Address by Ram Mohan Rai (General Secretary, Gandhi Global Family)Nelson Mandela International Day Church of Scientology Netherlands, Amsterdam /English and Hindi


महात्मा गांधी के विचारों ने नेल्सन मंडेला के संघर्ष को दी नई दिशा

एम्स्टर्डम में नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करने का गौरवपूर्ण अवसर

नीदरलैंड के एम्स्टर्डम में नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर आयोजित एक गरिमामय समारोह में "महात्मा गांधी के विचार एवं दर्शन का नेल्सन मंडेला के जीवन और संघर्ष पर प्रभाव" विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखने का अवसर मेरे जीवन के अत्यंत गौरवपूर्ण और अविस्मरणीय क्षणों में से एक रहा। यह निमंत्रण मुझे गांधी ग्लोबल फैमिली के महासचिव के रूप में प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम का आयोजन चर्च ऑफ साइंटोलॉजी के सभागार में हुआ, जहाँ विभिन्न देशों के शांतिकर्मी, बुद्धिजीवी, मानवाधिकार कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम का अत्यंत प्रभावशाली संचालन श्री गेरब्रिग डेनियम ने किया। उन्होंने मेरे परिचय के दौरान गांधी ग्लोबल फैमिली तथा मेरी प्रेरणास्रोत दीदी निर्मला देशपांडे का विशेष उल्लेख करते हुए उनके शांति और सद्भाव के कार्यों को श्रद्धापूर्वक याद किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रसिद्ध पियानो वादक Hans champman द्वारा उन धुनों की प्रस्तुति से हुआ जिन्हें नेल्सन मंडेला और डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर विशेष रूप से पसंद करते थे। संगीत ने पूरे वातावरण को शांति, संवेदना और मानवीय एकता के भाव से भर दिया।
इसके पश्चात दक्षिण अफ्रीका में जीवन बिताने वाली एक वक्ता Annette Brunnekreef  ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार उनका परिवार नेल्सन मंडेला के संघर्ष और रंगभेद विरोधी आंदोलन से जुड़ा रहा। उनके संस्मरणों ने उपस्थित श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया। श्रीलंका से आए शांति कार्यकर्ता श्री शांता ने अपने संगठन द्वारा मानवाधिकार शिक्षा, सामाजिक पुनर्निर्माण और हिंसा उन्मूलन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

अपने व्याख्यान में मैंने महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका प्रवास, वहाँ उनके साथ हुए नस्लीय भेदभाव, पीटरमैरिट्जबर्ग रेलवे स्टेशन की घटना तथा वहीं से सत्याग्रह की खोज और विकास की विस्तार से चर्चा की। मैंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका केवल गांधीजी के संघर्ष का स्थल नहीं था, बल्कि वहीं सत्य, अहिंसा और आत्मबल पर आधारित उस संघर्ष-पद्धति का जन्म हुआ जिसने आगे चलकर पूरी दुनिया को बदल दिया।

मैंने यह भी स्पष्ट किया कि नेल्सन मंडेला ने स्वयं अनेक अवसरों पर स्वीकार किया कि महात्मा गांधी के संघर्ष और विचारों ने उन्हें गहराई से प्रेरित किया। गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका को सत्याग्रह दिया और नेल्सन मंडेला ने उसी भूमि पर स्वतंत्रता, समानता और मानव गरिमा के संघर्ष को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। यद्यपि परिस्थितियों के कारण मंडेला के संघर्ष के कुछ चरणों में रणनीतियाँ भिन्न रहीं, फिर भी उनका अंतिम लक्ष्य वही था जिसे गांधीजी ने मानवता के सामने रखा था—न्याय, समानता, मेल-मिलाप और स्थायी शांति।

