गोवा की समुद्री यात्रा: डॉल्फिन्स के साथ एक रोमांचक भेंट और पर्यावरण की चिंता /08.01.2026
गोवा की समुद्री यात्रा: डॉल्फिन्स के साथ एक रोमांचक भेंट और पर्यावरण की चिंता
गोवा, भारत का वह स्वर्गीय प्रदेश जहां नीला समुद्र, सुनहरी रेत और हरी-भरी पहाड़ियां मिलकर एक जादुई दुनिया रचती हैं। आजकल हम अपने परिवार के साथ गोवा की यात्रा पर हैं, और उसमें से एक अनुभव ऐसा था जो मेरे मन में हमेशा के लिए बस गया। हम कैंडोलिम बीच पर थे, जहां अरब सागर की लहरें हमें बुला रही थीं। हमने फैसला किया कि समुद्र में गहराई तक जाकर डॉल्फिन्स को देखेंगे। यह यात्रा वृतांत उसी रोमांचक सफर का बयान है, जो खुशी और चिंता दोनों से भरा था।
दोपहर का समय था, सूरज की किरणें समुद्र पर चमक रही थीं। हमने एक फेरी किराए पर ली और समुद्र की ओर रवाना हो गए। फेरी का नाम 'कैंडलम' था, जो कैंडोलिम के नाम से प्रेरित लगता था। जैसे-जैसे हम तट से दूर जाते, हवा में नमकीन खुशबू और लहरों की सनसनाहट बढ़ती जाती। चारों ओर नीला पानी, और दूर-दूर तक कोई सीमा नहीं। हम उत्साह से भरे थे, कैमरे तैयार, आंखें डॉल्फिन्स की तलाश में। गोवा में डॉल्फिन वॉचिंग एक लोकप्रिय पर्यटन गतिविधि है, और उस दिन समुद्र में फेरियों का हुजूम था। हर फेरी पर पर्यटक उमड़ पड़े थे, सभी एक ही मकसद से – डॉल्फिन्स की एक झलक पाने के लिए।
अचानक, कहीं से आवाज आई, "वह देखो, डॉल्फिन!" और फिर क्या था – सभी फेरियां शोर मचाती हुईं उस दिशा में दौड़ पड़ीं। इंजनों की गर्जना, पर्यटकों की चीख-पुकार, और लहरों का संघर्ष – सब मिलकर एक रोमांचक दृश्य बना। हमारी फेरी भी तेजी से आगे बढ़ी, और वहां पहुंचकर हमने देखा: चांदी जैसे चमकते डॉल्फिन्स का झुंड पानी से उछल-उछलकर खेल रहा था। उनकी चाल इतनी सुंदर थी, मानो समुद्र की लहरों पर नाच रही हों। हम सब मंत्रमुग्ध हो गए। कैमरे क्लिक करने लगे, वीडियो बनने लगे, और हर कोई अपनी खुशी में डूबा था। डॉल्फिन्स कभी पानी से बाहर कूदतीं, कभी गहराई में गायब हो जातीं। यह दृश्य देखकर लगता था जैसे हम किसी जादुई दुनिया में पहुंच गए हों।
लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, रोमांच के साथ एक अजीब सी चिंता भी मन में घर करने लगी। डॉल्फिन्स इधर-उधर भाग रही थीं, और पर्यटक उनकी पीछा कर रहे थे। फेरियां उन्हें घेरने की कोशिश करतीं, शोर से उन्हें डरातीं, सिर्फ अपनी तस्वीरें और वीडियो के लिए। यह हमारे लिए मनोरंजन था, लेकिन क्या हम समुद्री जीवों की स्वायत्तता का अतिक्रमण नहीं कर रहे थे? डॉल्फिन्स जैसे बुद्धिमान और संवेदनशील प्राणी, जो समुद्र में स्वतंत्र घूमते हैं, क्या वे इस शोर और पीछा से डर नहीं जाते? मुझे लगा, यह वैसा ही है जैसे पर्वतीय तीर्थयात्राओं में हेलीकॉप्टरों का भयानक शोर जंगली जानवरों और पक्षियों को डराता है, या दक्षिण भारत के उत्सवों में बैलों की आपसी लड़ाई को देखकर लोग आनंद लेते हैं।
मेरे एक मित्र, जो पर्यावरण प्रेमी हैं, ने बताया कि जब से हेलीकॉप्टर तीर्थयात्राएं शुरू हुईं और कच्चे पहाड़ों पर नेशनल हाईवे बने हैं, तब से वन्यजीवों का जीवन संकट में पड़ गया है। जंगलों में शोर, निर्माण और मानवीय हस्तक्षेप से जानवरों का निवास छिन रहा है। ठीक वैसी ही स्थिति समुद्री जीवों की है। गोवा जैसे पर्यटन स्थलों में डॉल्फिन वॉचिंग बढ़ने से समुद्री पारिस्थितिकी प्रभावित हो रही है। फेरियों का शोर, प्रदूषण और लगातार पीछा – ये सब डॉल्फिन्स के व्यवहार को बदल रहे हैं। वे तनावग्रस्त हो जाते हैं, उनका प्रजनन प्रभावित होता है, और कभी-कभी वे अपने प्राकृतिक मार्ग से भटक जाते हैं।
वापसी की फेरी पर बैठे हुए मैं सोच रहा था – पर्यटन कितना महत्वपूर्ण है, लेकिन क्या हम जिम्मेदार पर्यटन की ओर बढ़ रहे हैं? गोवा की यह यात्रा मुझे सिखा गई कि प्रकृति का आनंद लें, लेकिन उसे बाधित न करें। अगली बार जब मैं समुद्र में जाऊंगा, तो दूर से ही डॉल्फिन्स को देखूंगा, बिना उन्हें परेशान किए। गोवा ने मुझे समुद्र की सुंदरता दिखाई, लेकिन साथ ही पर्यावरण संरक्षण की याद भी दिलाई। अगर आप भी गोवा जा रहे हैं, तो याद रखें: प्रकृति का सम्मान करें, तभी उसका असली सुख मिलेगा।
Ram Mohan Rai,
Candolim Beach, Goa.
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