बच्चों की कहानियां

 🐱🐭 बिल्ली और चूहे की दोस्ती

एक बार की बात है। एक सुंदर-से घर में मम्मी-पापा अपने दो बच्चों के साथ रहते थे। बेटा बारह साल का था और बेटी नौ साल की। दोनों भाई-बहन बहुत प्यारे थे और उन्हें जानवरों से भी बहुत प्यार था।

उनके घर में एक सुंदर-सी बिल्ली भी रहती थी। उसका नाम था मिन्नी।

मिन्नी को अपने ऊपर बहुत घमंड था। वह दिनभर घर में ऐसे घूमती, जैसे पूरे घर की मालकिन वही हो!

लेकिन उसी घर में एक छोटा-सा चूहा भी रहता था। वह बहुत समझदार और फुर्तीला था। उसका छोटा-सा बिल था, जिसमें वह खतरा देखते ही घुस जाता था।

एक दिन मिन्नी को पता चल गया कि घर में चूहा भी रहता है।

मिन्नी ने अपनी मूँछों पर ताव देते हुए कहा—

“अच्छा! तो मेरे घर में चूहा भी रहता है! अब देखना, मैं उसे कैसे पकड़ती हूँ!”

बेचारा चूहा यह सुनकर घबरा गया।

वह मन ही मन बोला—

“हे भगवान! अब तो मेरी शामत आ गई। यह बिल्ली मुझे चैन से जीने नहीं देगी।”

मिन्नी कई बार चूहे को पकड़ने दौड़ी, लेकिन चूहा भी बहुत चालाक था।

जैसे ही मिन्नी झपटी—

फुर्रर्र!

चूहा बिल में!

मिन्नी बोली—

“अरे! फिर बच गया!”

चूहा अंदर से हँसते हुए बोला—

“मिन्नी जी, पहले मुझे पकड़ना तो सीखिए!”

मिन्नी को बहुत गुस्सा आता।

एक दिन चूहा सोचने लगा—

“मैं क्या करूँ? इस घर में रहूँ तो बिल्ली जान की दुश्मन बनी हुई है और घर छोड़ दूँ तो बाहर न जाने कितने खतरे हैं। क्यों न इससे दोस्ती करने की कोशिश करूँ?”

लेकिन चूहा अभी यह तय ही कर रहा था कि तभी एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने दोनों की जिंदगी बदल दी।

अचानक आया खतरा

एक दिन मम्मी-पापा और दोनों बच्चे फिल्म देखने चले गए। घर में सिर्फ मिन्नी और चूहा रह गए।

मिन्नी आराम से सोफे पर सो रही थी।

चूहे ने धीरे से अपने बिल से बाहर झाँका।

“वाह! आज तो घर खाली है। चलो, थोड़ा खाना ढूँढ़ आता हूँ।”

वह धीरे-धीरे बाहर निकला।

तभी उसकी नजर खिड़की पर पड़ी।

एक बड़ा-सा कुत्ता खिड़की से घर के अंदर आने की कोशिश कर रहा था!

चूहा डर गया।

“अरे बाप रे! यह तो बहुत बड़ा कुत्ता है!”

उसने एक पल सोचा और फिर मिन्नी की ओर देखा।

“अगर यह कुत्ता अंदर आ गया तो मिन्नी भी खतरे में पड़ सकती है।”

चूहा दौड़कर मिन्नी के पास गया और उसे जगाने लगा।

“मिन्नी! उठो! जल्दी उठो!”

मिन्नी ने आँखें मलते हुए कहा—

“क्या है? मुझे सोने दो।”

चूहे ने कहा—

“जल्दी उठो! घर में कुत्ता घुस रहा है!”

मिन्नी ने जैसे ही कुत्ते को देखा, उसकी आँखें चमक उठीं।

वह बोली—

“अरे वाह! आज तो शिकार खुद मेरे पास चला आया। आज तो तू गया!”

चूहा बोला—

“मिन्नी, यह कोई छोटा शिकार नहीं है। यह तुमसे बहुत बड़ा है!”

मिन्नी ने अकड़कर कहा—

“मैं किसी से नहीं डरती!”

चूहा बोला—

“अच्छा! तो पहले मेरी बात सुनो। जल्दी से अलमारी के ऊपर चढ़ जाओ। कुत्ता वहाँ नहीं पहुँच पाएगा।”

मिन्नी ने इस बार चूहे की बात मान ली।

वह झट से अलमारी के ऊपर चढ़ गई।

चूहा भी अपने बिल में छिप गया।

कुछ देर बाद कुत्ता घर के अंदर घूमता रहा, लेकिन उसे न बिल्ली मिली और न चूहा। आखिर वह वहाँ से चला गया।

चूहे ने धीरे से अपना सिर बाहर निकाला।

उसने चारों ओर देखा और आवाज लगाई—

“मिन्नी! खतरा टल गया। अब तुम नीचे आ सकती हो।”

मिन्नी धीरे-धीरे अलमारी से नीचे उतरी।

उसके चेहरे पर अब घमंड नहीं था। वह कुछ देर तक चूहे को देखती रही।

फिर उसने प्यार से पूछा—

“तुमने मेरी जान क्यों बचाई?”

चूहा मुस्कुराया।

“क्योंकि मैं तुम्हारा दुश्मन नहीं बनना चाहता।”

मिन्नी ने कहा—

“लेकिन मैं तो हमेशा तुम्हें पकड़ना चाहती थी।”

चूहा बोला—

“हाँ, मुझे पता है। इसलिए तो मैं हमेशा तुमसे भागता था। लेकिन मैं सोचता था कि अगर हम दुश्मन बनने के बजाय दोस्त बन जाएँ तो कितना अच्छा होगा।”

मिन्नी की आँखों में चमक आ गई।

उसने अपना पंजा आगे बढ़ाया और कहा—

“तो आज से दोस्त?”

चूहा थोड़ा पीछे हटा और बोला—

“सच में?”

मिन्नी हँसकर बोली—

“हाँ, बिल्कुल!”

