मेरे सपनों का स्कूल
मेरे सपनो का स्कूल ------------------------- मेरे माता पिता मूलतः शिक्षक थे अत: उनकी हर बात में शिक्षा थी ।वैसे भी "मातृमान पितृमान आचार्यमान पुरुषो वेदा "अर्थात पहले माता फिर पिता ही शिक्षक होते है ।महात्मा गांधी ने कहा है ''संस्कारवान घर जैसा कोई विद्यालय नही तथा चरित्रवान अभिभावक जैसे कोई अध्यापक नही"।ऐसा ही माहौल मेरे घर का था जहाँ किसी भी क्षेत्रीयता, साम्प्रदायिकता व जातीय संकीर्णता का कोई स्थान न था । पिता जी का मानना था कि स्कूल ऐसा हो जहां की दीवारे भी कुछ सिखाये यानि स्कूल का एक- एक कण कुछ न कुछ सिखाये जरूर । इत्तिफ़ाक से मुझे प्रारम्भ से ही अनेक संस्थानों ,योग्य व अनुभवी गुरुजन तथा विद्वान मार्गदर्शकों का सानिध्य मिला । नेतृत्व क्षमता के कारण अपनी प्रतिभा दिखाने तथा विकसित करने के अवसरो ने मेरे ज्ञान को भी बढ़ाया । इस तरह मेरे विश्वविद्यालय भी मैक्सिम गोर्की के विद्यालय ही रहे । वैदिक,जैन,मार्क्स ,गांधी -नेहरू,भगत सिंह को पढ़ने से बुद्धि का विकास हुआ ।पानीपत ,दिल्ली,सहारनपुर तथा ताशकन्द-मॉस्को में अध्ययन के लिए जाने से बुद्धि तंतुओ को खोला व द...