युवाओं का जागरण: नए भारत की अहिंसक चेतना— राम मोहन राय
युवाओं का जागरण: नए भारत की अहिंसक चेतना
— राम मोहन राय
भारत का भविष्य उसके युवा हैं। जब युवा जागते हैं तो केवल सरकारें ही नहीं, बल्कि समाज भी आत्ममंथन करने के लिए विवश हो जाता है। हाल के दिनों में देश में जिस प्रकार युवाओं, विद्यार्थियों, सोशल मीडिया एक्टिविस्टों और छोटे-छोटे डिजिटल मंचों ने लोकतांत्रिक ढंग से अपनी आवाज़ बुलंद की है, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का युवा वर्ग केवल दर्शक बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी चाहता है।
हर बड़े जनआंदोलन के पीछे वर्षों से संचित पीड़ा, असंतोष और परिवर्तन की आकांक्षा होती है। जब समाज में अनेक अनसुलझे प्रश्न जमा हो जाते हैं, तो एक छोटी-सी चिंगारी भी व्यापक जनचेतना का रूप ले सकती है। ऐसे समय में सबसे बड़ी आवश्यकता यह होती है कि आंदोलन का मार्ग संयम, संवाद और अहिंसा का हो।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन हमें यही शिक्षा देता है। महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से दुनिया को बताया कि नैतिक शक्ति किसी भी हिंसक शक्ति से अधिक प्रभावशाली हो सकती है। दूसरी ओर, शहीद-ए-आज़म भगत सिंह ने अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, वैचारिक स्पष्टता और व्यक्तिगत त्याग का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। जेल में उनका लंबा अनशन तथा उनके साथी जतिन दास का सर्वोच्च बलिदान आज भी हमें याद दिलाता है कि परिवर्तन केवल नारों से नहीं, बल्कि अनुशासन, साहस और त्याग से आता है।
इसी प्रकार भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमें संवैधानिक मूल्यों, समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व का मार्ग दिखाया। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि लोकतंत्र केवल मतदान की व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक संस्कृति है।
आज जब देश का युवा अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर जागरूक हो रहा है, तब यह आवश्यक है कि वह इन तीनों महान विभूतियों—महात्मा गांधी, शहीद भगत सिंह और बाबा साहब डॉ. अंबेडकर—के विचारों से प्रेरणा ले। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हिंसा, घृणा और वैमनस्य किसी भी लोकतांत्रिक समाज को कमजोर ही करते हैं।
महात्मा गांधी का भारत ऐसा भारत था जहाँ सभी धर्मों, सभी समुदायों और सभी नागरिकों के लिए समान सम्मान हो। उनका सपना नफरत का नहीं, बल्कि प्रेम, संवाद और सद्भाव का भारत था। आज भी उनकी यह शिक्षा उतनी ही प्रासंगिक है जितनी स्वतंत्रता आंदोलन के समय थी।
हमें यह भी स्वीकार करना होगा कि भारत के सामने अभी अनेक चुनौतियाँ हैं—गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक सोच का विस्तार। इन समस्याओं के समाधान के लिए केवल सरकारों से अपेक्षा करना पर्याप्त नहीं होगा। समाज, युवाओं, शिक्षकों, मीडिया और नागरिक संस्थाओं को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। किसी एक सरकार या एक दल को दोष देने से अधिक महत्वपूर्ण है कि हम मिलकर समाधान खोजें।
एक विकसित और समृद्ध भारत का निर्माण तभी संभव है जब विकास के साथ सामाजिक विश्वास, संवैधानिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को भी समान महत्व दिया जाए। यदि हम नफरत के स्थान पर संवाद, भय के स्थान पर विश्वास और टकराव के स्थान पर सहयोग को अपनाएँ, तो भारत विश्व के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है।
मैं देश के सभी विद्यार्थियों, युवाओं और जागरूक नागरिकों को हार्दिक बधाई देता हूँ कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सजग हैं और राष्ट्र के भविष्य को लेकर चिंतन कर रहे हैं। मेरी उनसे विनम्र अपील है कि वे सत्य, अहिंसा, संवैधानिक मर्यादा और सामाजिक सद्भाव को अपने प्रत्येक प्रयास का आधार बनाएँ।
आइए, हम सब मिलकर ऐसा भारत बनाने का संकल्प लें जहाँ विचारों की स्वतंत्रता हो, संविधान का सम्मान हो, सभी धर्मों और समुदायों के बीच विश्वास हो, और हर युवा को अपने सपनों को साकार करने का समान अवसर मिले। यही महात्मा गांधी, शहीद भगत सिंह और बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। यही नए भारत की वास्तविक पहचान भी होगी।
Comments
Post a Comment