● भारत की गुट निरपेक्ष नीति: हमारी ताकत और चुनौतियां / 12.02.2026

● भारत की गुट निरपेक्ष नीति: हमारी ताकत और चुनौतियां

भारत की विदेश नीति हमेशा से गुट निरपेक्षता और शांति पर आधारित रही है। यह नीति न केवल हमारी ताकत बनी है, बल्कि हमें वैश्विक मंच पर एक मजबूत और स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। हम कभी दबाव में नहीं आए, न झुके और न ही कभी अपने राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध कोई समझौता किया। यह नीति हमें उन चुनौतियों से बचाती रही है जो अन्य राष्ट्रों को गुलामी या संघर्ष की ओर धकेलती हैं। लेकिन आज के दौर में, जब हमारे पड़ोसी देशों में युद्धप्रिय ताकतें सत्ता में हैं, तो क्या हम फिर से अकेले पड़ गए हैं? क्या हमें अपनी इस नीति को और मजबूत बनाना चाहिए या बेबस होकर देखते रहना चाहिए?

 ●ऐतिहासिक संदर्भ: घेराबंदी की साजिश और हमारी विजय
एक समय था जब भारत को भौगोलिक स्तर पर घेरने की योजनाएं बनाई जा रही थीं। एक ओर विस्तारवादी चीन था, जिसकी आक्रामक नीतियां हमारे सीमाओं को चुनौती दे रही थीं। दूसरी ओर पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देश थे, जहां अस्थिरता और बाहरी हस्तक्षेप आम थे। यहां तक कि समुद्र में एक छोटे से द्वीप डिएगो गार्सिया पर भी हमारे दुश्मन तैनात थे, जो रणनीतिक रूप से हमें कमजोर करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन समय बदला और हमारी गुट निरपेक्ष नीति के कारण चीन का रुख भी बदला। हमने कभी किसी गुट में शामिल होकर अपनी स्वतंत्रता को जोखिम में नहीं डाला।

उस दौर में, दक्षिण एशिया में मैत्रीपूर्ण संबंधों का एक मजबूत ढांचा उभरा। बांग्लादेश में शेख मुजीबुर रहमान, पाकिस्तान में जुल्फिकार अली भुट्टो और श्रीलंका में सिरीमावो बंदरनायके जैसे नेता थे, जिन्होंने क्षेत्रीय एकता को मजबूत किया। हम एक सशक्त दक्षिण एशिया के रूप में उभरे, जहां सहयोग और शांति का बोलबाला था। लेकिन दुश्मनों को यह पसंद नहीं आया। एक के बाद एक इन नेताओं की हत्या हुई—शेख मुजीब, भुट्टो, बंदरनायके—और अंत में निशाना बना भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का। ये हत्याएं संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा लगती हैं, जो क्षेत्रीय एकता को तोड़ने के लिए की गईं।

● वर्तमान चुनौतियां: अकेलापन और ब्लैकमेल की साजिशें
आज फिर वही हालात दोहराए जा रहे हैं। हमारे सभी पड़ोसी देशों में युद्धप्रिय ताकतों की हुकूमत है। चीन की आक्रामकता बढ़ रही है, पाकिस्तान में अस्थिरता है, और अन्य पड़ोसी देशों में भी ऐसी सरकारें हैं जो शांति के बजाय संघर्ष को बढ़ावा देती हैं। हम फिर से अकेले दिखाई दे रहे हैं। लेकिन यह समय झुकने का नहीं, बल्कि और अधिक मजबूती से खड़े होने का है। दुर्भाग्य से, हम बेबस नजर आ रहे हैं। क्या एपस्टीन फाइल जैसी चीजें ब्लैकमेल का एक नापाक हथियार बन गई हैं? हम इससे क्यों डरें? यह फाइलें या ऐसी कोई भी साजिश हमें अपनी नीति से विचलित नहीं कर सकतीं। देश संकट में है, और ऐसे समय में सभी देशभक्त लोगों को एकजुट होकर खड़े होने की जरूरत है।

● आगे का रास्ता: मजबूत शांति और गुट निरपेक्ष आंदोलन
हमें चाहिए एक मजबूत शांति, अहिंसा और निरस्त्रीकरण पर आधारित गुट निरपेक्ष आंदोलन, जिसका नेतृत्व भारत खुद करे। यह वास्तविक विश्व मित्र का सपना है, न कि कथित 'विश्व गुरु' का आडंबर। गुट निरपेक्षता का मतलब कमजोरी नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और ताकत है। हमें अपनी विदेश नीति को और मजबूत बनाना चाहिए, जहां हम किसी गुट में शामिल होकर अपनी संप्रभुता को जोखिम में न डालें। दक्षिण एशिया में फिर से मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा दें, वैश्विक मंच पर शांति की वकालत करें और किसी भी दबाव या ब्लैकमेल से मुक्त रहें।

●यह समय है कि हम अपनी जड़ों को याद करें—महात्मा गांधी की अहिंसा, जवाहरलाल नेहरू की गुट निरपेक्षता—और उन्हें आधुनिक संदर्भ में लागू करें। केवल तभी हम सच्चे अर्थों में विश्व शांति के वाहक बन सकेंगे। देशभक्तों, उठो और एकजुट हो! भारत की ताकत उसकी शांति में है, न कि किसी गुट की गुलामी में।
Ram Mohan Rai.
Nityanootan.blogspot.com. 
12.02.2026

Comments

Popular posts from this blog

Global Youth Festival, 4th day ,Panipat/05.10.2025. Sant Nirankari Mission/National Youth Project/Gandhi Global Family

पानीपत की बहादुर बेटी सैयदा- जो ना थकी और ना झुकी :

Global Youth Festival, Panipat, .Some glimpses of 3rd day./04.10.2025. National Youth Project, Gandhi Global Family, Sant Nirankari Mission