डेवेंटर का सांस्कृतिक महोत्सव : कला, युवा ऊर्जा और बारिश के बीच अविस्मरणीय संध्या

डेवेंटर का सांस्कृतिक महोत्सव : कला, युवा ऊर्जा और बारिश के बीच अविस्मरणीय संध्या

राम मोहन राय

आज हमारा पुनः डेवेंटर जाने का मुख्य उद्देश्य वहाँ चल रहे विशाल सांस्कृतिक महोत्सव को निकट से देखना, समझना और उसकी आत्मा को अनुभव करना था। यह महोत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि कला, संस्कृति, लोकजीवन और युवा रचनात्मकता का जीवंत उत्सव है।

हम लगभग शाम छह बजे डेवेंटर पहुँचे। उस समय पूरा ऐतिहासिक नगर उत्सव के रंगों में सराबोर हो चुका था। गलियों, चौकों और नदी के किनारों पर कलाकारों की चहल-पहल थी। वातावरण में संगीत की धुनें, तालियों की गूँज और दर्शकों का उत्साह एक अद्भुत सांस्कृतिक ऊर्जा का निर्माण कर रहे थे।

डेवेंटर का प्रसिद्ध Deventer op Stelten उत्सव पूरे शहर को एक खुले रंगमंच में बदल देता है। ऐतिहासिक इमारतों के बीच कहीं नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए जा रहे थे, कहीं ऊँचे स्टिल्ट (लकड़ी के लंबे पायों) पर कलाकार अद्भुत संतुलन का प्रदर्शन कर रहे थे। अनेक स्थानों पर नृत्य, लोक संगीत, आधुनिक संगीत, एकल अभिनय, हास्य प्रस्तुतियाँ, कठपुतली प्रदर्शन, बच्चों के कार्यक्रम तथा विभिन्न देशों के कलाकार अपनी-अपनी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का मनोहारी प्रदर्शन कर रहे थे।

मुख्य चौक से आगे बढ़ते हुए हम नगर की जीवनरेखा आइज्सेल (IJssel) नदी के तट पर पहुँचे। नदी का शांत प्रवाह और उसके दोनों किनारों पर चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम दृश्य को और भी आकर्षक बना रहे थे। हमने वहाँ से एक फेरी द्वारा नदी पार की। नदी के दूसरे किनारे पर भी विभिन्न स्थानों पर कलाकार अपने कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा नगर कला के उत्सव में डूब गया हो।

विशेष रूप से यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि अधिकांश कलाकार युवा थे। उनकी ऊर्जा, अनुशासन, प्रस्तुति की गुणवत्ता और कलात्मक अभिव्यक्ति अत्यंत प्रभावशाली थी। तीन युवा कलाकारों द्वारा प्रस्तुत एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक ने हमें विशेष रूप से प्रभावित किया। उनकी सामाजिक संवेदनशीलता, अभिनय क्षमता और दर्शकों से संवाद स्थापित करने की कला अद्भुत थी। उनकी प्रतिभा के सम्मानस्वरूप हमने उन्हें गांधी ग्लोबल फैमिली की ओर से स्मृति-चिह्न तथा तिरंगा पटका भेंट कर सम्मानित किया। युवा कलाकारों के चेहरे पर झलकती प्रसन्नता और विनम्रता हमारे लिए भी अत्यंत संतोष का विषय बनी।

कुछ आगे बढ़ने पर एक और अत्यंत आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुति प्रारंभ होने वाली थी। तभी अचानक मौसम ने करवट ली और तेज़ बारिश शुरू हो गई। अधिकांश कार्यक्रम खुले मैदानों और चौकों में आयोजित किए गए थे। कलाकारों और दर्शकों ने कुछ समय तक वर्षा रुकने की प्रतीक्षा की। सभी को विश्वास था कि शायद कुछ ही देर में कार्यक्रम पुनः आरंभ हो जाएगा, किंतु जब वर्षा लगातार जारी रही तो आयोजकों को विवश होकर अनेक प्रस्तुतियाँ स्थगित करनी पड़ीं।

कलाकारों ने दर्शकों से अत्यंत विनम्रता के साथ क्षमा याचना की। हम भी उनके पास पहुँचे, अपना परिचय दिया और उनके प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना की। हमने उन्हें बताया कि परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, उनकी कला और समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है। उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएँ और प्रोत्साहन देना हमारे लिए सुखद अनुभव रहा।