चूहे ने भी अपना छोटा-सा पंजा आगे बढ़ाया।

दोनों ने पंजा मिलाया।

“दोस्ती पक्की!”

उस दिन से मिन्नी ने चूहे को पकड़ने की कोशिश करना छोड़ दिया।

अब जब चूहा खाना ढूँढ़ने निकलता तो मिन्नी उसकी रखवाली करती।

और जब मिन्नी कहीं मुसीबत में पड़ती तो चूहा अपनी बुद्धि से उसकी मदद करता।

कुछ दिनों बाद दोनों की ऐसी दोस्ती हो गई कि घर के बच्चे भी हैरान रह गए।

बारह साल का लड़का बोला—

“देखो! बिल्ली और चूहा दोस्त बन गए!”

नौ साल की लड़की खुशी से बोली—

“मम्मी! अब मिन्नी चूहे को खाएगी नहीं, बल्कि उसकी रक्षा करेगी!”

मम्मी मुस्कुराकर बोलीं—

“बच्चों, यही तो सच्ची दोस्ती है। जब हम एक-दूसरे की मदद करते हैं, तो दुश्मनी भी दोस्ती में बदल सकती है।”

और नानू कहते हैं—

“बच्चो, याद रखना—किसी को छोटा समझकर उसका मजाक मत उड़ाना। कभी-कभी छोटा-सा जीव भी बड़े संकट में हमारी सबसे बड़ी मदद कर सकता है।”

🌷 कहानी की सीख

असली ताकत किसी को हराने में नहीं, बल्कि मुसीबत में उसकी मदद करने में है।

प्रेम से दुश्मनी मिट सकती है, विश्वास से दोस्ती बन सकती है और अच्छे व्यवहार से सबसे कठिन रिश्ते भी बदल सकते हैं।

 🐱🐭 बिल्ली और चूहे की प्यारी दोस्ती

एक बार की बात है। एक घर में एक सुंदर-सी बिल्ली रहती थी। उसका मालिक बहुत दयालु था। उसने बिल्ली को घर में इसलिए रखा था ताकि वह घर को चूहों से बचाए।

लेकिन वह बिल्ली बड़ी आलसी थी। उसे इधर-उधर दौड़ना बिल्कुल पसंद नहीं था। दिनभर कभी आराम से सोती, कभी धूप में बैठती और कभी अपने पंजों को चाटती रहती।

उसका मालिक उसे बहुत प्यार करता था और रोज एक कटोरी भरकर स्वादिष्ट दूध देता था।

लेकिन बिल्ली अकेले दूध नहीं पीती थी।

उसका एक छोटा-सा चूहा दोस्त भी था। दोनों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि बिल्ली दूध की कटोरी में से थोड़ा दूध चूहे के लिए भी बचाकर रखती।

एक दिन मालिक ने अचानक दोनों को साथ दूध पीते हुए देख लिया।

वह हैरान रह गया।

उसने बिल्ली से कहा—

“अरे बिल्ली! मैंने तुम्हें घर में चूहे पकड़ने के लिए रखा है और तुम तो उसी चूहे के साथ बैठकर दूध पी रही हो!”

बिल्ली ने प्यार से चूहे की ओर देखा और बोली—

“मालिक, यह सिर्फ कोई चूहा नहीं है। यह मेरा बहुत अच्छा दोस्त है। मैं इसे कैसे पकड़ सकती हूँ?”

मालिक ने चूहे की ओर देखा और पूछा—

“लेकिन तुम्हें डर नहीं लगता कि एक दिन यह बिल्ली तुम्हें नुकसान पहुँचा सकती है?”

चूहा तुरंत बोला—

“नहीं मालिक! मुझे अपनी दोस्त पर पूरा भरोसा है। यह मेरी बहुत अच्छी दोस्त है। यह मुझे कभी नुकसान नहीं पहुँचाएगी।”

मालिक कुछ देर तक दोनों को देखता रहा।

उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

वह बोला—

“वाह! आज मैंने तुम दोनों से दोस्ती का एक बहुत सुंदर सबक सीखा है। जहाँ प्यार और विश्वास होता है, वहाँ दुश्मनी की कोई जगह नहीं होती।”

फिर मालिक ने प्यार से कहा—

“अब से तुम दोनों को दूध मैं खुद पिलाऊँगा।”

बिल्ली खुशी से म्याऊँ-म्याऊँ करने लगी और चूहा खुशी से इधर-उधर दौड़ने लगा।

मालिक ने दोनों के लिए दूध की दो छोटी-छोटी कटोरियाँ रख दीं।

बिल्ली ने चूहे की ओर देखा और बोली—

“देखा! हमारी दोस्ती ने हमें दो कटोरियाँ दिला दीं!”

चूहा हँसकर बोला—

“और हमारी दोस्ती हमेशा ऐसी ही रहेगी!”

दोनों खुशी-खुशी दूध पीने लगे और मालिक उन्हें देखकर मुस्कुराता रहा।

🌸 कहानी की सीख

सच्ची दोस्ती में जाति, आकार या स्वभाव नहीं देखा जाता। सच्चा दोस्त वही है जो भरोसा करे, साथ दे और जरूरत के समय मदद करे।

प्यार और विश्वास से दुश्मन भी दोस्त बन सकते हैं। 🐱❤️🐭
🌿 नानू की पोटली

लालच का फल — रीना से एक प्यारी बातचीत

आज नानू की पोटली में एक कहानी आई है—रीना की कहानी।

रीना कक्षा दसवीं में पढ़ती है। उसने मुझे अपनी कहानी सुनाई तो मैंने उससे पूछा—

नानू: “रीना, आज तुम्हारी पोटली में कौन-सी कहानी आई है?”

रीना: “नानू, आज मैंने एक ऐसे आदमी की कहानी लिखी है जो बहुत लालची था। उसका नाम हरी था।”

नानू: “अच्छा! फिर हरी ने लालच में क्या किया?”