मैंने कहा कि गांधी और मंडेला दोनों ने यह सिद्ध किया कि किसी भी समाज की वास्तविक विजय प्रतिशोध में नहीं, बल्कि क्षमा, संवाद और पुनर्मिलन में निहित होती है। गांधीजी ने सत्य और अहिंसा को जनशक्ति बनाया, जबकि मंडेला ने 27 वर्षों के कारावास के बाद भी अपने विरोधियों के प्रति प्रतिशोध का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मेल-मिलाप का मार्ग चुना। यही कारण है कि दोनों महापुरुष आज भी पूरी मानवता के लिए प्रेरणा-स्तंभ हैं।

व्याख्यान के बाद श्रोताओं ने गांधी ग्लोबल फैमिली की विचारधारा और गतिविधियों के संबंध में अनेक प्रश्न पूछे। मैंने उन्हें बताया कि गांधी ग्लोबल फैमिली की स्थापना गांधीवादी चिंतक, विख्यात शांति साधिका और आचार्य विनोबा भावे की मानसपुत्री दीदी निर्मला देशपांडे की प्रेरणा, मार्गदर्शन और संरक्षण में हुई। आज यह संगठन पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री श्री गुलाम नबी आज़ाद के अध्यक्षत्व में विश्वभर में शांति, सद्भाव, संवाद और गांधीवादी मूल्यों के प्रसार का कार्य कर रहा है।

श्रोताओं ने भारत में सांप्रदायिक, जातीय और क्षेत्रीय तनावों तथा उनके समाधान के बारे में भी प्रश्न पूछे। मैंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थायी समाधान केवल संवाद, विश्वास, करुणा और अहिंसा के मार्ग से ही संभव है।

दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव पर चर्चा करते हुए मैंने गांधीजी के उस विचार को दोहराया कि "देश भले ही बँट जाएँ, दिल कभी नहीं बँटने चाहिए।" इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आचार्य विनोबा भावे ने दक्षिण एशियाई देशों के बीच सहयोग और एकता का विचार रखा। बाद में दीदी निर्मला देशपांडे ने एसोसिएशन ऑफ पीपुल्स ऑफ एशिया की स्थापना कर एशियाई देशों के बीच संवाद, मित्रता और जनसंपर्क का व्यापक अभियान चलाया। उनका संदेश स्पष्ट था—"युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए; गोली नहीं, बोली चाहिए; जंग नहीं, अमन चाहिए।"

जब श्रोताओं ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में समय-समय पर उत्पन्न होने वाली अशांति का उल्लेख किया, तब मैंने महात्मा गांधी के उस ऐतिहासिक कथन का संदर्भ दिया जो उन्होंने 1947 के विभाजन की भीषण हिंसा के बीच कश्मीर के संदर्भ में कहा था—"यदि मुझे कहीं आशा की किरण दिखाई देती है, तो वह कश्मीर में दिखाई देती है।" मैंने कहा कि आज भी यही आशा, यही संवाद और यही सद्भाव हमारे भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति है।

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब आयोजकों ने आगाज़-ए-दोस्ती अमन यात्रा के लिए हमें मोमबत्तियाँ भेंट कीं। उन्होंने कहा कि इन मोमबत्तियों को भारत ले जाकर शांति यात्रा में प्रज्ज्वलित किया जाए, ताकि यह पूरी दुनिया के लिए शांति, मित्रता, धार्मिक सद्भाव और मानव एकता का साझा संदेश बन सके। यह केवल मोमबत्तियाँ नहीं थीं, बल्कि विश्व-शांति के प्रति अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का प्रतीक थीं।

गांधी ग्लोबल फैमिली की ओर से मैंने आयोजकों को महात्मा गांधी का चित्र तथा गांधी ग्लोबल फैमिली का अंगवस्त्र भेंट कर भारत की ओर से मैत्री, सद्भाव और शांति का संदेश दिया।

