यात्रा वृत्तांत : जर्मनी की अद्भुत अट्टा होले (Atta Höhle) गुफाओं की अविस्मरणीय यात्रा
यात्रा वृत्तांत : जर्मनी की अद्भुत अट्टा होले (Atta Höhle) गुफाओं की अविस्मरणीय यात्रा
आज का दिन हमारी नीदरलैंड यात्रा के सबसे रोमांचक और अविस्मरणीय दिनों में से एक रहा। हमारे आत्मीय मित्र श्री अमीर नियाज़ी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती नजमा हमें एम्स्टर्डम से लगभग 400 किलोमीटर दूर जर्मनी स्थित विश्वविख्यात अट्टा होले (Atta Höhle) की प्राकृतिक गुफाओं का सौंदर्य दिखाने के लिए लेकर गए। बीच-बीच में विश्राम करते हुए लगभग पाँच घंटे की यात्रा के बाद हम वहाँ पहुँचे। आश्चर्य की बात यह रही कि नीदरलैंड से जर्मनी की सीमा में हम कब प्रवेश कर गए, इसका कोई विशेष आभास ही नहीं हुआ। यूरोप के खुले सीमावर्ती देशों की यह सहजता वास्तव में अद्भुत है।
हम लगभग दोपहर 3:30 बजे गुफा परिसर पहुँचे। यह उस दिन आने वाले पर्यटकों के लिए अंतिम दर्शक समूह था। हमारे साथ लगभग 25 पर्यटक थे। गाइड जर्मन भाषा में जानकारी दे रहे थे। सौभाग्य से हमारे समूह में मरीना (Marina) नाम की एक महिला थीं, जो अंग्रेज़ी जानती थीं। उन्होंने पूरे भ्रमण के दौरान बड़ी आत्मीयता से प्रत्येक महत्वपूर्ण स्थल की जानकारी हमें अंग्रेज़ी में समझाई।
लगभग 40 करोड़ वर्ष पूर्व (डेवोनियन काल) बनी ये चूना-पत्थर की गुफाएँ प्राकृतिक जल की बूँदों द्वारा हजारों-लाखों वर्षों में आकार लेती रही हैं। आज भी इनमें बनने की प्रक्रिया जारी है। सामान्यतः एक सेंटीमीटर संरचना बनने में लगभग 100 वर्ष लग जाते हैं। यही कारण है कि यहाँ की प्रत्येक आकृति प्रकृति के धैर्य और सृजन शक्ति का अद्भुत उदाहरण है।
भ्रमण के दौरान हमने अनेक आश्चर्यजनक प्राकृतिक संरचनाएँ देखीं—
5. प्राकृतिक झरना एवं जलधाराएँ – जिनकी प्रत्येक बूँद आज भी नई आकृतियों का निर्माण कर रही है।
7. विशाल सभागार जैसा कक्ष – जहाँ प्रकृति ने स्वयं एक भव्य हॉल का निर्माण कर दिया है।
8. पक्षियों एवं पशुओं जैसी आकृतियाँ – जिन्हें देखकर कल्पना अनेक रूप धारण कर लेती है।
9. देव-देवियों जैसी प्रतीत होने वाली संरचनाएँ – जिनमें हर दर्शक अपनी श्रद्धा और कल्पना के अनुसार अलग-अलग रूप देख सकता है।
इन प्राकृतिक आकृतियों को देखकर मन बार-बार यही सोचता रहा कि यदि ऐसी गुफाएँ भारत में होतीं, तो संभवतः इनमें से अनेक स्थान किसी न किसी देवी-देवता के नाम से प्रसिद्ध तीर्थ बन चुके होते। भारतीय संस्कृति की विशेषता ही यही है कि वह प्रकृति की प्रत्येक सुंदर रचना में ईश्वर के दर्शन करती है। वृक्षों, पर्वतों, नदियों और गुफाओं में भी हम दिव्यता का अनुभव करते हैं। यहाँ भी अनेक आकृतियों में मुझे देवताओं, देवियों, पक्षियों, पशुओं और हिमखंडों की झलक दिखाई देती रही।
जीवन में एक घुमक्कड़ के रूप में मुझे अनेक देशों और असंख्य ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक स्थलों को देखने का अवसर मिला है, परंतु अट्टा होले की यह यात्रा सचमुच वर्णनातीत है। प्रकृति ने करोड़ों वर्षों की अपनी साधना से जो कलाकृतियाँ यहाँ गढ़ी हैं, उन्हें शब्दों में बाँधना कठिन है।
इस अविस्मरणीय अनुभव के लिए मैं अपने प्रिय मित्र श्री अमीर नियाज़ी और नजमा भाभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। उनकी आत्मीयता और स्नेह के कारण हमें जर्मनी की इस अद्भुत प्राकृतिक धरोहर को देखने और समझने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ। यह यात्रा हमारी यूरोप यात्रा की अमूल्य स्मृतियों में सदैव सुरक्षित रहेगी।
राम मोहन राय,
Atta Holle, Germany.
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