प्रेरणा के स्रोत: प्रिंसिपल लाभ सिंह जी
प्रेरणा के स्रोत: प्रिंसिपल लाभ सिंह जी
कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनकी उपस्थिति मात्र से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हमारे आदरणीय प्रिंसिपल लाभ सिंह जी ऐसे ही व्यक्तित्वों में से एक हैं। वे मेरे अध्यापक रहे हैं और मुझे उनके छात्र होने का गर्व है। अर्थशास्त्र के लोकप्रिय शिक्षक के रूप में उन्होंने हजारों विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। बाद में वे आर्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पानीपत के उप-प्रधानाचार्य और फिर प्रधानाचार्य बने। उनके कार्यकाल में विद्यालय ने निरंतर प्रगति की और हाई स्कूल से सीनियर सेकेंडरी विद्यालय के रूप में विकसित हुआ।
लाभ सिंह जी केवल एक शिक्षक या प्रशासक ही नहीं थे, बल्कि अनुशासन, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व के जीवंत उदाहरण रहे हैं। वे एनसीसी और एनएसएस के प्रभारी भी रहे। उनकी कार्यशैली एक सैनिक के समान अनुशासित और दृढ़ थी। साथ ही वे आर्य समाज की गतिविधियों में गहरी रुचि रखते थे तथा अनेक बार आर्य प्रतिनिधि सभा और आर्य विद्या परिषद के महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
हाल ही में उनका हमारे घर आगमन हुआ। वे हमें अपना आशीर्वाद देने आए थे। उनकी उपस्थिति ने हमें अत्यंत प्रसन्नता और आत्मीयता का अनुभव कराया। यह देखकर आश्चर्य और प्रसन्नता दोनों हुई कि 94 वर्ष की आयु में भी वे शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सजग और वैचारिक रूप से अत्यंत स्पष्ट हैं। वे बिना किसी सहारे के चलते हैं, अपने सभी कार्य स्वयं करते हैं और जीवन के प्रति उनका उत्साह आज भी युवाओं जैसा है।
आज जब अधिकांश लोग मधुमेह, हृदय रोग अथवा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, तब लाभ सिंह जी का सक्रिय और स्वस्थ जीवन प्रेरणा देता है। उनकी जीवनशैली की सहजता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि वे आज भी हरियाणा की पारंपरिक मीठी चाय का आनंद लेते हैं। यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि संतुलित और सकारात्मक जीवन दृष्टि का भी प्रमाण है।
उनकी उपलब्धियाँ विद्यालय प्रशासन तक सीमित नहीं हैं। अपने पैतृक गाँव में वे एक चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से विद्यालय संचालित कर रहे हैं, जहाँ समाज के वंचित और उपेक्षित वर्ग के बच्चों को न्यूनतम खर्च पर शिक्षा प्रदान की जाती है। उनके संरक्षण और प्रेरणा से वहाँ चौधरी देवीलाल कॉलेज की स्थापना भी संभव हुई। इस प्रकार वे शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर योगदान दे रहे हैं। वे हरियाणा शिक्षा बोर्ड, पंजाब यूनिवर्सिटी की एक समिति के सदस्य समेत अनेक संस्थाओं के भी सम्मानित सदस्य रहे और अनेक पुरस्कारों से नवाजे गए.
लाभ सिंह जी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता उनका मधुर स्वभाव, मिलनसारिता और सभी के प्रति स्नेहभाव है। वे जिनसे भी मिलते हैं, उन्हें अपना बना लेते हैं। उनकी धर्मपत्नी भी लगभग 90 वर्ष की आयु में स्वस्थ और सक्रिय हैं। यह जानकर हर्ष होता है कि दोनों पति-पत्नी अपने गाँव में स्वावलंबी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उनके पुत्र-पुत्रियाँ देश-विदेश में उच्च पदों पर हैं, फिर भी उन्होंने अपनी जड़ों से जुड़े रहना और आत्मनिर्भर जीवन जीना चुना है।
आज के मध्यवर्गीय भारतीय परिवारों में बच्चों का शिक्षा और रोजगार के लिए दूर-दराज़ अथवा विदेशों में बसना स्वाभाविक है। यह उनके विकास और अवसरों के लिए आवश्यक भी है। किंतु माता-पिता यदि स्वस्थ, मानसिक रूप से सक्रिय और सामाजिक कार्यों में संलग्न रहें, तो वे अपने परिवेश में रहकर भी संतुष्ट और सार्थक जीवन जी सकते हैं। लाभ सिंह जी का जीवन इस सत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मुझे केवल उनका विद्यार्थी बनने का ही नहीं, बल्कि उनके संरक्षण में कार्य करने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनके नेतृत्व में मैंने पानीपत की विभिन्न आर्य शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधन में कार्य किया। बाद में उनके पश्चात आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा में विभिन्न दायित्व निभाने का अवसर मिला। स्वामी अग्निवेश, स्वामी इन्द्रवेश और स्वामी आर्यवेश जैसे समाज सुधारकों के प्रति उनकी निष्ठा और सम्मान उनके चरित्र की उच्चता को दर्शाते हैं।
उनका जीवन हमें यह भी सिखाता है कि पद और प्रतिष्ठा स्थायी नहीं होते, किंतु मानवीय संबंध और सामाजिक व्यवहार सदैव बने रहने चाहिए। दुर्भाग्यवश आज ऐसे आत्मीय संबंधों में कमी दिखाई देती है। लाभ सिंह जी से मिलकर बार-बार यह विचार मन में आता है कि आर्य स्कूल के पूर्व विद्यार्थियों की एक सशक्त एलुमनाई संस्था होनी चाहिए, जहाँ समय-समय पर सभी मिल सकें और अपने संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बना सकें। उनके विद्यार्थी आज देश-विदेश में फैले हुए हैं। अनुमानतः हजारों नहीं, बल्कि बीसियों हजार विद्यार्थियों ने उनसे शिक्षा और संस्कार प्राप्त किए होंगे।
वेदों में प्रार्थना की गई है— “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत” अर्थात् उठो, जागो और श्रेष्ठ लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आगे बढ़ो। भारतीय परंपरा में प्रत्येक व्यक्ति के लिए शतायु होने की कामना की जाती है। हम भी ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि लाभ सिंह जी स्वस्थ, सक्रिय और प्रसन्न रहें तथा दीर्घायु हों। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहे और वे अपने अनुभव, ज्ञान तथा स्नेह से समाज का मार्गदर्शन करते रहें।
प्रिंसिपल लाभ सिंह जी वास्तव में उन विरले व्यक्तित्वों में से हैं जिनके जीवन को देखकर यह विश्वास दृढ़ होता है कि सादगी, सेवा, स्वावलंबन और सद्भावना ही एक सफल एवं सार्थक जीवन की वास्तविक पहचान हैं। उनके प्रति हमारी हार्दिक श्रद्धा, सम्मान और शुभकामनाएँ।
Ram Mohan Rai.
Panipat /26.06.2026
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