एम्स्टर्डम का यह आयोजन एक बार फिर इस सत्य की पुष्टि करता है कि महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला किसी एक देश के नेता नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता की साझा विरासत हैं। उनके विचार आज भी विश्व को यह संदेश देते हैं कि घृणा का उत्तर घृणा नहीं, बल्कि प्रेम है; हिंसा का उत्तर हिंसा नहीं, बल्कि अहिंसा है; और संघर्षों का स्थायी समाधान केवल संवाद, न्याय और मानवता के मार्ग पर चलकर ही संभव है।Address by Ram Mohan Rai
General Secretary, Gandhi Global Family
Nelson Mandela International Day
Church of Scientology Netherlands, Amsterdam
18 July 2026

It was a great honour and privilege for me to deliver the keynote address at the Church of Scientology Netherlands on the occasion of Nelson Mandela International Day.

I sincerely thank the Church of Scientology Netherlands for inviting me to speak on the inspiring theme:

"How Mahatma Gandhi's Philosophy Inspired Nelson Mandela and His Lifelong Commitment to Justice and Reconciliation."

I conveyed warm greetings from Gandhi Global Family (GGF), an international movement dedicated to promoting Mahatma Gandhi's philosophy of Truth, Non-violence, Peace and Human Dignity.

I also shared that Gandhi Global Family is presently working under the inspiring leadership of its President, Shri Ghulam Nabi Azad, whose lifelong commitment to dialogue, national unity, communal harmony and Gandhian values continues to strengthen our efforts to build a peaceful and compassionate society.

I paid tribute to Acharya Vinoba Bhave, the foremost spiritual successor of Mahatma Gandhi, whose historic Bhoodan (Land-Gift) Movement became one of the world's greatest non-violent social revolutions. Vinobaji demonstrated that justice could be achieved not through coercion but through compassion and voluntary sacrifice.

I also remembered the late Nirmala Deshpande, Vinobaji's spiritual daughter and one of India's most respected Gandhian peace activists. For more than five decades, she dedicated her life to promoting world peace, Indo-Pak friendship, national integration, communal harmony, interfaith dialogue and service to the poor. Her vision continues to inspire the work of Gandhi Global Family.

During my address, I reflected upon the extraordinary life of Nelson Mandela, who emerged from twenty-seven years of imprisonment not with hatred but with forgiveness, not with revenge but with reconciliation.

I explained how Mandela drew profound inspiration from Mahatma Gandhi, whose philosophy of Satyagraha—Truth, Love and Non-violence—was born in South Africa after the historic Pietermaritzburg railway incident in 1893.

I quoted Mandela's famous words:

"India gave us Mohandas Gandhi; we returned him to you as Mahatma Gandhi."

I also referred to Mandela's observation that Gandhi rejected violence and demonstrated that peaceful resistance could become the most powerful weapon against injustice.

I highlighted Mandela's generous assessment of Gandhi when he wrote:

"Gandhi must be forgiven those prejudices and judged in the context of the time and the circumstances. We are looking here at the young Gandhi, still to become Mahatma."

The address also explored how Gandhi's philosophy travelled beyond India and South Africa to inspire global movements for justice.

I spoke about the pioneering work of Dr. W. E. B. Du Bois, the eminent African-American scholar, civil rights leader and Pan-African thinker, who tirelessly fought against racial discrimination and whose intellectual leadership influenced liberation movements across Africa.

I also highlighted the remarkable contribution of Dr. Martin Luther King Jr., who openly acknowledged Gandhi as his greatest inspiration. Through the Montgomery Bus Boycott, the Birmingham Campaign and the American Civil Rights Movement, Dr. King demonstrated that Gandhi's philosophy of non-violence could successfully challenge racial injustice in another part of the world.

Together, Mahatma Gandhi, Dr. W. E. B. Du Bois, Dr. Martin Luther King Jr. and Nelson Mandela created a powerful moral tradition that continues to inspire humanity's struggle for freedom, equality and human dignity.

I also spoke about Nelson Mandela's deep affection for India. Following his release from prison, he visited India on several occasions, paid homage at Rajghat, and in recognition of his lifelong struggle against apartheid, was honoured with India's highest civilian award, the Bharat Ratna. In 2001, he also received the International Mahatma Gandhi Peace Award, symbolising the enduring spiritual bond between Gandhi and Mandela.

