एपस्टीन फाइल का उजागर होना: भारत में भी असर, लेकिन सच्चाई कहां?
एपस्टीन फाइल का उजागर होना: भारत में भी असर, लेकिन सच्चाई कहां?
हाल ही में एपस्टीन फाइल के उजागर होने का असर अब हमारे देश भारत में भी दिखने लगा है। बेशक, हमारे राजनेताओं के इसमें शामिल होने के कोई ठोस प्रमाण अभी तक सामने नहीं आए हैं, लेकिन उससे पहले ही रक्षात्मक आरोप-प्रत्यारोप की आहट सुनाई देने लगी है। निशाने पर हर बार की तरह पुराने आरोपी पंडित नेहरू, अटल बिहारी वाजपेयी और नाना जी देशमुख हैं। कुछ चित्रों को उनसे जोड़ा जा रहा है, हालांकि ये चित्र कुछ भी साबित नहीं करते। लेकिन भारतीय जनसंघ के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर बलराज मधोक की पुस्तक बहुत कुछ बाद में प्रमाणित तथ्यों को उजागर करती है। ये किताब व्यक्तिगत चरित्र को निरूपित करती है, लेकिन राजनीति में व्यक्तिगत जीवन कुछ मायने नहीं रखता।
अपने नेताओं का बचाव करते हुए लोग भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को अपनी नजीर बनाते हैं, लेकिन वह कोरा झूठ और कल्पना है। भगवान कृष्ण तो आप्त पुरुष थे, अर्थात जिन्होंने जिंदगी भर कोई पाप नहीं किया। फिर उनका इन चरित्रहीन नेताओं से कोई तुलना कैसे हो सकती है? यह सब बचाव की कोशिशें हैं, लेकिन सच्चाई से मुंह मोड़ना आसान नहीं।
आज की चुनावी राजनीति पूंजी और पैसे वालों की खेल बन गई है, जिसमें आम आदमी तो भाग लेने की सोच भी नहीं सकता। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों ही पूंजीपतियों के भोंपू बन चुके हैं। फिर कौन से लोकतंत्र की बात हो रही है? मेरे जैसे व्यक्ति ने तो अब अखबार पढ़ना और टीवी पर समाचार सुनना ही छोड़ दिया है। सब की सब नियोजित हैं, हर तरफ पक्षपात। महात्मा गांधी के सपनों के भारत की ऐसी दुर्दशा देखकर असहनीय दर्द होता है। क्या यही वह भारत है जिसके लिए उन्होंने जीवन कुर्बान किया? समय आ गया है कि हम सच्चाई की तलाश करें, न कि झूठे बचाव में उलझें।
Ram Mohan Rai.
11.02. 2026
Comments
Post a Comment