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Showing posts from February, 2026

"धार्मिक संस्थानों में बच्चों और महिलाओं का यौन शोषण: एक गंभीर और व्यापक समस्या" nityanootan.blogspot.com/25.02.2026

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"धार्मिक संस्थानों में बच्चों और महिलाओं का यौन शोषण: एक गंभीर और व्यापक समस्या" – समय आ गया है बच्चों को इन आवासीय गुरुकुलों, मदरसों और ईसाई धार्मिक प्रशिक्षण स्कूलों  से मुक्त करने का ●भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन जब इस स्वतंत्रता का दुरुपयोग बच्चों और महिलाओं के यौन शोषण के लिए होने लगे तो चुप रहना अपराध है। हाल के दिनों में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर प्रयागराज में POCSO एक्ट के तहत यौन शोषण के आरोप लगे हैं, लेकिन सवाल किसी एक व्यक्ति या एक आश्रम का नहीं है। सवाल उन हजारों आवासीय धार्मिक संस्थानों का है – हिंदू गुरुकुलों, मुस्लिम मदरसो, ईसाई चर्च स्कूलों और मठ-आश्रमों का – जहां लंबे समय से बच्चों (खासकर नाबालिग लड़कों और लड़कियों) तथा महिलाओं (ननों, शिष्याओं, देवदासियों) के खिलाफ यौन शोषण की शिकायतें बार-बार आ रही हैं। कई मामलों में कोर्ट में केस दर्ज हुए, दोषियों को सजा भी मिली, लेकिन समस्या जड़ से नहीं उखड़ी। यह कोई प्राचीन या मिथकीय बात नहीं है – यह आज की वास्तविकता है।  ●गुरुकुल और हिंदू आश्रमों में शोषण क...

कमजोर वर्गों की सुरक्षा: एक गंभीर प्रश्न. Nityanootan.blogspot.com/23.02.2026

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कमजोर वर्गों की सुरक्षा: एक गंभीर प्रश्न 1982-83 के आसपास, मैंने प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी अरुणा आसफ अली से दिल्ली में उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान मैंने उनसे अनुरोध किया कि वह पानीपत आएं, जहां हम एक बड़ी सभा का आयोजन करना चाहते थे। अरुणा जी मुस्कुराईं और बातचीत आगे बढ़ी। लेकिन 1984 में पानीपत में फरवरी के महीने में भयंकर सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हुआ। इसके परिणामस्वरूप, अनेक सिख भाइयों पर हमले हुए, गुरुद्वारों को जलाया गया, उनकी संपत्तियों को लूट लिया गया और कई लोग घायल हुए। जब अरुणा जी को इन घटनाओं का पता चला, तो वह पानीपत आईं। मेरा कार्य था उन्हें रिसीव करना और उन तमाम घटनास्थलों पर ले जाना। दुर्भाग्यवश, उनके एक्सीडेंट के कारण उनकी एक टांग में फ्रैक्चर था। बड़ी मुश्किल से वह गाड़ी से उतरीं। मैंने उनका हाथ अपने हाथ में लिया और उन्हें ले जाने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने मुझसे एक सवाल किया, "तुम तो कहते थे कि तुम्हारे पास बहुत आदमी हैं, पर वह आदमी कहां थे जब इन अल्पसंख्यक सिखों पर हमले हो रहे थे?" यह प्रश्न मेरे लिए चुनौती बन गया, और उसके ब...

"महात्मा गांधी: एक निडर सत्य का संदेश"