रीना ने मुस्कुराते हुए कहा—

रीना: “नानू, हरी के गाँव के पास एक बहुत सुंदर जंगल था। उस जंगल में एक सुंदर मोर रहता था। एक दिन हरी जंगल से गुजर रहा था। उसकी नजर मोर पर पड़ी तो वह उसे देखता ही रह गया।”

नानू: “मोर इतना सुंदर था क्या?”

रीना: “हाँ नानू! उसके रंग-बिरंगे पंख और लंबी-सी पूँछ देखकर हरी के मन में लालच आ गया। वह सोचने लगा—‘अगर मैं इस मोर को पकड़कर बेच दूँ तो मुझे बहुत सारे पैसे मिलेंगे।’”

नानू: “अच्छा! यानी मोर की सुंदरता देखकर उसे आनंद नहीं आया, बल्कि पैसे दिखाई देने लगे?”

रीना हँस पड़ी।

रीना: “बिल्कुल नानू! यही तो हरी की सबसे बड़ी गलती थी।”

नानू: “फिर?”

रीना: “हरी एक जानवर बेचने वाले व्यापारी के पास गया। उसने उससे कहा कि अगर उसके पास एक बहुत सुंदर मोर हो तो क्या वह उसे खरीदेगा?”

नानू: “और व्यापारी ने क्या कहा?”

रीना: “उसने कहा कि सुंदर मोर के अच्छे पैसे मिल सकते हैं। यह सुनकर हरी का लालच और बढ़ गया।”

मैंने रीना की ओर देखकर पूछा—

नानू: “लेकिन रीना, क्या हरी को यह नहीं सोचना चाहिए था कि मोर को भी आजादी से जीने का अधिकार है?”

रीना ने गंभीर होकर कहा—

रीना: “सोचना तो चाहिए था नानू, लेकिन लालच में आदमी सही और गलत भूल जाता है।”

मैंने कहा—

नानू: “बहुत अच्छी बात कही तुमने। अब आगे बताओ।”

रीना बोली—

रीना: “नानू, हरी जब व्यापारी से बात कर रहा था, तभी एक बाज पेड़ पर बैठा उसकी बातें सुन रहा था। बाज को पता चल गया कि हरी मोर को पकड़ना चाहता है।”

नानू: “फिर बाज ने क्या किया?”

रीना: “वह हरी का पीछा करते-करते उसके घर तक पहुँच गया और उसकी खिड़की पर बैठ गया।”

नानू: “और हरी ने उसे देख लिया?”

रीना: “हाँ! हरी की नजर बाज पर पड़ गई। उसने झट से बाज को पकड़ लिया।”

मैंने आश्चर्य से पूछा—

नानू: “अरे! अब तो हरी को एक और लालच आ गया होगा?”

रीना ने तुरंत कहा—

रीना: “हाँ नानू! वह खुशी से बोला—‘एक तीर से दो निशाने! अब इस बाज को भी मोर के साथ बेचूँगा और मुझे और ज्यादा पैसे मिलेंगे।’”

नानू: “उसकी पत्नी ने उसे समझाया होगा?”

रीना: “हाँ। उसकी पत्नी ने कहा—‘हरी, इन बेजुबान पक्षियों को पकड़कर बेचना ठीक नहीं है। इन्हें भी आजादी से जीने का अधिकार है।’”

नानू: “बहुत समझदार थी उसकी पत्नी। लेकिन क्या हरी मान गया?”

रीना ने सिर हिलाते हुए कहा—

रीना: “नहीं नानू। लालच ने उसकी समझ पर पर्दा डाल दिया था। वह बोला—‘जब मुझे इतने पैसे मिलेंगे तो तुम भी खुश हो जाओगी।’”

मैंने कहा—

नानू: “यही तो लालच की सबसे बड़ी परेशानी है। वह इंसान को यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि पैसा ही सबसे बड़ी खुशी है।”

रीना बोली—

रीना: “लेकिन नानू, कहानी में आगे हरी के साथ ऐसा हुआ कि उसे अपनी गलती समझ आ गई।”

नानू: “वह कैसे?”

रीना ने कहानी आगे बढ़ाई—

रीना: “हरी बाज को घर में बंद करके मोर पकड़ने जंगल चला गया। उसने मोर को भी पकड़ लिया और एक पिंजरे में बंद करके घर की ओर चल पड़ा।”

नानू: “और जब हरी घर से बाहर गया था, तब उसकी पत्नी ने क्या किया?”

रीना: “उसने बाज को आजाद कर दिया।”

नानू: “वाह! फिर बाज उड़ गया?”

रीना: “हाँ। लेकिन वह अपने दोस्त मोर को भूल नहीं गया। जब हरी मोर को लेकर घर पहुँचा, तो बाज वापस आया।”

नानू: “सच्ची दोस्ती यही होती है—मुसीबत में दोस्त का साथ देना।”

रीना मुस्कुराई।

रीना: “हाँ नानू। बाज ने मोर के पिंजरे की कुंडी खोलने की कोशिश की और आखिरकार पिंजरा खुल गया। मोर आजाद हो गया।”

नानू: “फिर दोनों उड़ गए?”

रीना: “हाँ। दोनों खुले आकाश में उड़ गए।”

कुछ क्षण चुप रहने के बाद रीना ने कहा—

“नानू, उस समय हरी उन्हें बस देखता रह गया। उसे बहुत पछतावा हुआ।”

मैंने पूछा—

नानू: “उसने अपनी पत्नी से कुछ कहा?”

रीना: “हाँ। उसने कहा—‘तुम सही कहती थीं। मैंने लालच में आकर बहुत गलत किया। मुझे इन पक्षियों की आजादी छीनने का कोई अधिकार नहीं था।’”

नानू: “और उसकी पत्नी?”

