श्री खेम राज सुंदरियाल को पद्मश्री सम्मान: पानीपत के हाथकरघा उद्योग के सच्चे संरक्षक

श्री खेम राज सुंदरियाल को पद्मश्री सम्मान: पानीपत के हाथकरघा उद्योग के सच्चे संरक्षक

 हाल ही में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार 2026 की घोषणा के साथ पानीपत के निवासी श्री खेम राज सुंदरियाल का नाम शामिल किया गया है। यह सम्मान उन्हें हाथकरघा बुनाई के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान, विशेष रूप से जामदानी और टेपेस्ट्री तकनीकों को संरक्षित करने तथा हजारों बुनकरों को प्रशिक्षण देकर रोजगार सृजन के लिए प्रदान किया जा रहा है।

आज गांधी ग्लोबल फैमिली (GGF) तथा अन्य सहयोगी संगठनों के सदस्यों ने उनके निवास पर पहुंचकर इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए हार्दिक बधाई दी और भविष्य की शुभकामनाएं व्यक्त कीं। श्री खेम राज जी से हमारा व्यक्तिगत संबंध लगभग 30 वर्षों का है तथा हमारी संस्था GGF से उनका निरंतर जुड़ाव रहा है। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों की पहचान है, बल्कि पानीपत के पिछले 700 वर्षों के हर उस बुनकर को समर्पित है जिनकी मेहनत ने इस शहर के हाथकरघा उद्योग को विश्व पटल पर स्थापित किया।

श्री खेम राज सुंदरियाल का संक्षिप्त जीवन परिचय

श्री खेम राज सुंदरियाल का जन्म 1943 में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के सुमाड़ी (या सोमाड़ी) नामक छोटे से गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। परिवार में खेती-बाड़ी का कार्य प्रमुख था, लेकिन खेम राज जी की रुचि खेती में नहीं थी। उन्होंने गांव से दूर स्थित सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI), श्रीनगर गढ़वाल से हैंडलूम टेक्नोलॉजी में तीन वर्षीय डिप्लोमा कोर्स 1962 में शुरू किया और 1964 में पूरा किया। पढ़ाई के दौरान उन्हें रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था और समाज में बुनाई को लेकर कुछ उपेक्षा भी झेलनी पड़ी, लेकिन उन्होंने इसे अपना जीवन लक्ष्य बना लिया। उनका मानना है कि "ब्राह्मण या क्षत्रिय जैसा कुछ नहीं होता, कार्य ही सबसे बड़ा धर्म है।"

1966 में सरकारी स्थानांतरण के बाद वे वाराणसी से पानीपत पहुंचे और वीवर्स सर्विस सेंटर (Weavers Service Centre) में शामिल हुए, जो कपड़ा मंत्रालय के अधीन था और जवाहरलाल नेहरू तथा पुपूल जायकार के समर्थन से स्थापित हुआ था। यहां उन्होंने विभाजन के बाद आए प्रवासी बुनकरों के साथ काम किया।

वराणसी में रहते हुए उन्होंने स्थानीय साड़ी बुनकरों को टेपेस्ट्री बुनाई सिखाई और मैक्रेमे तकनीक से लैंप शेड्स बनवाए, जो बुनकरों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बने। 1975 में पानीपत आने के बाद उन्होंने देखा कि स्थानीय बुनकर केवल साधारण खेस, बेडशीट और पर्दे बना रहे थे। उन्होंने नए डिजाइन, टेपेस्ट्री और जामदानी तकनीकों को पुनर्जीवित किया, पॉलिएस्टर यार्न का उपयोग शुरू किया तथा रंगाई में सुधार लाए। इससे पानीपत के हैंडलूम उत्पाद निर्यात हब बन गए।

उन्होंने हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर आदि क्षेत्रों के हजारों अप्रशिक्षित बुनकरों को प्रशिक्षण दिया। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पानीपत में एक सहकारी समिति स्थापित की, जो आज भी 25 से अधिक बुनकरों को वार्षिक प्रशिक्षण और रोजगार प्रदान करती है तथा कुल मिलाकर 1000 से अधिक परिवारों को लाभ पहुंचा चुकी है।

उन्होंने एम.एफ. हुसैन जैसे कलाकारों की पेंटिंग्स को टेपेस्ट्री में उतारा और पानीपत खेस को नए रूप दिए। उनके 60 वर्षों से अधिक के प्रयासों ने पानीपत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।

यह पद्मश्री सम्मान श्री खेम राज सुंदरियाल के अथक परिश्रम, नवाचार और सामाजिक योगदान की सार्थक मान्यता है। पानीपत का हाथकरघा उद्योग आज भी उनके प्रयासों से मजबूत खड़ा है। हम उन्हें पुनः हार्दिक बधाई देते हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

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