बारिश कुछ कम होने पर हम पुनः नगर के मुख्य केंद्रीय चौक की ओर लौटे। वहाँ का दृश्य अद्भुत था। सैकड़ों दर्शकों की उपस्थिति में कलाकार पूरे उत्साह और उमंग के साथ नृत्य और संगीत प्रस्तुत कर रहे थे। रात के लगभग नौ बज चुके थे, लेकिन वातावरण में ऊर्जा और उल्लास तनिक भी कम नहीं हुआ था। दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन कर रहे थे और कलाकार भी पूरे मनोयोग से अपनी प्रस्तुतियाँ दे रहे थे।

मुख्य चौक पर स्थापित एक विशाल कलात्मक संरचना ने हमारा विशेष ध्यान आकर्षित किया। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि लकड़ी के असंख्य टुकड़े बिना किसी कील, गोंद या रस्सी के केवल संतुलन और संरचनात्मक कौशल के आधार पर एक-दूसरे पर टिकाकर खड़े किए गए थे। यह इंजीनियरिंग और कला का अद्भुत संगम था, जिसने हमें अत्यंत प्रभावित किया। यह संरचना केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि मानव सृजनशीलता, संतुलन और सामूहिक सहयोग का प्रतीक प्रतीत हो रही थी।इस पूरे महोत्सव का सबसे विलक्षण और प्रेरणादायक पक्ष यह था कि अब तक हमने अनेक नगरों में किसी एक मुख्य चौक, रंगमंच या सभास्थल पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और नाट्य प्रस्तुतियाँ देखी थीं, परन्तु यह हमारे जीवन का पहला अवसर था जब लगा कि पूरा शहर ही एक विशाल सांस्कृतिक रंगमंच में परिवर्तित हो गया है। डेवेंटर की लगभग हर गली, हर चौराहे, हर खुले मैदान और आइज्सेल नदी के किनारे कहीं लोकनाटक चल रहा था, कहीं गीत-संगीत की प्रस्तुतियाँ थीं, कहीं नृत्य हो रहा था, तो कहीं कलाकार अपने अभिनव प्रयोगों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहे थे। ऐसा प्रतीत होता था मानो पूरा नगर कला और संस्कृति का जीवंत उत्सव बन गया हो।

इससे भी अधिक प्रेरणादायक दृश्य था लोगों का अभूतपूर्व उत्साह। हजारों की संख्या में दर्शक पूरे मनोयोग से प्रत्येक प्रस्तुति का आनंद ले रहे थे। इससे स्पष्ट अनुभव हुआ कि नीदरलैंड के समाज में सांस्कृतिक चेतना कितनी गहरी और सशक्त है। इस तीन दिवसीय महोत्सव में केवल डेवेंटर के निवासी ही नहीं, बल्कि आसपास के नगरों तथा नीदरलैंड के दूर-दराज़ क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुँचते हैं और कई परिवार पूरे तीन दिनों तक यहीं ठहरकर इस सांस्कृतिक उत्सव का आनंद लेते हैं।

इस विराट आयोजन की सफलता के पीछे सैकड़ों आयोजकों, स्वयंसेवकों, कलाकारों, तकनीकी सहयोगियों और प्रशासन का समर्पित प्रयास दिखाई देता है। प्रत्येक व्यक्ति पूरी निष्ठा और उत्साह के साथ इस महोत्सव को सफल बनाने में जुटा हुआ था। यही सामूहिक भावना इस आयोजन को केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता, रचनात्मकता और सांस्कृतिक एकता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनाती है।

रात्रि के नौ बजे के बाद हमें वापस लौटने का निर्णय लेना पड़ा, क्योंकि डेवेंटर जर्मनी की सीमा के निकट स्थित है और हमारे निवास तक पहुँचने में लगभग डेढ़ घंटे का समय लगना था।

डेवेंटर का यह सांस्कृतिक महोत्सव हमें एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद स्थापित करने का सशक्त माध्यम है। यहाँ विभिन्न देशों और संस्कृतियों के कलाकार बिना किसी भेदभाव के एक ही मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे थे। यह दृश्य वास्तव में विश्वबंधुत्व, सांस्कृतिक विविधता और मानवीय एकता का जीवंत उत्सव था।

यह संध्या हमारे लिए केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का अवलोकन नहीं, बल्कि कला, युवा शक्ति, सृजनशीलता और मानवीय संवेदनाओं का अविस्मरणीय अनुभव बन गई।

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