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"महात्मा गांधी: एक निडर सत्य का संदेश" ●आज सुबह की बातचीत में हमने महात्मा गांधी के विचारों को फिर से जीवित किया। गांधीजी कोई मजबूरी नहीं थे—वे एक धांत मजबूती थे। अहिंसा उनके लिए कोई कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ा हथियार थी। हमने देखा कि कैसे सत्याग्रह, धैर्य और सामूहिक दबाव से क्रूर से क्रूर ताकत भी झुक सकती है। किसान आंदोलन इसका जीता-जागता प्रमाण है—बिना हिंसा के सरकार को झुकना पड़ा, क्योंकि जनता एकजुट थी। लेकिन सवाल उठता है: क्या अहिंसा हर जगह काम करती है? अगर सामने वाला बिना शर्म का तानाशाह हो, तो क्या सिर्फ सत्य बोलने से जीत मिलेगी? जवाब है—नहीं। अहिंसा तभी विजयी होती है, जब उसके साथ समय, धैर्य और वैश्विक दबाव जुड़े हों। नेल्सन मंडेला, मार्टिन लूथर किंग—सबने यही किया। उन्होंने अहिंसा को नैतिक ताकत दी, लेकिन असल दबाव था—आर्थिक प्रतिबंध, जनचेतना और अंतरराष्ट्रीय निंदा। ●भारत में आज भी ये रास्ता प्रासंगिक है। कश्मीर हो या नॉर्थ-ईस्ट, अहिंसात्मक प्रतिकार ने बहुत कुछ बदला, लेकिन सशस्त्र ताकत के सामने अकेला व्यक्ति नहीं टिकता। इसलिए जरूरत है—सामूहिक शक्ति की। देश में...

"हम सब कहते हैं 'उज्ज्वल भारत', Ram Mohan Rai/16.02.2026

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"हम सब कहते हैं 'उज्ज्वल भारत', लेकिन आज सुबह-सुबह 80 प्रतिशत लोग उठकर बस एक सवाल सोचते हैं—'आज राशन मिलेगा या नहीं?' अमेरिका से डील हुई, टैरिफ घटे—माल निर्यात बढ़ेगा। लेकिन किसान? वो जो पहले से ही कर्ज़ में डूबा है, अब सस्ते अमेरिकी सोयाबीन, कॉर्न, चिकन से अपना बाजार गँवा देगा। वो पाँच किलो अनाज से आगे कभी नहीं निकलेगा। रूस से तेल छोड़ना—कहते हैं 'स्ट्रैटेजी' है। पर सच्चाई? अमेरिकी तेल 30 % महँगा है। हमारे पेट्रोल-पंपों की कीमत बढ़ेगी, ट्रक वाले ड्राइवरों की कमाई घटेगी, दूध-सब्जी महँगी हो जाएगी। फिर भी चुप्पी। चीन से क्या लेना? वो गरीबी खत्म करने की मशीन है—हर गाँव में फैक्ट्री, स्कूल, अस्पताल। हम? 'फ्री राशन' और 'मेक इन इंडिया' का पोस्टर। एक तरफ़ दुनिया देखती है, दूसरी तरफ़ गाँवों में बच्चे ड्रॉपआउट हो जाते हैं। इगो छोड़ो। दुनिया से दोस्ती करो, पर अपनी जड़ें मजबूत करो। वरना ये 'विश्वगुरु' का सपना, बस सोशल मीडिया का ठुनका बनके रह जाएगा।" Ram Mohan Rai. Nityanootan.blogspot.com/ 16.02.2026

●बांग्लादेश चुनाव: साम्प्रदायिक तत्वों की हार, भारत-विरोधी शक्तियों का पतन और नई सरकार की चुनौतियां - राम मोहन राय (नित्यनूतन - 14.02.2026)

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●बांग्लादेश चुनाव: साम्प्रदायिक तत्वों की हार, भारत-विरोधी शक्तियों का पतन और नई सरकार की चुनौतियां बांग्लादेश में हाल ही में संपन्न हुए आम चुनावों ने न केवल देश की राजनीतिक दिशा को एक नया मोड़ दिया है, बल्कि दक्षिण एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर भी गहरा प्रभाव डाला है। इन चुनावों को अप्रत्यक्ष रूप से अति साम्प्रदायिक तत्वों और भारत-विरोधी पार्टियों की हार के रूप में देखा जाना चाहिए। हालांकि, यह स्पष्ट है कि यह जीत पूर्ण रूप से लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की विजय नहीं है। बांग्लादेश की जनता के सामने जब दो प्रमुख राजनीतिक ताकतों में से एक को चुनने की मजबूरी थी, तो उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को अपना समर्थन दिया। इस लेख में हम इन चुनावों के ऐतिहासिक संदर्भ, प्रमुख खिलाड़ियों की भूमिका, हार-जीत के कारणों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।  ●ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: बीएनपी का उदय और शेख मुजीब का युग बीएनपी की स्थापना को समझने के लिए हमें बांग्लादेश के इतिहास में झांकना होगा। यह पार्टी जनरल जिया उर रहमान द्वारा 1978 में स्थापित की गई थी, जो शेख मु...