Since the programme was hosted by the Church of Scientology, I observed that its founder, L. Ron Hubbard, emphasised ethical living, personal responsibility and respect for human dignity.

These principles, I noted, resonate with Gandhi's conviction that lasting social transformation begins with self-transformation.

I concluded by stating that today's world—marked by war, terrorism, racial discrimination, religious intolerance, environmental degradation and growing mental distress—needs Gandhi's Truth, Mandela's Reconciliation, Martin Luther King's Dream and Du Bois' vision of racial equality more than ever before.

I expressed my hope that Gandhi Global Family and the Church of Scientology would continue working together to promote peace, non-violence, interfaith harmony, human rights and universal brotherhood.

The programme was graced by the presence of several distinguished personalities, including Gerbring Deninum, Patricia Haveman, Shantanu Dalugamage, Madan Gupta and Shanti Gupta, whose participation added great dignity to the occasion.

I concluded with Mahatma Gandhi's immortal words:

"The best way to find yourself is to lose yourself in the service of others."

and Nelson Mandela's timeless message:

"It always seems impossible until it's done."

May their shared legacy continue to inspire humanity towards a more peaceful, just and compassionate world.

 

I would like to express my special thanks and heartfelt appreciation to  Gerbring Deninum for her kind invitation and warm hospitality. Her dedicated efforts in organizing and conducting this meaningful programme on Nelson Mandela International Day deserve our highest appreciation. Through her vision and commitment, the Church of Scientology Netherlands provided an inspiring platform to celebrate the timeless values of peace, justice, reconciliation and human dignity. I also extend my sincere gratitude to all the organisers, volunteers and participants whose contributions made this event a memorable success.

Ram Mohan Rai

General Secretary
Gandhi Global Family
Amsterdam, The Netherlands
18 July 2026


महात्मा गांधी के दर्शन ने नेल्सन मंडेला के न्याय, मेल-मिलाप और मानव गरिमा के प्रति आजीवन समर्पण को कैसे प्रेरित किया


राम मोहन राय

महासचिव, गांधी ग्लोबल फैमिली
चर्च ऑफ साइंटोलॉजी, नीदरलैंड
नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस
एम्स्टर्डम | 18 जुलाई 2026

18 जुलाई 2026 को नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर एम्स्टर्डम स्थित चर्च ऑफ साइंटोलॉजी, नीदरलैंड में आयोजित एक गरिमामय समारोह में मुझे "महात्मा गांधी के दर्शन ने नेल्सन मंडेला के न्याय, मेल-मिलाप और मानव गरिमा के प्रति आजीवन समर्पण को कैसे प्रेरित किया" विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

मैंने चर्च ऑफ साइंटोलॉजी, नीदरलैंड का इस सम्मानपूर्ण आमंत्रण के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के हिंसा, युद्ध, नस्लवाद और असहिष्णुता से जूझते विश्व में महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं।

मैंने अपने संबोधन में गांधी ग्लोबल फैमिली की ओर से सभी उपस्थित प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए बताया कि यह संगठन महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, करुणा और मानव गरिमा के संदेश को विश्वभर में प्रसारित करने के लिए कार्य कर रहा है।

मैंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि गांधी ग्लोबल फैमिली वर्तमान में अपने अध्यक्ष श्री गुलाम नबी आज़ाद के प्रेरणादायी नेतृत्व में गांधीवादी मूल्यों, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव, संवाद और विश्व शांति के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

अपने व्याख्यान में मैंने आचार्य विनोबा भावे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे महात्मा गांधी के सर्वाधिक योग्य आध्यात्मिक उत्तराधिकारी थे। उनका भूदान आंदोलन विश्व के सबसे बड़े अहिंसक सामाजिक आंदोलनों में से एक था, जिसने प्रेम, विश्वास और स्वैच्छिक त्याग के माध्यम से सामाजिक न्याय स्थापित करने का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।

