विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ आवाज: लोकतंत्र और संप्रभुता की रक्षा. Voice Against Foreign Interference: Defending Democracy and Sovereignty
विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ आवाज: लोकतंत्र और संप्रभुता की रक्षा आज विश्व में राजनीतिक अस्थिरता और विदेशी हस्तक्षेप की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। मैं न तो खुमैनी का समर्थक हूं और न ही किसी भी प्रकार की मजहबी कट्टर शासन व्यवस्था का। हम तो उस समय भी ईरान के रजा पहलवी के निरंकुश शासन का विरोध कर रहे थे, जब वह राजशाही के नाम पर लोगों के जनतांत्रिक अधिकारों का दमन कर रहे थे। लेकिन हम इस बात के जरूर समर्थक हैं कि प्रत्येक देश के नागरिकों को अपने लिए शासन व्यवस्था चुनने का अधिकार है, न कि कोई अन्य देश उनके भविष्य को तय करे। हमने अफगानिस्तान, लीबिया, सूडान और इराक का हश्र देखा है कि किस प्रकार वहां की सत्ता को लोगों को एक अच्छी लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था देने के नाम पर ठगा गया। आज वहां घोर निरंकुश धार्मांध व्यवस्था कायम हो गई है। आज सवाल किसी हिंदू-मुस्लिम या शिया-सुन्नी का नहीं होकर जनता के अपने शासन का है। क्या हमारी किस्मत का फैसला कोई सैन्य दृष्टि से संपन्न ताकतें करेंगी या हम खुद करेंगे? सवाल हमारी संप्रभुता का है। इसलिए हम सद्दाम, लीबिया के शासक गद्दाफी और खुमैनी की ...