राजनीतिक भाषा की गिरावट: सभ्यता से असभ्यता की ओर (Nityanootan.blogspot.com/13.02.2026

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राजनीतिक भाषा की गिरावट: सभ्यता से असभ्यता की ओर भारतीय लोकतंत्र की नींव में भाषा की मर्यादा और शिष्टाचार का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। एक समय था जब किसी मामूली सभा या बैठक में भी यदि कोई व्यक्ति असभ्य या अपशब्दों का प्रयोग करता, तो उसे तुरंत सचेत किया जाता कि "असंसदीय भाषा का प्रयोग न करें"। लेकिन आज का परिदृश्य इससे बिलकुल उलट है। अब तो संसद जैसे सर्वोच्च मंच पर ही 'तू-तड़ाक' और असभ्य भाषा का बोलबाला है। क्या हम इसे लोकतंत्र की परिपक्वता कहें या सभ्यता की गिरावट? यह प्रश्न हर शिक्षित और जागरूक नागरिक के मन में उठ रहा है। संसद, जो देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है, वहां की बहसें राष्ट्र की दिशा तय करती हैं। लेकिन हाल के वर्षों में यहां की भाषा इतनी गिर चुकी है कि इसे सुनकर शर्म आती है। उदाहरण के लिए, कुछ प्रमुख राजनेता जैसे निशिकांत दुबे और गिरिराज सिंह, जो कथित रूप से ऊपरी जाति से आते हैं और पढ़े-लिखे होने का दावा करते हैं, स्वयं को 'स्वामी' कहलवाते हैं। लेकिन संसदीय पटल पर उनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा क्या कहलाएगी? वे भाषा के कथित अधिकृत ...

● भारत की गुट निरपेक्ष नीति: हमारी ताकत और चुनौतियां / 12.02.2026

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● भारत की गुट निरपेक्ष नीति: हमारी ताकत और चुनौतियां भारत की विदेश नीति हमेशा से गुट निरपेक्षता और शांति पर आधारित रही है। यह नीति न केवल हमारी ताकत बनी है, बल्कि हमें वैश्विक मंच पर एक मजबूत और स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। हम कभी दबाव में नहीं आए, न झुके और न ही कभी अपने राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध कोई समझौता किया। यह नीति हमें उन चुनौतियों से बचाती रही है जो अन्य राष्ट्रों को गुलामी या संघर्ष की ओर धकेलती हैं। लेकिन आज के दौर में, जब हमारे पड़ोसी देशों में युद्धप्रिय ताकतें सत्ता में हैं, तो क्या हम फिर से अकेले पड़ गए हैं? क्या हमें अपनी इस नीति को और मजबूत बनाना चाहिए या बेबस होकर देखते रहना चाहिए?  ●ऐतिहासिक संदर्भ: घेराबंदी की साजिश और हमारी विजय एक समय था जब भारत को भौगोलिक स्तर पर घेरने की योजनाएं बनाई जा रही थीं। एक ओर विस्तारवादी चीन था, जिसकी आक्रामक नीतियां हमारे सीमाओं को चुनौती दे रही थीं। दूसरी ओर पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देश थे, जहां अस्थिरता और बाहरी हस्तक्षेप आम थे। यहां तक कि समुद्र में एक छोटे से द्वीप डिएगो गार्सि...

एपस्टीन फाइल का उजागर होना: भारत में भी असर, लेकिन सच्चाई कहां?