मैंने विनोबा जी की आध्यात्मिक पुत्री और प्रख्यात गांधीवादी शांति दूत श्रद्धेय निर्मला देशपांडे जी का भी स्मरण किया, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन विश्व शांति, भारत-पाक मैत्री, राष्ट्रीय एकता, सांप्रदायिक सद्भाव, सर्वधर्म संवाद, महिला सशक्तिकरण तथा वंचित वर्गों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनके आदर्श आज भी गांधी ग्लोबल फैमिली और निर्मला देशपांडे संस्थान के कार्यों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

मैंने अपने व्याख्यान में कहा कि नेल्सन मंडेला केवल दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति नहीं थे, बल्कि वे नैतिक साहस, क्षमा, न्याय और मेल-मिलाप के वैश्विक प्रतीक थे। सत्ताईस वर्षों तक कारावास में रहने के बाद भी उन्होंने प्रतिशोध नहीं, बल्कि क्षमा और राष्ट्रीय मेल-मिलाप का मार्ग चुना।

मैंने विस्तार से बताया कि यह नैतिक शक्ति उन्हें महात्मा गांधी के दर्शन से प्राप्त हुई। गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में पीटरमैरिट्सबर्ग रेलवे स्टेशन पर नस्लीय अपमान का सामना करने के बाद सत्य, प्रेम और अहिंसा पर आधारित सत्याग्रह का मार्ग अपनाया, जिसने आगे चलकर पूरी दुनिया को नई दिशा दी।

मैंने नेल्सन मंडेला का प्रसिद्ध कथन उद्धृत किया—

"भारत ने हमें मोहनदास गांधी दिए और हमने उन्हें महात्मा गांधी बनाकर भारत को लौटाया।" 
    मैंने यह भी उल्लेख किया कि मंडेला का मानना था कि गांधी ने विश्व को यह सिखाया कि अन्याय और दमन के विरुद्ध अहिंसक प्रतिरोध सबसे शक्तिशाली हथियार बन सकता है।

अपने व्याख्यान में मैंने यह भी बताया कि गांधीजी के विचारों का प्रभाव केवल नेल्सन मंडेला तक सीमित नहीं था। डॉ. डब्ल्यू. ई. बी. डू बोइस ने नस्लीय समानता, मानवाधिकार और अफ्रीकी मूल के लोगों के अधिकारों के लिए वैश्विक जनमत तैयार किया, जिसने दक्षिण अफ्रीका सहित अनेक स्वतंत्रता आंदोलनों को वैचारिक शक्ति प्रदान की।

इसी प्रकार डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने स्वयं स्वीकार किया था कि उनके अहिंसक नागरिक अधिकार आंदोलन की सबसे बड़ी प्रेरणा महात्मा गांधी थे। अमेरिका का नागरिक अधिकार आंदोलन गांधीजी के सत्याग्रह से प्रेरित था और उसने विश्व को यह विश्वास दिलाया कि अहिंसा के माध्यम से भी अन्याय पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

मैंने कहा कि महात्मा गांधी, डॉ. डब्ल्यू. ई. बी. डू बोइस, डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर और नेल्सन मंडेला—इन चारों महान विभूतियों ने मानवता को समानता, न्याय, स्वतंत्रता और मानव गरिमा का साझा वैश्विक दर्शन प्रदान किया।

मैंने यह भी उल्लेख किया कि जेल से रिहा होने के बाद नेल्सन मंडेला ने भारत की अनेक यात्राएँ कीं, राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की, भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया तथा वर्ष 2001 में उन्हें इंटरनेशनल महात्मा गांधी पीस अवार्ड भी प्रदान किया गया। यह सम्मान गांधी और मंडेला के बीच गहरे वैचारिक और नैतिक संबंध का प्रतीक है।

