निरंकारी विवाह पद्धति- हमारा प्रत्यक्ष अनुभव

अपने पारिवारिक निरंकारी मित्र की पुत्री के विवाह समारोह में मुझे निरंकारी पद्धति से संपन्न होने वाले इस पवित्र संस्कार को निकट से समझने और अनुभव करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह समारोह इतना सरल, सहज और आध्यात्मिक रूप से प्रेरणादायक था कि मन को गहन शांति और आनंद की अनुभूति हुई। समस्त अनुष्ठान मात्र १५ से २० मिनट में पूर्ण हो गए, जिसमें कोई अनावश्यक औपचारिकताएं या दिखावा नहीं था, बल्कि हर क्षण निरंकार की भक्ति और परस्पर सम्मान की भावना से ओतप्रोत था।

वर और वधू ने सर्वप्रथम एक-दूसरे को जयमाला अर्पित की। इस दौरान उन्होंने "धन निरंकार" का उच्चारण करते हुए एक-दूसरे को साष्टांग प्रणाम किया और चरण स्पर्श कर अभिवादन किया। यह दृश्य इतना पवित्र और भावपूर्ण था, मानो दोनों आत्माएं निरंकार के समक्ष अपनी निष्ठा और समर्पण व्यक्त कर रही हों। तत्पश्चात, स्थानीय संयोजक दंपति ने उन्हें संयुक्त रूप से पुष्पमाला पहनाई, जो उनके जीवनसाथी बनने की प्रतीक थी – एक ऐसा बंधन जो न केवल शारीरिक, अपितु आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है।

फिर, अवतार वाणी के चार चुने हुए पदों का पाठ हुआ, जो गृहस्थ जीवन को व्यवस्थित, सुखमय और सामंजस्यपूर्ण बनाने की दिव्य सीख प्रदान करते हैं। इन पदों में एक-दूसरे के प्रति सम्मान, सहयोग और निरंकार की याद में जीवन व्यतीत करने का परामर्श दिया गया है। ( निरंकारी साहित्य में ये पद गृहस्थ जीवन की मर्यादाओं और आनंद पर केंद्रित हैं, जैसे कि परिवार को माया से ऊपर उठाकर निरंकार में स्थापित करना।) इन पदों के माध्यम से संदेश था कि विवाह मात्र दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, अपितु दो आत्माओं का निरंकार में विलय है, जहां हर निर्णय भक्ति से प्रेरित हो।

मंच पर विराजमान एक प्रमुख निरंकारी व्यक्तित्व ने नवदंपति पर पुष्पवर्षा की, जो आशीर्वाद का प्रतीक थी। साथ ही, समस्त उपस्थित साध-संगत ने भी उत्साहपूर्वक पुष्पवर्षा कर उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस क्षण में वातावरण इतना उल्लासमय और दिव्य था कि लगता था, स्वयं निरंकार अपनी कृपा बरसा रहा हो। अनेक गायक मंडलियों ने मंगल गीत और बधाई के भजन गाए, जिनमें निरंकार की महिमा और नवजीवन की खुशियां गुंजायमान थीं। इन गीतों ने समारोह को और अधिक उत्सवपूर्ण बना दिया।

यह निरंकारी विवाह पद्धति वास्तव में अनुकरणीय है – सरलता की मिसाल, जहां कोई व्यर्थ का खर्च या जटिल रस्में नहीं, बल्कि केवल निरंकार की भक्ति और मानवीय मूल्यों का उत्सव है। यह हमें सिखाती है कि सच्चा विवाह जीवन की यात्रा को आध्यात्मिक प्रकाश से रोशन करने का माध्यम है, जहां पति-पत्नी एक-दूसरे के पूरक बनकर निरंकार की सेवा में तत्पर रहें। ऐसे समारोह से प्रेरित होकर मन में यही भाव उमड़ता है कि जीवन की हर रस्म को इसी सहजता और पवित्रता से संपन्न किया जाए। 
Ram Mohan Rai, 
Panipat /06.02.2026

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