एपस्टीन फाइल का उजागर होना: भारत में भी असर, लेकिन सच्चाई कहां? हाल ही में एपस्टीन फाइल के उजागर होने का असर अब हमारे देश भारत में भी दिखने लगा है। बेशक, हमारे राजनेताओं के इसमें शामिल होने के कोई ठोस प्रमाण अभी तक सामने नहीं आए हैं, लेकिन उससे पहले ही रक्षात्मक आरोप-प्रत्यारोप की आहट सुनाई देने लगी है। निशाने पर हर बार की तरह पुराने आरोपी पंडित नेहरू, अटल बिहारी वाजपेयी और नाना जी देशमुख हैं। कुछ चित्रों को उनसे जोड़ा जा रहा है, हालांकि ये चित्र कुछ भी साबित नहीं करते। लेकिन भारतीय जनसंघ के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर बलराज मधोक की पुस्तक बहुत कुछ बाद में प्रमाणित तथ्यों को उजागर करती है। ये किताब व्यक्तिगत चरित्र को निरूपित करती है, लेकिन राजनीति में व्यक्तिगत जीवन कुछ मायने नहीं रखता। अपने नेताओं का बचाव करते हुए लोग भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को अपनी नजीर बनाते हैं, लेकिन वह कोरा झूठ और कल्पना है। भगवान कृष्ण तो आप्त पुरुष थे, अर्थात जिन्होंने जिंदगी भर कोई पाप नहीं किया। फिर उनका इन चरित्रहीन नेताओं से कोई तुलना कैसे हो सकती है? यह सब बचाव की कोशिशें हैं, लेकिन सच्चाई से मुंह मोड़ना आस...

निरंकारी विवाह पद्धति- हमारा प्रत्यक्ष अनुभव

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अपने पारिवारिक निरंकारी मित्र की पुत्री के विवाह समारोह में मुझे निरंकारी पद्धति से संपन्न होने वाले इस पवित्र संस्कार को निकट से समझने और अनुभव करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह समारोह इतना सरल, सहज और आध्यात्मिक रूप से प्रेरणादायक था कि मन को गहन शांति और आनंद की अनुभूति हुई। समस्त अनुष्ठान मात्र १५ से २० मिनट में पूर्ण हो गए, जिसमें कोई अनावश्यक औपचारिकताएं या दिखावा नहीं था, बल्कि हर क्षण निरंकार की भक्ति और परस्पर सम्मान की भावना से ओतप्रोत था। वर और वधू ने सर्वप्रथम एक-दूसरे को जयमाला अर्पित की। इस दौरान उन्होंने "धन निरंकार" का उच्चारण करते हुए एक-दूसरे को साष्टांग प्रणाम किया और चरण स्पर्श कर अभिवादन किया। यह दृश्य इतना पवित्र और भावपूर्ण था, मानो दोनों आत्माएं निरंकार के समक्ष अपनी निष्ठा और समर्पण व्यक्त कर रही हों। तत्पश्चात, स्थानीय संयोजक दंपति ने उन्हें संयुक्त रूप से पुष्पमाला पहनाई, जो उनके जीवनसाथी बनने की प्रतीक थी – एक ऐसा बंधन जो न केवल शारीरिक, अपितु आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है। फिर, अवतार वाणी के चार चुने हुए पदों का पाठ हुआ, जो गृहस्थ जीवन को...

Commemoration of the 97th Birth Anniversary of Pujya Bhai Ji Dr. S.N. Subba Rao – 7th February 2026

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GANDHI GLOBAL FAMILY  CIRCULAR Subject: Commemoration of the 97th Birth Anniversary of Pujya Bhai Ji Dr. S.N. Subba Rao – 7th February 2026 Dear Members of the Gandhi Global Family,   All Units, Branches, Associates, and Dedicated Workers, With profound reverence and deep gratitude, we call upon every unit, branch, and member of the Gandhi Global Family across the country and beyond to wholeheartedly commemorate the 97th Birth Anniversary of our beloved Pujya Bhai Ji Dr. S.N. Subba Rao on Saturday, 7th February 2026. Bhai Ji, a lifelong disciple of Mahatma Gandhi’s ideals, was a towering Gandhian, freedom fighter, founder of the National Youth Project, fellow of the Gandhi Peace Foundation, and the guiding force behind the Mahatma Gandhi Sewa Ashram in Chambal Valley. Through his tireless efforts, he inspired lakhs of youth, transformed lives by rehabilitating hundreds of dacoits, promoted Shramdan, national integration, peace, non-violence, harmony, and selfl...