चूँकि कार्यक्रम का आयोजन चर्च ऑफ साइंटोलॉजी द्वारा किया गया था, इसलिए मैंने इसके संस्थापक एल. रॉन हबर्ड के उन विचारों का भी उल्लेख किया जिनमें उन्होंने नैतिक जीवन, व्यक्तिगत उत्तरदायित्व, करुणा और मानव गरिमा को स्थायी शांति का आधार बताया है। मैंने कहा कि इन मूल्यों में गांधीजी के विचारों की स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनाई देती है।

अपने संबोधन के अंत में मैंने कहा कि आज जब विश्व युद्ध, आतंकवाद, नस्लीय भेदभाव, धार्मिक असहिष्णुता, पर्यावरण संकट, नशाखोरी और मानसिक तनाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब गांधी का सत्य, मंडेला का मेल-मिलाप, मार्टिन लूथर किंग जूनियर का समानता का स्वप्न और डॉ. डू बोइस का नस्लीय न्याय का संदेश पूरी मानवता के लिए आशा का मार्ग प्रस्तुत करता है।

मैंने विश्वास व्यक्त किया कि गांधी ग्लोबल फैमिली और चर्च ऑफ साइंटोलॉजी विश्व शांति, मानवाधिकार, अंतरधार्मिक सद्भाव, अहिंसा और मानवीय गरिमा के साझा मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य में मिलकर कार्य करेंगे।

इस गरिमामय कार्यक्रम में Gerbring Deninum, Patricia Haveman, Shantanu Dalugamage, Madan Gupta तथा Shanti Gupta सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों की सम्मानजनक उपस्थिति रही, जिन्होंने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।

अपने वक्तव्य का समापन मैंने महात्मा गांधी के इन अमर शब्दों के साथ किया—

 "स्वयं को खोजने का सर्वोत्तम मार्ग है—अपने को दूसरों की सेवा में समर्पित कर देना।"



और नेल्सन मंडेला के प्रेरक संदेश के साथ—

 "यह कार्य तब तक असंभव प्रतीत होता है, जब तक वह पूरा नहीं हो जाता।"
   आइए, हम सब मिलकर गांधी, मंडेला, विनोबा, निर्मला दीदी, डॉ. डब्ल्यू. ई. बी. डू बोइस और डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर के आदर्शों से प्रेरणा लेकर एक ऐसे विश्व के निर्माण का संकल्प लें जहाँ सत्य, अहिंसा, न्याय, समानता, करुणा और मानव गरिमा सर्वोच्च मूल्य हों।
    अंत में मैं  Gerbring Deninum के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता एवं विशेष आभार व्यक्त करना चाहता हूँ, जिन्होंने मुझे इस गरिमामय कार्यक्रम में आमंत्रित किया तथा नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस के इस प्रेरणादायी आयोजन का अत्यंत सफल एवं उत्कृष्ट संचालन किया। उनके समर्पण, दूरदृष्टि और नेतृत्व के कारण चर्च ऑफ साइंटोलॉजी, नीदरलैंड ने विश्व शांति, न्याय, मेल-मिलाप और मानवीय गरिमा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों पर सार्थक संवाद के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान किया। मैं इस कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग देने वाले सभी आयोजकों, स्वयंसेवकों एवं प्रतिभागियों के प्रति भी अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ, जिनके सहयोग से यह कार्यक्रम अत्यंत सफल और स्मरणीय बन सका।

— राम मोहन राय
महासचिव, गांधी ग्लोबल फैमिली
एम्स्टर्डम (नीदरलैंड)
18 जुलाई 2026

Comments

Popular posts from this blog

Global Youth Festival, 4th day ,Panipat/05.10.2025. Sant Nirankari Mission/National Youth Project/Gandhi Global Family

पानीपत की बहादुर बेटी सैयदा- जो ना थकी और ना झुकी :

Global Youth Festival, Panipat, .Some glimpses of 3rd day./04.10.2025. National Youth Project, Gandhi Global Family, Sant Nirankari Mission