रीना: “उसने कहा—‘गलती हो जाना बुरी बात नहीं है, लेकिन अपनी गलती समझकर उसे दोबारा न दोहराना ही असली समझदारी है।’”

मैंने रीना की ओर देखा और कहा—

नानू: “रीना, तुम्हारी कहानी में मुझे सबसे अच्छी बात यही लगी कि हरी को अंत में अपनी गलती का एहसास हुआ। लेकिन तुम्हें पता है, इस कहानी से बच्चों को एक और बड़ी सीख मिलती है?”

रीना: “क्या, नानू?”

नानू: “यह कि पशु-पक्षी भी हमारी तरह इस धरती के जीव हैं। उन्हें भी स्वतंत्रता, सुरक्षा और प्रेम चाहिए। हमें उनकी सुंदरता देखकर उन्हें पकड़ना नहीं, बल्कि उनके खुले आकाश में उड़ने की खुशी देखनी चाहिए।”

रीना ने मुस्कुराकर कहा—

“तो नानू, मेरी कहानी की सीख यही हुई कि लालच हमें गलत रास्ते पर ले जाता है और संतोष हमें सही रास्ता दिखाता है?”

मैंने कहा—

“बिल्कुल! और इसे याद रखने के लिए बस एक बात—”

**“लालच बुरी बला है,

संतोष सबसे बड़ा धन है।
और किसी जीव की आजादी छीनना कभी सही नहीं।”**

रीना ने अपनी कॉपी बंद की और मुस्कुराते हुए कहा—

“नानू, अब अगली कहानी भी मैं आपको ही सुनाऊँगी।”

मैंने कहा—

“नानू की पोटली हमेशा तुम्हारी कहानियों के लिए खुली है, रीना!”

🐪 ऊँट का घमंड और गधे की समझदारी

एक शाम रिया नानू के पास बैठी थी। नानू ने मुस्कुराकर पूछा—

नानू: रिया बेटा, आज नानू की पोटली में कौन-सी कहानी डालें?

रिया: नानू, आज ऐसी कहानी सुनाइए जिसमें कोई घमंडी हो और उसे अपनी गलती का एहसास हो जाए।

नानू: अच्छा! तो सुनो एक ऊँट और गधे की कहानी।

एक गाँव में एक ऊँट और एक गधा रहते थे। दोनों एक ही मालिक के यहाँ काम करते थे। ऊँट बहुत लंबा था और उसे अपनी लंबाई पर बड़ा घमंड था। गधा छोटा था, लेकिन बहुत समझदार था।

एक दिन ऊँट ने गधे से कहा—

ऊँट: देखो भाई! मैं कितना लंबा हूँ। मैं पेड़ की सबसे ऊँची डाल के पत्ते भी खा सकता हूँ। तुम तो छोटे हो, तुम क्या कर सकते हो?

गधा: भाई, हर किसी में कोई न कोई खूबी होती है। इसलिए किसी को अपने से छोटा समझकर उसका मजाक नहीं उड़ाना चाहिए।

ऊँट: अरे, तुम मुझे समझाओगे? तुम तो मुझसे बहुत छोटे हो!

रिया ने बीच में पूछा—

रिया: नानू, फिर क्या हुआ?

नानू: अगले दिन मालिक ने दोनों पर भारी-भारी बोरियाँ लाद दीं और उन्हें मेले में सामान पहुँचाने के लिए भेज दिया।

रास्ते में एक नदी आई। नदी पर एक संकरा-सा पुल था। ऊँट अपनी लंबाई के घमंड में अकड़कर पुल पर चलने लगा। उसकी पीठ पर रखी बोरियाँ इधर-उधर हिलने लगीं। उसी समय तेज हवा चलने लगी।

गधे ने चिंता से कहा—

गधा: भाई, धीरे-धीरे चलो। हवा बहुत तेज है। तुम्हारी बोरियाँ गिर सकती हैं।

ऊँट हँसते हुए बोला—

ऊँट: तुम छोटे हो, इसलिए डर रहे हो। मुझे मत सिखाओ। मैं तुमसे कहीं बड़ा और मजबूत हूँ!

तभी अचानक हवा का एक तेज झोंका आया।

ऊँट: अरे! मेरी बोरी... संभालो!

ऊँट की एक भारी बोरी एक तरफ झुकने लगी। ऊँट उसे संभाल नहीं पा रहा था।

गधा तुरंत उसके पास पहुँचा। वह छोटा था, इसलिए बोरी के नीचे घुस गया और अपने शरीर से उसे सहारा दे दिया।

गधा: भाई, जल्दी से बोरी को ठीक करो। मैं इसे संभाले हुए हूँ।

ऊँट ने किसी तरह बोरी को फिर से ठीक किया। थोड़ी देर बाद दोनों सुरक्षित पुल पार कर गए।

ऊँट की आँखों में आँसू आ गए।

ऊँट: भाई, मुझे माफ कर दो। आज मुझे समझ आया कि केवल लंबा होना ही बड़ी बात नहीं है। मेरी लंबाई आज मेरे किसी काम नहीं आई, लेकिन तुम्हारी समझदारी ने मेरी बोरी भी बचाई और मुझे भी परेशानी से बचा लिया।

गधा: कोई बात नहीं भाई। हमें अपनी किसी भी खूबी पर घमंड नहीं करना चाहिए। जरूरत के समय एक-दूसरे के काम आना ही सबसे बड़ी बात है।

रिया खुशी से बोली—

रिया: नानू, अब ऊँट को अपनी गलती समझ आ गई!

नानू: हाँ बेटा। और यही इस कहानी की सीख है—

🌱 सीख

किसी को छोटा समझकर उसका मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। हर व्यक्ति में कोई न कोई विशेष गुण होता है। घमंड से नहीं, बल्कि समझदारी और सहयोग से मुश्किलों का सामना किया जा सकता है।
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नानू की पोटली

 घमंडी नेवला और समझदार चूहा

न्यायिका और नानू के बीच संवाद

न्यायिका: नानू, आज आपकी पोटली में कौन-सी कहानी है? कोई मजेदार कहानी सुनाइए न!

