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मेरे सपनों का स्कूल

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मेरे सपनो का स्कूल ------------------------- मेरे माता पिता मूलतः शिक्षक थे अत: उनकी हर बात में शिक्षा थी ।वैसे भी "मातृमान पितृमान आचार्यमान पुरुषो वेदा "अर्थात पहले माता फिर पिता ही शिक्षक होते है ।महात्मा गांधी ने कहा है ''संस्कारवान घर जैसा कोई विद्यालय नही तथा चरित्रवान अभिभावक जैसे कोई अध्यापक नही"।ऐसा ही माहौल मेरे घर का था जहाँ किसी भी क्षेत्रीयता, साम्प्रदायिकता व जातीय संकीर्णता का कोई स्थान न था । पिता जी का मानना था कि स्कूल ऐसा हो जहां की दीवारे भी कुछ सिखाये यानि स्कूल का एक- एक कण कुछ न कुछ सिखाये जरूर । इत्तिफ़ाक से मुझे प्रारम्भ से ही अनेक संस्थानों ,योग्य व अनुभवी गुरुजन तथा विद्वान मार्गदर्शकों का सानिध्य मिला । नेतृत्व क्षमता के कारण अपनी प्रतिभा दिखाने तथा विकसित करने के अवसरो ने मेरे ज्ञान को भी बढ़ाया । इस तरह मेरे विश्वविद्यालय भी मैक्सिम गोर्की के विद्यालय ही रहे । वैदिक,जैन,मार्क्स ,गांधी -नेहरू,भगत सिंह को पढ़ने से बुद्धि का विकास हुआ ।पानीपत ,दिल्ली,सहारनपुर तथा ताशकन्द-मॉस्को में अध्ययन के लिए जाने से बुद्धि तंतुओ को खोला व द...

Amrit Mahotsav of India in USA 🇺🇸

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भारत की स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव पर  अमेरीका के शहर फेलदिलेफिया में  स्टेर डे  फ्री  स्कूल द्वारा आयोजित महात्मा गांधी-मार्टिन लूथर किंग जूनियर विचार पर एक संगोष्ठी का  आयोजन प्रसिद्ध समाज शास्त्री एवं सामाजिक-राजनीतिक चिन्तक डॉ  एनथोनी मानतेरियो (Anthony Monterio) की अध्यक्षता में किया गया.  यह कार्यक्रम उस  शृंखला की एक कड़ी थी जो विगत एक माह से भी अधिक समय से आजादी और महात्मा गांधी की भूमिका विषय पर हो रहीं हैं.  इस बैठक मे  अमेरिका के विभिन्न क्षेत्रों मे रहने वाले लगभग  24 युवाओ ने भाग लिया.     कार्यक्रम के शुभारंभ में  युवा विचारक पूर्वा चटर्जी ने 21 फरवरी, सन 1936 में  अमेरीका  से  महात्मा गाँधी को मिलने भारत गये  तीन सदस्यीय दल के नेता  थर्मन द्वारा बापू से  बारडोली में लिए गए  साक्षात्कार को पढ़ कर सुनाया, जिसमें गांधी जी ने  भारत की निर्धनता  एवं  उसके  सामाजिक-राजनीतिक  निदान की बात की थी.  डॉ एनथोनी मानतेरियो ने  कहा कि...

Thronton Creek School, Seattle, Washington-USA

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Thronton Creek School,Seattle, Washington-USA.      आज हमे इस स्कूल में जानें, उसे समझने और जानने का  अवसर मिला.        सरकार द्वारा  संचालित  यह एक निशुल्क  सामान्य स्कूल है परंतु हमारे यहां के किसी मोटी फीस  वसूलने  वाले कथित इंटरनेशनल स्कूल से कहीं बेहतर.        संयुक्त राज्य अमेरिका में एसा नियम है कि किसी भी किसी भी स्कूल में पढ़ने का पहला अधिकार उसके पड़ोस में रहने वाले बच्चे का है.  किसी भी बस्ती की  सम्पत्ति की कीमत उस जगह में चल रहे विद्यालय तथा अस्पताल के स्टैंडर्ड से है.     इस स्कूल में लगभग 580 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करते हैं और औसत 15 -20  बच्चों की एक कक्षा मे एक टीचर है.       बच्चों के खेल, शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए हर प्रकार के उपकरण हैं और उन्हें ऑडियो-वीडियो,  कथा-कहानियों,गीत -संगीत खेलकूद के माध्यम से पढ़ाया जाता है.  प्रबंधन का एसा मानना है कि अक्षर व भाषा ज्ञान के लिए व्याकरण की बहुत ज्यादा जरुरत नहीं है वह तो वाता...

safarnama chandigarh-solan

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सफ़रनामा -1 चंडीगढ़ -05.06.2018  श्री प्रमोद शर्मा ,स्व0 दीदी निर्मला देशपांडे जी के बहुत ही विश्वसनीय तथा निकटष्ठ साथी रहे है । मुझे दो बार दीदी के साथ उनके कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिला है । सन 2004 के अखिल भारत रचनात्मक समाज के जालंधर (पंजाब) सम्मेलन में। उनकी महती भूमिका रही थी  । उसके बाद भी उन्होंने दीदी के काम को जारी रखा हुआ है । वे हर वर्ष सिंतबर - अक्टूबर में चंडीगढ़ में ही एक युवा महोत्सव का आयोजन करते है जिसमे अनेक देशों के नौजवान शामिल रहते है । वर्ष 2008 का आयोजन स्व0 निर्मला दीदी को ही समर्पित था । गत वर्ष ,पाकिस्तान समेत लगभग 30 देशो के युवाओ ने इसमें भाग लिया था । चंडीगढ़ में एक अजीब नज़ारा था जब  विभिन्न देशों के सेंकडो  युवा अपने -२ देश की वेशभूषा पहन कर अपनी -२ भाषा मे अमन और भाईचारे के गीत गाते और नारे लगाते निकले थे । उनका संगठन " युवसत्ता"  चंडीगढ़ तथा आस पास के क्षेत्रो में शांति ,सदभाव,मैत्री एवम पर्यावरण पर बेहतर काम करता है जिसकी सर्वत्र प्रशंशा है । प्रमोद शर्मा व उनकी पत्नी दोनो ही बहुत ही विनम्र भाव से सेवा कार्य कर रहे ...

