और उनकी पत्नि ने सुस्वादु लंच करवाया I
आप भी कुछ दिन यहां गुजारें। आभार श्री कला नंद मणि जी। जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं!
Ram Mohan Rai,
Peaceful Society, Goa.
Comments
Post a Comment