नानू: बिल्कुल बेटा! आज मैं तुम्हें एक घमंडी नेवले और समझदार चूहे की कहानी सुनाता हूँ। लेकिन ध्यान रखना, इस कहानी में तुम्हारे लिए एक बहुत बड़ी सीख छिपी है।

न्यायिका: अच्छा नानू! जल्दी सुनाइए।

नानू: एक घने जंगल में एक बड़े से पेड़ के नीचे एक नेवला रहता था। वह अपने आपको बहुत ताकतवर और बहादुर समझता था। उसे लगता था कि जंगल में उससे ज्यादा शक्तिशाली और बुद्धिमान कोई दूसरा जानवर है ही नहीं।

न्यायिका: नानू, क्या वह सचमुच इतना ताकतवर था?

नानू: ताकतवर तो वह था, लेकिन उसे अपनी ताकत पर बहुत घमंड था। एक दिन उसकी मुलाकात एक चूहे से हुई। वह चूहा बहुत समझदार, विनम्र और अच्छे स्वभाव का था। जंगल के सभी जानवर उससे प्यार करते थे।

न्यायिका: फिर तो नेवले को भी उससे दोस्ती कर लेनी चाहिए थी!

नानू: बिल्कुल बेटा! लेकिन नेवले को चूहे की लोकप्रियता देखकर जलन होने लगी। वह मन ही मन सोचने लगा, “ये जंगल के सारे जानवर इस छोटे-से चूहे की इतनी तारीफ क्यों करते हैं? मैं उससे कहीं ज्यादा ताकतवर और बुद्धिमान हूँ। फिर मेरी तारीफ कोई क्यों नहीं करता?”

न्यायिका: नानू, दूसरों की तारीफ सुनकर जलना तो अच्छी बात नहीं है।

नानू: तुमने बिल्कुल सही कहा। लेकिन घमंड और ईर्ष्या में डूबे नेवले को यह बात कौन समझाता! उसने सोचा, “अगर मैं इस चूहे को ही रास्ते से हटा दूँ, तो जंगल के सभी जानवर मुझे पसंद करने लगेंगे।”

न्यायिका: ओह! लेकिन वह चूहे को कैसे मारेगा?

नानू: नेवले ने एक चालाकी भरी योजना बनाई। वह जंगल में रहने वाली एक बहुत भूखी बिल्ली के पास गया और बोला, “बिल्ली मौसी, मैंने जंगल में एक बहुत मोटा-तगड़ा चूहा देखा है। उसे खाकर तुम्हारी कई दिनों की भूख मिट जाएगी।”

न्यायिका: बिल्ली तो चूहे को देखकर जरूर उसके पीछे भागी होगी!

नानू: हाँ बेटा! नेवले की बात सुनकर बिल्ली चूहे की तलाश में निकल पड़ी। जब वह चूहे के पास पहुँची, तो चूहा समझ गया कि उसे खाने के लिए बिल्ली को किसने भेजा है।

न्यायिका: फिर चूहे ने क्या किया? क्या वह डरकर भाग गया?

नानू: नहीं, न्यायिका! चूहा बहुत समझदार था। उसने बिल्ली से कहा, “बिल्ली मौसी, मुझे पता है कि आप मुझे खाना चाहती हैं। लेकिन मुझे एक बहुत बुरी बीमारी है। डॉक्टर ने कहा है कि कुछ ही दिनों में मेरी मृत्यु हो जाएगी। यदि आप मुझे खाएँगी, तो हो सकता है कि आपको भी वह बीमारी लग जाए।”

न्यायिका: यह सुनकर तो बिल्ली डर गई होगी!

नानू: बिल्कुल! बिल्ली ने सोचा, “अपनी भूख मिटाने के लिए मैं अपनी जान खतरे में क्यों डालूँ?” और वह बिना चूहे को खाए वहाँ से चली गई।

न्यायिका: वाह नानू! चूहे ने तो अपनी बुद्धिमानी से अपनी जान बचा ली। लेकिन नेवले को तो बहुत गुस्सा आया होगा।

नानू: हाँ बेटा! जब नेवले को पता चला कि उसकी चाल नाकाम हो गई है, तो वह आग-बबूला हो गया। उसे चूहे की समझदारी और भी ज्यादा खटकने लगी।

कुछ दिन बीत गए। एक दिन चूहे ने देखा कि जंगल का राजा शेर नेवले की ओर बढ़ा चला आ रहा है। चूहा समझ गया कि नेवले की जान खतरे में है।

न्यायिका: फिर चूहे ने नेवले को सावधान किया होगा?

नानू: हाँ! वह तुरंत नेवले के पास पहुँचा और बोला, “नेवला भाई, जल्दी भागो! शेर तुम्हारी ओर आ रहा है। अगर तुमने देर की, तो वह तुम्हें खा जाएगा।”

नेवले ने घमंड से गर्दन उठाई और कहा, “तुम अपनी चिंता करो! मैं बहुत ताकतवर और बहादुर हूँ। मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”

न्यायिका: अरे! चूहा तो उसकी मदद कर रहा था, फिर भी वह उसकी बात नहीं मान रहा था?

नानू: यही तो उसके घमंड की सबसे बड़ी समस्या थी। चूहे ने एक बार फिर समझाया, “भाई, बहादुरी का मतलब खतरे को पहचानकर सही कदम उठाना भी होता है। जल्दी यहाँ से निकलो!”

लेकिन नेवला अपनी ही तारीफ करता रहा, “मैं किसी से नहीं डरता! मुझे कोई नहीं मार सकता!”

तभी शेर वहाँ पहुँच गया। उसे सामने देखकर नेवले के होश उड़ गए। वह अपनी जान बचाने के लिए तेजी से भागा, लेकिन शेर ने उसे पकड़ लिया और अपना शिकार बना लिया।

न्यायिका: नानू, अगर नेवला चूहे की बात मान लेता, तो शायद उसकी जान बच जाती!