शुभकामनाएं

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*शुभकामनाएं*  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की हरियाणा राज्य सम्मेलन के अवसर पर पार्टी की नगर कमेटी, सभी सदस्यों, शुभचिंतकों तथा प्रगतिशील नागरिकों की ओर से हार्दिक अभिनन्दन एवं स्वागत करता हूं तथा आशा व्यक्त करता हूं कि यह सम्मेलन न केवल इस प्रदेश में कम्युनिस्ट आंदोलन को मजबूत करेगा, वहीं देशभर में चल रहे कार्यो को भी सशक्त करेगा.       पानीपत एक एतिहासिक शहर है. इसकी ख्याति इसमे हुई तीन लड़ाइयों की वज़ह से भी है. दिल्ली पर उसी शासक के राज किया जिसने पानीपत फतेह किया. पर यहां मैं एक दूसरा पक्ष भी रखना चाहूँगा कि पानीपत के तत्कालीन शहरियों का कभी भी इन युद्धों से कभी कोई सरोकार नहीं रहा. बेशक य़ह युद्ध भूमि रहीं हैं क्योंकि अफ़ग़ान दर्रे से दिल्ली तक एक तरफ तो ढाक के जंगल थे और दूसरी तरफ यमुना नदी और यह ही खुली जगह थी जो खुली थी और हमलावरों को पानी, रसद आदि मुहैया करा सकती थी. यह के लोग तो शांति प्रिय थे जिन्होंने यह निश्चय किया हुआ था कि वे फौज, पुलिस और शराब के धंधे में हिस्सा नहीं लेंगे. एसे लोगों के लिए तो य़ह लड़ाइयाँ सदा आफ़त बन कर आयी. दूसर...

My family and Ram Ram

*Inner voice-6*  (Nityanootan broadcast service) मेरे पिता सीता राम( मास्टर सीता राम जी सैनी) के महाप्रयाण का जब समय आया तो वे बोले कि ' राम-राम' बोलो पर हमारा आर्य समाजी संस्कारो का मन राम को मर्यादा पुरुषोत्तम एक महान आदर्श  व्यक्ति  तो मानता रहा परन्तु अवतार पुरुष भगवान राम नही ,इसलिये राम -२ का जाप करने में हिचकिचाहट दिखाई और कहा कि आप का तो नाम ही सीता राम है तो वे बोले चल छोड़ *सीता राम सीता राम* बोल । हमने उनकी आज्ञा का पालन किया और वे अपनी अंतिम यात्रा को चल पड़े । हमारा परिवार कोई सनातनी परिवार नही रहा परन्तु इसके बावजूद भी वह *राम प्रेमी* था । हमारी सात पुश्तों में मेरा नाम राम मोहन, मेरे पिता सीता राम, उनके पिता बख्तावर राम, उनके पिता जय राम ,उनके पिता श्योराम, उनके पिता राम सिंह व उनके पिता का नाम जागो राम था । मेरे बुजुर्ग साधारण किसान थे जिनकी यात्रा होशियारपुर(अब पंजाब) से शुरू होकर बुलन्दशहर (उत्तरप्रदेश) से होती हुई तत्कालीन रोहतक (पंजाब-हरियाणा) ज़िला के गांव बलि कुतुबपुर तक पहुंची । लोक ,कुल व ग्राम देवता ही उनके आराध्य रहे होंगे । बहुत कोशिशों के बावजूद भ...

My trip to the land of Gandhi(Paper reading 📚)

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Saturday Day Free School, Pheledelphia (USA) की ओर से प्रसिद्ध गांधीवादी अश्वेत नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर की 1959 में सम्पन्न भारत यात्रा पर एक लेख "My visit to the land of Gandhi " विषय पर एक संगोष्ठी में गांधी ग्लोबल फॅमिली के महासचिव के रूप मे भाग लिया .     सबसे प्रसन्नता की बात यह थी कि इस संगोष्ठी में भाग लेने वाले अमरीकी-गैर अमेरिकी लोगों में अधिकांश युवा थे, जिनका बौध्दिक स्तर अत्यंत सम्पन्न था. गांधी विचार, कार्यो तथा दर्शन की प्रति निष्ठा एवं साफ़गोई इनमे स्पष्ट प्रगट हो रहीं थीं.       सर्वप्रथम पूर्वा चटर्जी ने लेख का पाठन किया तत्पश्चात सत्याग्रह, रचनात्मक कार्यो, अस्पृश्यता निवारण, ग्राम स्वराज, स्त्री शक्ति जागरण एवं उनकी भूमिका आदि-2 विषयों पर चर्चा की. वक्ताओं का मत था कि अहिंसा दुर्बल का अस्त्र न होकर पराक्रम एवं निडरता की पराकाष्ठा है.       डॉ Anthony Monterio, पूर्वा चटर्जी तथा अन्य भागीदारों ने 1957 में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से महात्मा गांधी के साउथ अफ्रीका प्रवास तथा उनके भारत...