नानू: बिल्कुल बेटा! चूहा न केवल समझदार था, बल्कि उसका स्वभाव भी अच्छा था। उसने उस नेवले की जान बचाने की कोशिश की, जो उससे ईर्ष्या करता था और उसे नुकसान पहुँचाना चाहता था।

न्यायिका: नानू, मुझे इस कहानी से तीन बातें सीखने को मिलीं।

नानू: अच्छा! जरा मुझे भी तो बताओ।

न्यायिका: पहली बात, हमें दूसरों की अच्छाइयों और सफलताओं से जलना नहीं चाहिए। दूसरी बात, घमंड करने के बजाय अपनी खूबियों का सही इस्तेमाल करना चाहिए। और तीसरी बात, किसी की अच्छी सलाह को केवल इसलिए नहीं ठुकराना चाहिए कि वह हमसे छोटा या कमजोर है।

नानू: शाबाश, न्यायिका! तुमने तो पूरी कहानी का सार ही बता दिया।

याद रखो बेटा, सच्ची महानता ताकत या ऊँचे पद में नहीं, बल्कि अच्छे स्वभाव, विनम्रता और समझदारी में होती है। जो व्यक्ति दूसरों को छोटा समझता है, वह अक्सर अपनी ही गलतियों से नुकसान उठाता है।

न्यायिका: धन्यवाद नानू! आज से मैं भी दूसरों की अच्छी बातों से सीखने की कोशिश करूँगी।

नानू: बस बेटा, यही तो है नानू की पोटली का असली खजाना!

 🌿 कहानी की सीख

* घमंड और ईर्ष्या मनुष्य के विवेक को नष्ट कर देते हैं।

* बुद्धिमानी और सूझबूझ से बड़ी से बड़ी मुसीबत का सामना किया जा सकता है।

* किसी को छोटा या कमजोर समझकर उसकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

* सच्चा अच्छा स्वभाव वही है, जो अपने विरोधी की मुसीबत में भी उसकी मदद करने को तैयार रहे।
🦌🐒 नानू की पोटली

हिरण और बंदर की सच्ची दोस्ती

रीत: नानू, आज कोई मजेदार कहानी सुनाइए न!

नानू: क्यों नहीं, रीत! आज की कहानी है एक हिरण और एक बंदर की। दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे।

रीत: कितने अच्छे?

नानू: इतने अच्छे कि दोनों हमेशा साथ-साथ रहते थे। हिरण खाना नहीं खाती तो बंदर भी खाना नहीं खाता था।

रीत: वाह! बिल्कुल पक्की दोस्ती!

नानू: हाँ, लेकिन एक दिन उनकी दोस्ती में थोड़ी गड़बड़ हो गई।

रीत: क्यों नानू?

नानू: एक दिन बंदर नदी के किनारे घूम रहा था। तभी नदी से एक मगरमच्छ बाहर आया।

मगरमच्छ: “अरे बंदर भाई! तुम हिरण के दोस्त हो न?”

बंदर: “हाँ, वह मेरी सबसे अच्छी दोस्त है।”

मगरमच्छ: “लेकिन वह तुम्हारी चुगली करती है। तुम उससे दोस्ती क्यों रखते हो? मुझसे दोस्ती कर लो।”

रीत: अरे! मगरमच्छ तो झूठ बोल रहा था!

नानू: बिल्कुल! लेकिन बंदर ने बिना सोचे उसकी बात मान ली। वह गुस्से में हिरण के पास पहुँचा।

बंदर: “हिरण! मैं तुम्हें अच्छा दोस्त समझता था, लेकिन तुम मेरी चुगली करती हो। अब हमारी दोस्ती खत्म!”

हिरण: “क्या? मैंने तुम्हारी चुगली कब की? तुम मेरी बात तो सुनो!”

बंदर: “मुझे कुछ नहीं सुनना!”

और बंदर वहाँ से चला गया।

रीत: नानू, बंदर ने हिरण की बात सुनी ही नहीं। यह तो उसकी गलती थी।

नानू: बिल्कुल! और आगे उसे अपनी गलती का पता भी चल गया।

रास्ते में बंदर को एक लोमड़ी मिली।

बंदर: “लोमड़ी बहन, अब तुम मेरी दोस्त हो।”

लोमड़ी: “हाँ-हाँ, क्यों नहीं!”

दोनों साथ-साथ चलने लगे। तभी उन्हें रास्ते में केले का एक बड़ा ढेर दिखाई दिया।

बंदर: “वाह! इतने सारे केले! मेरी दोस्त लोमड़ी मेरे लिए भी जरूर रखेगी।”

लेकिन लोमड़ी तो फटाफट सारे केले खाने लगी।

बंदर: “अरे! मेरे लिए भी तो कुछ छोड़ दो!”

लोमड़ी: “पहले मैं खाऊँगी!”

और लोमड़ी ने सारे केले चट कर दिए।

रीत: ओह! बंदर को एक भी केला नहीं मिला?

नानू: एक भी नहीं!

थोड़ी दूर जाने पर बंदर के पैर में काँटा चुभ गया।

बंदर: “आह! मेरे पैर में काँटा चुभ गया। लोमड़ी बहन, जरा मदद कर दो।”

लोमड़ी: “मुझे बहुत जल्दी है। मैं नहीं रुक सकती।”

और लोमड़ी वहाँ से चली गई।

रीत: अब तो बंदर को समझ आ गया होगा कि सच्चा दोस्त कौन है!

नानू: हाँ, लेकिन तभी कुछ बहुत अच्छा हुआ।

उधर हिरण नदी के किनारे बैठी बंदर का इंतजार कर रही थी।

हिरण: “बंदर आज बहुत देर कर रहा है। चलो, मैं उसे ढूँढ़कर आती हूँ।”

हिरण जंगल की ओर चली। थोड़ी दूर जाकर उसे बंदर दिखाई दिया।

हिरण: “अरे बंदर! तुम्हें क्या हुआ?”

बंदर: “मेरे पैर में काँटा चुभ गया है। बहुत दर्द हो रहा है।”

हिरण ने तुरंत कुछ नरम पत्ते लिए, उन्हें पीसा और बंदर के पैर पर लगा दिया।

फिर उसे नदी के किनारे ले जाकर पानी पिलाया।

रीत: हिरण ने तो बिल्कुल देर नहीं की!

नानू: सच्चा दोस्त मुसीबत में देर नहीं करता, बेटा।

हिरण ने कहा—

हिरण: “तुम यहीं आराम करो। मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने को लेकर आती हूँ।”

वह गई और बंदर के लिए केले ले आई।

बंदर: “अरे! केले! मेरे पसंदीदा केले!”

भूखा बंदर सारे केले खा गया।

रीत: सारे?

नानू: हाँ, सारे!

रीत: और हिरण नाराज नहीं हुई?

नानू: नहीं। वह तो अपने दोस्त को खाते देखकर खुश हो रही थी।

बंदर को अपनी गलती याद आई। उसकी आँखों में आँसू आ गए।

बंदर: “हिरण, मुझे माफ कर दो। तुम ही मेरी सच्ची दोस्त हो। मैंने किसी और की बात पर विश्वास करके तुम्हारा दिल दुखाया।”

हिरण मुस्कुराई।

हिरण: “कोई बात नहीं। लेकिन आगे से किसी की बात सुनकर अपने दोस्त पर तुरंत विश्वास मत खोना।”

बंदर ने हिरण को गले लगा लिया।

बंदर: “पक्का वादा! अब हम किसी के बहकावे में नहीं आएँगे।”

रीत: नानू, अब दोनों फिर से पक्के दोस्त बन गए?

नानू: हाँ! और उनकी दोस्ती पहले से भी ज्यादा मजबूत हो गई।

रीत: नानू, आज की कहानी की सीख क्या है?

नानू: सीख बहुत आसान है—

🌱 नानू की सीख

“सच्चा दोस्त वही होता है जो मुसीबत में हमारा साथ दे। और किसी की बात सुनकर अपने दोस्त पर बिना सच्चाई जाने विश्वास नहीं खोना चाहिए।”

रीत: समझ गई नानू! सच्चे दोस्त को पहचानना है और उसकी बात भी सुननी है।

नानू: शाबाश रीत! अब बताओ, अगली बार नानू की पोटली से कौन-सी कहानी निकालें?

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📱📺 फोन और टीवी की कहानी

एक शाम लक्ष्मी नानू के पास बैठी थी। नानू अपनी पुरानी यादों की पोटली खोलकर कुछ सुनाने ही वाले थे कि लक्ष्मी ने पूछा—

लक्ष्मी: नानू, आज की पोटली में कौन-सी कहानी है?

नानू: आज की कहानी थोड़ी अलग है। इसमें कोई राजा-रानी नहीं, न कोई जंगल के जानवर। आज की कहानी है एक फोन और एक पुरानी टीवी की।

लक्ष्मी: अरे वाह! फोन और टीवी भी कभी बात करते हैं क्या?

नानू: कहानी में तो सब बातें कर सकते हैं। बस सुनने के लिए कल्पना की आँखें खोलनी पड़ती हैं।

लक्ष्मी हँसते हुए बोली—

लक्ष्मी: अच्छा नानू, फिर शुरू करो।

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🏠 श्याम का सुंदर घर

एक शहर में श्याम नाम का एक लड़का रहता था। उसका घर बहुत सुंदर था। घर की दीवारों पर तरह-तरह की तस्वीरें लगी थीं। कमरे में सुंदर सजावटी सामान रखा था और हर चीज अपनी जगह पर सजी हुई थी।

श्याम के पास एक नया-नया स्मार्टफोन भी था। वह फोन बहुत चमकदार था और उसमें इंटरनेट, कैमरा, वीडियो, खेल और न जाने कितनी सुविधाएँ थीं।

लेकिन उसी घर में एक पुरानी टीवी भी थी।

टीवी कई वर्षों से श्याम के घर में थी। उसका आकार आजकल के पतले टीवी जैसा नहीं था। वह थोड़ी भारी थी और उसके किनारे भी पुराने हो चुके थे। लेकिन उसने उस घर के कई साल देखे थे।

एक दिन शाम को श्याम ने अपना फोन टीवी के पास रख दिया।

फोन और टीवी पहली बार इतने पास-पास थे।

दोनों एक-दूसरे को चुपचाप देखने लगे।

कुछ देर बाद फोन ने मन ही मन सोचा—

फोन: यह कौन है? कितनी पुरानी लग रही है!

टीवी ने भी फोन को देखा और सोचा—

टीवी: लगता है यह कोई नया उपकरण है। आजकल के बच्चे इसे हाथ से अलग ही नहीं करते।

तभी श्याम कमरे में आया।

उसने टीवी चालू की और कुछ देर तक चैनल बदलता रहा।

एक चैनल लगाया।

फिर दूसरा।

फिर तीसरा।

श्याम को कुछ पसंद नहीं आया।

आखिर उसने झुंझलाकर टीवी बंद कर दी और बोला—

श्याम: पता नहीं इसमें क्या देखें! यह टीवी तो बहुत पुरानी हो गई है। अब इसका कोई फायदा नहीं। लगता है खराब भी हो गई है।

यह कहकर श्याम अपना फोन उठाकर कमरे से चला गया।

टीवी ने श्याम की सारी बातें सुन ली थीं।

उसे बहुत बुरा लगा।

वह मन ही मन उदास होकर बोली—

टीवी: मैंने इस घर के इतने साल देखे हैं। जब श्याम छोटा था, तब वह मेरे सामने बैठकर कार्टून देखा करता था। पूरे परिवार के लोग मेरे सामने बैठकर समाचार और कार्यक्रम देखा करते थे। आज मुझे पुरानी कहकर कोई पूछता ही नहीं।

फोन वहीं रखा हुआ था। उसने टीवी को उदास देखा तो बोला—

फोन: क्या हुआ? तुम इतनी उदास क्यों हो?

टीवी: श्याम ने कहा कि मैं पुरानी और बेकार हो गई हूँ। शायद सच ही कह रहा है।

फोन थोड़ा इतराते हुए बोला—

फोन: देखो, मैं तो आज के जमाने का हूँ। हर समय श्याम मुझे अपने साथ रखता है। घर में हो या बाहर, मैं उसके साथ रहता हूँ। मुझसे वह बातें करता है, तस्वीरें खींचता है, वीडियो देखता है, जानकारी खोजता है और दुनिया भर की खबरें जान लेता है।

टीवी चुप रही।

फोन ने फिर कहा—

फोन: तुम तो एक ही जगह पड़ी रहती हो। न कहीं जा सकती हो, न अपने आप कुछ कर सकती हो। तुम्हारा जीवन कितना बोरिंग है!

टीवी ने मुस्कुराकर कहा—

टीवी: अरे-अरे! इतना घमंड भी अच्छा नहीं है।

फोन: घमंड? मैं तो सिर्फ अपनी खूबियाँ बता रहा हूँ।

टीवी: अच्छा, तो सुनो। तुम आज नए हो, इसलिए तुम्हें लगता है कि तुमसे अधिक उपयोगी कोई नहीं है।

फोन: लेकिन मैं तो सचमुच बहुत काम आता हूँ!

टीवी: इसमें कोई शक नहीं। तुम बहुत उपयोगी हो। लेकिन यह मत भूलो कि तुमसे पहले भी दुनिया चलती थी।

फोन थोड़ा चुप हुआ।

टीवी ने कहा—

टीवी: जब मैं नई थी, तब लोग मेरे सामने बैठकर समाचार देखते थे, देश-दुनिया की घटनाएँ जानते थे, खेल देखते थे, गाने सुनते थे और मनोरंजन करते थे। परिवार के लोग साथ बैठते थे। मेरे सामने बैठकर कितनी बातें होती थीं, कितनी हँसी-मजाक होती थी!

फोन: लेकिन अब जमाना बदल गया है।

टीवी: बिल्कुल बदल गया है। और बदलना ही तो जीवन की खूबसूरती है।

फोन ने पूछा—

फोन: तो क्या तुम्हें बुरा नहीं लगता कि आज लोग तुम्हें कम इस्तेमाल करते हैं?

टीवी कुछ देर चुप रही और फिर बोली—

टीवी: कभी-कभी लगता है। लेकिन मुझे यह भी पता है कि समय कभी एक जैसा नहीं रहता। पहले मैं नई थी, आज तुम नए हो। कल कोई और नई चीज आ सकती है।

फोन ने हँसते हुए कहा—

फोन: मतलब तुम कहना चाहती हो कि एक दिन मैं भी पुराना हो जाऊँगा?

टीवी: क्यों नहीं? विज्ञान लगातार आगे बढ़ रहा है। आज तुम सबसे आधुनिक हो, लेकिन कल तुमसे भी नया और तेज उपकरण आ सकता है।

फोन कुछ सोचने लगा।

फिर धीरे से बोला—

फोन: तुम्हारी बात सही है। अगर विज्ञान आगे बढ़ता रहेगा तो हो सकता है कि एक दिन मेरी जगह भी कोई नई तकनीक ले ले।

टीवी: यही तो जीवन का नियम है। कोई चीज हमेशा नई नहीं रहती।

फोन ने अपनी आवाज धीमी करते हुए कहा—

फोन: तो फिर मुझे तुमसे घमंड नहीं करना चाहिए।

टीवी: बिल्कुल नहीं। तुम्हारी अपनी उपयोगिता है और मेरी अपनी।

फोन: और शायद हमें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए।

टीवी: यही समझदारी की बात है।

तभी लक्ष्मी ने नानू को बीच में रोक दिया।

लक्ष्मी: नानू, अब तो फोन को अपनी गलती समझ आ गई!

नानू: हाँ लक्ष्मी, लेकिन कहानी अभी पूरी कहाँ हुई?

लक्ष्मी: और क्या हुआ?

नानू मुस्कुराए और बोले—

नानू: अगले दिन श्याम कमरे में आया। उसने टीवी को देखा और फिर अपना फोन मेज पर रखा।

उसने टीवी चालू की और परिवार के साथ बैठकर एक पुराना कार्यक्रम देखने लगा।

थोड़ी देर बाद उसने फोन से उस कार्यक्रम की एक तस्वीर खींची और मुस्कुराकर बोला—

श्याम: टीवी पुरानी जरूर है, लेकिन इसकी यादें बहुत नई और प्यारी हैं।

टीवी जैसे मन ही मन मुस्कुरा उठी।

फोन ने भी टीवी से धीरे से कहा—

फोन: लगता है आज श्याम ने भी समझ लिया कि पुरानी चीज हमेशा बेकार नहीं होती।

टीवी: और तुमने भी समझ लिया कि नई चीज हमेशा सबसे अच्छी नहीं होती।

दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए।

---

🌱 नानू की सीख

लक्ष्मी: नानू, इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

नानू: यही कि समय के साथ चीजें बदलती रहती हैं। जो आज नया है, वह कल पुराना हो सकता है। इसलिए हमें अपनी नई चीजों पर घमंड नहीं करना चाहिए और पुरानी चीजों को बेकार समझकर उनका अपमान नहीं करना चाहिए।

लक्ष्मी: यानी पुरानी चीजों में भी यादें और महत्व छिपा हो सकता है?

नानू: बिल्कुल! और एक बात और—विज्ञान कितना भी आगे बढ़ जाए, हमें उसका उपयोग समझदारी से करना चाहिए। फोन और टीवी हमारे काम के साधन हैं, हमारे मालिक नहीं।

लक्ष्मी ने मुस्कुराकर कहा—

लक्ष्मी: समझ गई नानू! अब मैं अपने फोन से कहूँगी—“ज्यादा घमंड मत करना, कल तुम भी पुराने हो सकते हो!”

नानू जोर से हँस पड़े—

नानू: बस, यही बात मेरी पोटली में बाँधकर रख लो!

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